शनिवार, 27 दिसंबर 2008

धीरे-धीरे घिर रहा है जगन

बीहड़ और खासकर राजस्थान के लिए सिरदर्द जगन गुर्जर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। बीते दिनों जिस तरह उसके साथी पकड़े गए हैं उससे लगता है कि इस दस्यु का सूचना तंत्र कमजोर हुआ है साथ ही पुलिस की चौकसी इस गैंग को लेकर तेज हुई है। यह अलग बात है कि पुलिस को इस गैंग के खिलाफ कोई बड़ी सफलता नही है हालांकि पुलिस जगन की साथी दस्यु सुंदरी कौमेश को पकड़ने में कामयाब हुई है। यह भी सच है कि जगन इस बीच कोई बड़ी हलचल भी नहीं कर सका है।
चुनाव के बाद फिर बढ़ी हलचल
मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही एक बार फिर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र में अपहरण की वारदात बढ़ने लगी हैं। बीते 15 दिन में अकेले आगरा से ही तीन लोगों का अपहरण हो चुका है। इसमें दो व्यवसायी है। पुलिस इनमें से एक का भी पता नहीं लगा सकी है। यही नहीं अब यह साफ हो गया है कि दस्यु गैंग ने शहरों में अपने केरियर्स फैला रखे हैं। यह छोटे बदमाश बहुत कम रकम के लिए पकड़ कर गैंग तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कई मामलों में तो अब अपह्रत को बीहड़ में पहुंचाने की बजाए शहर के ही किसी इलाके में रख दिया जाता है। दस्यु दलों की चुप्पी और शहरी इलाकों में बढ़ रही अपराध की घटना एक नए चलन की ओर इशारा तो जरुरी ही करती हैं।
बदली अपराध की पट्टी
जैसे बदलती हैं नदी अपना मार्ग, जैसे बदलती है जलवायु वैसे ही बीहड़ में अपराध की जगह भी समय-समय पर बदलती रही है। बीहड़ को जानने वाले यह जानते हैं कि मध्यप्रदेश के मुरैना से लेकर उत्तरप्रदेश के औरैया और जालौन तक फैले बीहड़ में अपराधियों की हलचल के स्थान बदलते रहे हैं। 1960-70 के दशक तक अपराध की हलचल मुरैना और भिंड के जिलों में अधिक थी। तब इस इलाके में मलखान सिंह, मोहर सिंह,लाखन, माखन,छिद्दा, मास्टर मंशाराम जैसे गैंग थे। 70 के बाद अपराध की यह हलचल यहां से पूर्व की ओर खिसकी और तब अपराध और गैंग की चहलकदमी औरैया, इटावा, कानपुर देहात और जालौन के इलाके में अधिक रही। इसर दौरान, राम सिंह,मान सिंह मल्लाह, फूलन देवी के गैंग इस इलाके में थे। 2000 के बाद अपराध की यह पट्टी फिर पश्चिम की ओर खिसक कर आगरा, धौलपुर और मुरैना जिले में आ गई है। आज इस इलाके में तीन गुर्जर गैंग का आतंक है।

शनिवार, 13 दिसंबर 2008

दस्यु जबरा लोधी ढेर


चालीस हजार रुपये का इनामी और मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के कई जिलों में अपनी दहशत फैलाने वाले जबरा लोधी को भिंड जिले के दबोह थाना क्षेत्र के मिहोनी गांव के पास गुना पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। इस मुठभेड़ में दबोह के थाना प्रभारी आरबीएस सिकरवार भी गोली लगने से घायल हो गए। डकैत जबरा के पास से पुलिस को 12 बोर की बंदूक और कुछ कारतूस मिले हैं जबकि उसके साथी भाग जाने में सफल रहे। जबरा पर मध्यप्रदेश सरकार ने 25 और उत्तरप्रदेश सरकार ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसका आतंक मध्यप्रदेश के सेवढ़ा दतिया, थरेट और यूपी के उरई और जालौन जिलों में था।

बुधवार, 10 दिसंबर 2008

चुरकुट को पकड़ बता रहे दस्यु

धौलपुर पुलिस पांच हजार के एक ईनामी बदमाश रामवकीला को पकड़कर उसे दस्यु बता रही है। पुलिस की वाहवाही देखिए इस दस्यु से उसे एक देशी तमंचा और एक कारतूस मिला है। इसे पकड़ने के लिए जैसा कि पुलिस का कहन है उसे एडीएफ टीम प्रभारी महावीर सिंह बसई डांग थाना की फोर्स को साथ लेना पड़ा। कथित दस्यु की घेराबंदी भी की उसने भागने की कोशिश की तब कहीं बड़ी मुश्किल से उसे दबोचा जा सका।

