शनिवार, 11 सितंबर 2010

सुल्ताना के बारे में पूरी कथा जल्द

बहुत दिन से बीहड़ के बारे में कुछ नहीं लिख सका हूं। हालांकि इस बीच बीहड़ शांत रहा हो ऐसा कुछ भी नहीं। आगरा में जगन गुर्जर के भाइयों की दहशत के साथ ग्वालियर में नवोदित गैंग और छोटे मोटे गिरोह के अपहरण की घटनाओं में शामिल होने के समाचार मिलते रहे, लेकिन इस सबके बारे में नहीं लिख सका। कारण सुल्ताना डाकू के बारे में अभी हालत में हुए अध्ययन से कुछ नई बाते निकल कर सामने आई। मसलन सुल्ताना के बेटे को उसी अंग्रेज कप्तान ने पाल पोस कर बड़ा किया जिसने सुल्ताना को गिरफ्तार किया था। सुल्ताना के बारे में पूरी कथा जल्द ही आप लोगों के सामने होगी।

मंगलवार, 18 मई 2010

राजा खान राहुल पंडित मुठभेड़ में ढेर


एक लंबे समय के बाद बीहड़ में पुलिस को कामयाबी हाथ लगी है। यह कामयाबी चित्रकूट के जंगलों में एसटीएफ को मिली है। सोमवार तड़के दो घंटे की मशक्कत के बाद पाठा में आतंक का पर्याय डकैत ओमप्रकाश यादव उर्फ राजा खान को एसटीएफ ने एक साथी के साथ मार गिराया। राजा खान पर ६० हजार रुपये का इनाम घोषित था। जबकि मारा गया उसका साथी राहुल पंडित उर्फ गुरु २२ हजार का इनाम था। इनके पास पुलिस से लूटी गई थ्री नॉट थ्री राइफल व दोनाली बंदूक बरामद हुई है. इसके अलावा भारी मात्रा में कारतूस भी मिले।

शनिवार, 8 मई 2010

बदलता बीहड़ और बाजार

बहुत दिन हुए बीहड़ पर कोई पोस्ट नहीं लिख सका। इसके दो कारण रहे। एक मेरी व्यस्तता और दूसरे बीहड़ में फैली शांति। शांति जो ऊपरी है। इन दिनों बीहड़ी इलाके में एक नया दौर शुरू हुआ है। हम सब साक्षी हैं १९९० के बाद के दौर के। यह वह दौर था जब अचानक बाजार फैलने लगा। तोड़ फोड़ शुरू हुआ। बाजार ने हाथ पांव फैलाना शुरू किया। देखते ही देखते सभ्यता का चेहरा बदलने लगा। कई मंजिले भवन और सभी सुविधाओं से संपन्न कॉम्पलैक्स। यह नया बीहड़ था। बाजार का बीहड़ जो लूटना जानता था बिना किसी मुरब्बत है। इस बीहड़ ने पूरा नक्शा ही बदल दिया है। अब अपराधी बीहड़ की तरफ नहीं भागता है वह शहर में रहता है और बाइकर्स गैंग चलाता है। इटावा में हाल ही में पकड़े गए ऐसे बाइकर्स लुटेरों ने स्वीकार किया कि वह डकैत बनना चाहते थे लेकिन लुटेरे बन गए। यह क्या है। अपराध का बाजारीकरण या बाजार के बीहड़ी असर की बुनियाद। कहना मुश्किल है लेकिन बीहड़ का चेहरा समाज के साथ ही बदला है यह बीहड़ पर नजर रखने वाले जानते हैं। जब आजादी की जंग भी तब इस बीहड़ में ब्रह्मचारी सरीखे डकैत थे। आजादी के बाद देश स्वाभिमान से खड़ा होना सीख रहा था तो इस बीहड़ में स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने वाले मोहर सिंह, माधौ सिंह, मलखान, लाखन और रूपा जैसे डकैत हुए। देश बड़ा उद्योग लगे और बीहड़ में अपराध का उद्योगीकरण हुआ और अब बाजारीकरण।

शनिवार, 16 जनवरी 2010

सब कुछ शांत नहीं बीहड़ में

बीहड़ ऊपर से भले ही शांत दिखाई दे रहा हो लेकिन यहां सब कुछ शांत नहीं है। तमाम बड़े डकैतों के मारे जाने के बाद भी अभी उनके हथियार और साथी सुरक्षित हैं। यह सही है कि अभी इन साथियों ने अपनी गतिविधियों को शांत कर रखा है लेकिन इसे बड़ी तैयारी भी माना जा रहा है। आगरा, धौलपुर और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में आतंक का पर्याय रामविशेष गुर्जर, जगन गुर्जर के साथी संगठित हो रहे हैं तो चित्रकुट में भी रागिया, केवट गैग के बचे साथियों ने संगठित होना शुरू कर दिया है। इटावा और औरैया का बीहड़ अभी कुछ शांत है।