रविवार, 29 नवंबर 2009

कोई तो रोके इनको

भिंड जिले के दबोह से किसी रीना ने बीहड़ पर यह पोस्ट छोड़ी है। उन्होंने इसी बीहड़ी इलाके की एक नई समस्या (हालांकि यह नई नहीं है) की ओर ध्यान खींचा है। उनके गांव में नौजवान मनचले किस कदर लड़कियों का निकलना मुशिकल किए हुएं हैं। रीना कहती हैं कि उन्होंने इस समस्या के बारे में एसपी से शिकायत की थी लेकिन कोई सुनता ही नहीं। अब बताइए गुंडा और डाकू कौन पैदा करता है समाज या पुलिस। रीना की पोस्ट जस की तस बीहड़ में प्रकाशित कर रहा हूं।
-योगेश जादौन
I kindly request to Bhind S.P that some boys of village deowrikala which comes in daboh thana are doing gundagiri ,they are troubling girls by doing bad signs and also by saying bad words like-chalegi kya ,daigi kya ,by singing bad songs ,please bhagvaan ke liye kuch tokijiye agar polish koi kudam nahi uthati hai to koi ladki majboor hokar kuch kur laige
gundo ke naam -
naraindra singh s/o daishpath singh
pushpaindra singh s/o jundail singh
chandu singh s/o raguraajsingh
sir in logo ki vajah se kuch logo ne gaun hi chod diya
so i kindly request you to catch them and punish them
thanks for readsing my complain

बुधवार, 4 नवंबर 2009

बीहड़ में घुसा बाजार

बीहड़ में अपहरण का उद्योग और फूलन के बाद डकैती को ग्लेमर का बाना पहनते हम देख चुके हैं। अब शहर से लेकर गांव और देहात तक अपनी जड़ जमा चुका बाजार काररूक बीहड़ की तरफ घूम गया है। मुरैना और उसके आसपास बीहड़ की जमीन को निजी और बहुराष्ठीय कंपनी को देने के बाद अब उत्तरप्रदेश सरकार ने भी कानपुर देहात और उसके आसपास की यमुना के बीहड़ की जमीन पर फूलों की खेती कराने की योजना तैयार की है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि सरकार बीहड़ के उत्थान का यह पम काम किसके जरिए और किस तरह कराएगी। अगर सरकार इस काम में नरेगा की तरह गांव की सीधी भागेदारी करा उनके आर्थिक विकास का रास्ता तैयार करती है तब तो यह ठीक हैऔर अगर वह मध्यप्रदेश की सरकार की तर्ज पर चल कर इसे निजी कंपनियों के हवाले करती है तो यह बीहड़ में एक नये तरह के संघर्ष को जन्म दे सकती है। आखिर बीहड़ के अक्खड़, आक्रामक और विद्रोही तेवर ने उसका जो व्यक्तिवत बनाया है वह इसे कैसे बर्दाश्त करेगा कि कोई उसकी जमीन से लाभ कमाए और वह देखता रहे।