रविवार, 23 नवंबर 2008

कौमेश गिरफ्तार


11 लाख के इनामी डकैत दस्यु जगन गुर्जर की साथी कौमेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुरैना पुलिस के साथ बीते दिनो हुई मुठभेड़ में कौमेश घायल हुई थी। वह धौलपुर के सरमथुरा के एक नर्सिंग होम में इलाज करा रही थी। यहीं से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। कौमेश अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए बीहड़ में कूदी थी। गुर्जर आंदोलन के दौरान वह आंदोलन को समर्थन देने को लेकर चर्चा में आई थी।

रविवार, 16 नवंबर 2008

बच निकला दस्यु जगन

11 लाख का इनामी और तीन राज्यों में वांछित दस्यु सरगना जगन गुर्जर शनिवार की रात ग्वालियर पुलिस से हुई मुठभेड़ में बच निकला। पुलिस को टाटा सूमो और कुछ हथियार ही मिल सके। अनुमान है कि मुठभेड़ में दो डकैतों को गोलियां लगी हैं। जगन गुर्जर के साथ महिला डकैत कोमेश गुर्जर भी थी। यह मुठभेड़ चिन्नौनी थाना क्षेत्र में हुई।

शनिवार, 15 नवंबर 2008

चुनाव में चहका बीहड़

पहली बार बीहड़ में एक नई पहल हो रही है। सदियों से दबे और आज भी हद तक पिछड़े लोगों में उत्तेजना है। इस उत्तेजना की वजह है चुनाव। मध्यप्रदेश में एक जिला है मुरैना। बीहड़ और बेहद जटिल परिस्थिति वाले इस जिले के पास ही है श्योपुर जिला। मुरैना को काटकर बनाए गए इस जिले में सहरिया आदिवासी की बड़ी संख्या है। यह जाति सदियों से पिछड़ी रही है। इसकी कई पीढ़ियों में तो ट्रेन देखी तक नहीं है। शहर में चलने और उठने बैठने का क्या कायदा होता है यह नहीं जानते। इसके कई लोग तो पुलिस के सिपाही को देखते ही अभी हाल तक भागते रहे हैं लेकिन लगता है अब हालात बदल रहे हैं। इस जिले की तहसील विजयपुर से भाजपा के टिकट पर पहली वार इस इलाके से कोई आदिवासी चुनाव लड़ रहा है और यह आदिवासी है सीताराम जो गर्व से अपने नाम के आगे आदिवासी लगाते हैं। यहां मुद्दा किसी पार्टी का नहीं है लेकिन मौजूदा हालात में जिस तरह सीताराम के साथ वहां का आदिवासी एकजुट हुआ है उसने जता दिया है कि सत्ता में आने की छटपटाहट उनके अंदर भी है। चिंता है तो सिर्फ इतनी कि यह छटपटाहट किसी वैचारिक स्तर या अपने हक को पाने की अकुलाहट के बजाए जाति के उसी विषैले समीकरण से पैदा हुई है जिसने मौजूदा राजनीति के परिदृश्य को नीलकंठी बना दिया है। कुछ भी हो लेकिन इससे आदिवासियों में राजनीति का स्वाद तो मिलेगा ही और देर से ही सही वह अच्छे बुरे की पहचान करेंगे। सीताराम आदिवासी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि सहरिया आदिवासियों में से चुनाव लड़ने वाले शायद वह पहले प्रत्याशी हैं जो किसी राष्ट्रीय पार्टी के टिकट पर चुनावन लड़ रहे हैं।

बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

जगन का करौली में डेरा

तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना दस्यु जगन गुर्जर ने इन दिनों राजस्थान के करौली जिले में डेरा डाल रखा है। बीहड़ सूत्रों के मुताबिक जगन ने अपना ठिकाना महावीर जी थाना क्षेत्र के तहत आने वाले कैमरी और खीमा का पुरा में बना लिया है। यहीं पर एक ग्रामीण की जीप से वह आवाजाही कर रहा है। पुलिस से छिपकर वह अपनी ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। इसके लिए वह हथियार और कारतूस खरीदने की फिराक में है। उसने अपने गिरोह को तीन हिस्सों में बांट रखा है। वह स्वयं दस्यु सुंदरी कौमेश के साथ है। दूसरे हिस्से की कमान उसके भाई पप्पू और पान सिंह के हाथ में है।

धौलपुर में दो दस्यु ढेर

धौलपुर पुलिस ने सरमथुरा इलाके में बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ में दो इनामी दस्यु मुन्ना कंजर और बनियाराम मीणा को मार गिराया। भाग निकले दस्यु नारायन और निहाला की तलाश जारी है। मारे गए दस्यु खान इलाके में हत्या, चौथ वसूली और पुलिस पर हमला करने के आरोप में वांछित थे। उनके ऊपर दो-दो हजार का इनाम घोषित था। पुलिस ने इनके कब्जे से एक 306 बोर और एक 315 बोर की रायफल और करीब डेढ़ सौ कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस की माने तो मारे गए दस्यु खैमरी गांव में अपने लिए हथियार और कारतूस खरीदने आए थे।

शनिवार, 18 अक्तूबर 2008

गुपचुप जारी है एक लड़ाई

देश के ह्रदयस्थल मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में है कूनो अभ्यारण। घने जंगल और पहाड़ों के बीच के गुजरती कूनो नदी अमेजन घाटी जैसा नजारा पैदा करती है। कभी यहा इलाका ग्वालियर स्टेट में आता था और पालपुर रियासत के अधीन था। यह इलाका वीरपुर तहसील के तहत आता है और यह सहरिया आदिवासी बाहुल्य है। आजादी से पहले यह इलाका सिधिंया और पापुलर राजाओं के लिए आखेट का प्रिय इलाका था। तब से लेकर आजादी के बहुत बाद तक इन आदिवासियों की ग्वालियर और पालपुर दोनों की रियासतों के उत्तराधिकारियों को लेकर श्रद्धा का भाव रहा। यह जंगल इन आदिवासियों के लिए सब कुछ है। राजाओं के शिकार के शौक के बाद भी इस इलाके में जंगल और जमीन बचे रहे। तमाम बाघ भी इस इलाके में थे। बाद में यह लुप्त हो गए। हाल ही के कुछ वर्षों में इसमें फिर बाघों को छोड़ा गया है और इस इलाके को अभ्यारण का मानक दिया गया है।इसी इलाके के आदिवासी इन दिनों बिना किसी मेधा पाटकर या बड़े नाम के अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। लड़ाई जंगल और जमीन बचाने की। इन आदिवासियों की लड़ाई मौजूदा सरकार से हो जो इन्हें जंगल से बेदखल कर चुकी है। अभ्यारण के बहाने आदिवासियों को उनके सदियों पुराने आवासों से बेदखल कर दिया गया है। सरकार ने यह काम बड़ी ही सफाई से किया है। आदिवासियों को पहले बेहतर जमीन और मुआवजा देने के बहाने जंगल से बाहर किया गया फिर उन्हें आवास के लिए मात्र 35 हजार रुपये और जमीन के नाम पर कुछ बीघा पथरीली जमीन दी गई। ऐसी जमीन जिस पर हल चलाना तो संभव है ही नहीं। अब यह आदिवासी इस ठगी से हतप्रभ हैं और उन्होंने अपने परंपरागत हथियार उठा लिए हैं। इस पर सरकार ने उनके मुकाबले पुलिस बल को उतार दिया है। कुछ महीने पहले ही इन आदिवासियों का पुलिस बल से टकराव हुआ। आदिवासियों ने पुलिस बल को लगभग घेर ही लिया। इसका बीडियो टेप मेरे पास है। जल्द ही सबके सामने लाया जाएगा।मगर सवाल यह है कि आदिवासी जीवन की यह जंग कम तक और कितनी लड़ पाएंगे। यह सवाल तब और मौजू है जब मी़डिया का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मीडिया का इस तरफ ध्यान हो भी नहीं सकता। कारण यह इलाका इतने गहरे बीहड में है जहां जाने के लिए जिगर की जरूरत है जो कमोवेश अपने को तथाकथित धुरंधर कहने वाले कारपोरेट पत्रकार और सनसनी की दम पर नाम बटोरने वालों के पास तो नहीं हो सकता। दूसरे इन आदिवासियों के साथ मेधा पाटकर,अरूंधती राय जैसा नाम भी नहीं जुड़ा कि मीडिया टीआरपी बढ़ाने के लिए बावली हो जाए फिर आखिर इनके सवालों से कौन जूझेगा। कौन उन्हें पुशतैनी जमीन से बेदखल करने के अन्याय के खिलाफ लड़ी जा रही उनके हौंसले की लड़ाई में साथे देगा कौन....

गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008

खानों पर डकैतों का कब्जा

धौलपुर इलाका पत्थरों की खान के लिए मशहूर है। इस एक काम से ही राज्यों को करोड़ों की आमदनी होती है। अफसोस इस बात का है इस इलाके पर कानून नहीं डकैतों का राज्य चलता है। दस्यु उन्मूलन में पुलिस भले ही ताकत लगा रही हो लेकिन राजस्थान के धौलपुर जिले के बसेड़ी और सरमथूरा और मुरैना जिले के सबलगढ़ और करोली के कुछ इलाकों में डकैतों का ही हुकुम चलता है। इलाके में सक्रिय एक दर्जन से अधिक दस्यु बंदूक की दम पर इन खान संचालकों से लाखों रुपये की वसूली करते हैं। जनपद के चंबल इलाके में इस समय दस्यु सरगना जगन गुर्जर पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस गैंग का सदस्य पान सिंह और कोमेश चौथ वसूली के लिए जाते हैं। करौली जनपद में प्रेम सिंह मीणा और रामबाबू काछी के हाथ वसूली की बागडोर है। यह दस्यु विशेष तरीके से काम करते हैं और किसी एक दिन आकर खान संचालक या श्रमिकों को अपना फरमान सुना चौथ की रकम और स्थान देकर एक कोड वर्ड देते हैं। तय दिन और समय तक रकम न पहुंचने तक खान में काम बंद रहता है।

रविवार, 12 अक्तूबर 2008

दस्यु सीमा परिहार सपा में

पूर्व दस्युओं का राजनीति से और राजनेताओं का दस्युओं से लगाव तमाम बयानों के बावजूद मजबूत जोड़ की तरह जुड़ा हुआ है। ताजा घटनाक्रम यह है कि फूलन को डकैत बनाने की कहानी के मुख्य सूत्रधार लालाराम और श्रीराम गैंग की सीमा परिहार अब सपा में शामिल हो गई हैं। सीमा को लेकर एक फिल्म भी बन चुकी है। इससे पहले सीमा इंडियन जस्टिस पार्टी से सांसद का उत्तरप्रदेश की इटावा सीट से चुनाव भी लड़ चुकी है। इसके बाद वह रालोद में शामिल हुई और हाल ही में सपा में शामिल हो गई हैं। सीमा पर दो दर्जन से अधिक मुकदमें हैं और इन दिनों पर औरैया जिले के दिबियापुर कसबे में रहती हैं।

रविवार, 5 अक्तूबर 2008

मुरैना से अपहृत युवकों का सुराग नहीं

राजस्थान मडरायल से अपहृत मुरैना के चारों युवकों का अब तक अता-पता नहीं लग सका है। करौली पुलिस की पार्टियां रविवार को भी मडरायल के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र में युवकों की तलाश में भटकती रही। करौली के पुलिस अधीक्षक सरवर खान की माने तो पुलिस जल्दी ही अपहरणकर्ता तक पहुंच जाएगी। इस संदर्भ में पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण क्लू भी हाथ लगे हैं।
गौरतलब है कि कैलादेवी के दर्शनों को जा रहे मुरैना के भक्त सोबरन शर्मा, रिंकू अग्रवाल, नेमीचंद अग्रवाल और सोनू अग्रवाल का अज्ञात बदमाशों ने राजस्थान के करौली जिले में चंबल नदी के मडरायल घाट के उस पार से अपहरण कर लिया था। बदमाशों ने अपहृत रिंकू के मोबाइल से ही उनके घरवालों से फोन पर बात कर 40 लाख रुपये की फिरौती मांगी है।
अपहृतों को लेकर करौली पुलिस और मुरैना मध्यप्रदेश पुलिस चकरघिन्नी बनी हुई है। वहीं अपहृतों के परिजनों का भी बुरा हाल है। युवकों की तलाश में मुरैना से गई पार्टियां भी राजस्थान के चंबल बीहड़ों में सर्च कर रही हैं। करौली के पुलिस अधीक्षक सरवर खान ने बताया कि अभी तक अपहृतों की लोकेशन उनके मोबाइल के हिसाब से चंबल घाटियों में मडरायल और सबलगढ़ की तरफ मिल रही है। सरवर के अनुसार मुकेश की बातचीत से शक है कि फिरौती के लिए फोन करने वाले मुकेश की आवाज राजस्थानी बोलचाल से मेल नहीं खा रही है। माना जा रहा है कि मुकेश दादा मुरैना का ही रहने वाला है।

मंगलवार, 16 सितंबर 2008

सवा लाख का इनामी वकीला ढेर

आपराधिक वारदातों से मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश पुलिस की नींद उड़ाने वाले दस्यु सरगना वकीला उर्फ वकीला सिंह गुर्जर को मुरैना पुलिस ने थाना देवगढ़ के बीहड़ में ठिकाने लगा दिया। डकैत सरगना के पास से एक इंग्लिश पिस्टल, 315 बेर रायफल और अन्य सामान मिला है। वकीला के चार साथी भाग निकले।

सोमवार, 15 सितंबर 2008

जमीन बेचकर फिरौती

डेढ़ महीने पहले आगरा के जौहरी बाजार से अपह्रत किए गए सुदीप राजेंद्र गुर्जर गैंग से मुक्त हो गया है। उसे मुक्त कराने के लिए घर वालों को पूरे छह लाख रुपये की फिरौती गैंग को सौंपनी पड़ी। यह रकम घर वालों ने जमीन बेचकर इकट्ठी की। यह डील ग्वालियर के पास तिघरा झाला क्षेत्र के बीहड़ में हुई। फिरौती की रकम मिलने की खुशी में गिरोह ने गोलियां दागी जिसकी खबर गांव वालों ने पुलिस को दे दी। पुलिस पहुंचती इससे पहले ही गैंग जा चुका था लेकिन रास्ते में पुलिस को वैन मिली जिसमें सुदीप और उसके परिजन बैठे थे।

बुधवार, 10 सितंबर 2008

ढीमर गैंग का सदस्य गिरफ्तार

ग्वालियर देहात के गिजोर्रा थाना पुलिस ने एक शॉर्ट एनकाउंटर में डकैत लक्ष्मण ढीमर गैंग के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। एक माह पूर्व थरेट से अपहरण किए गए युवक को भी मुक्त कराया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देहात अनिल सिंह कुशवाहा ने बताया कि लक्ष्मण गैंग के सदस्य शोभाराम पुत्र हरिगोविंद कुशवाहा निवासी जमहार थाना पुरानी छावनी है। दूसरा व्यक्ति तरु पुत्र रामचरण कुशवाहा था जिसका एक माह पहले अपहरण हो गया था।

मंगलवार, 9 सितंबर 2008

चंबल में डूब कर 14 की मौत

चंबल इन दिनों उफान पर है और उफान पर थी लोगों की भक्ति। इस भक्ति के लिए करौली राजस्थान के मंडरायल से कुछ लोग मध्यप्रदेश के अटार घाट से गौरिया बाब की जात को नाव पर सवार होकर जा रहे थे। मध्यप्रदेश की सीमा में आ रही नाव नदी के तेज बहाव से लड़खड़ा गई। नाव में सवार लोगों में से 14 अपनी जान बचाने के लिए नदी में कूद गए। इनमें से कुछ बच्चे भी शामिल थे। इन सभी की मौत हो गई। हालांकि नाविक ने बाद में साहस कर नाव को संभाल लिया और वह किनारे तक ले आया। मरने वालों में से सात-सात एक ही परिवार के थे।

शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

अंतराल के बाद

लंबे अंतराल के बाद लिखना संभव हो पा रहा है। कारण रहा बेटी की बीमारी। साढ़े तीन साल की बच्ची एक माह तक हॉस्पीटल में भरती रही। इस बीच उसके दो आपरेशन हुए। वह आव्सर्टेक्शन के बाद सेप्टिसीमिया से पीड़ित हो गई थी। इसी बीच पुलिस मुठभेड़ में अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया को मार गिराया गया। आगरा के पास कमल गुर्जर का भी सफाया कर दिया गया। यह दोनो घटनाएं हुईं। इसके संबंध में मैं फिर कभी विस्तार से लिखूंगा।

गुरुवार, 24 जुलाई 2008

गैंगवार में मारा गया रामनरेश

एक अपुष्ट खबर के मुताबिक दस्यु रामनरेश पिनाहट के जंगलों में एक छुटभैये गैंग के साथ हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया है। हालांकि पुलिस को अभी तक रामनरेश की लाश नहीं मिली है लेकिन वह इस बात पर डटी हुई है कि रामनरेश मारा जा चुका है। दस्यु रामनरेश ने कई जिलों की पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। शहरों में कैरियर के जरिए अपहरण का चलन उसी ने शुरू किया था। उस पर 20 से अधिक वारदातें में नामजद था। इसका नाम यदाकदा कमल और राजेंद्र गिरोह से जोड़ा गया लेकिन इसकी उनसे कभी बन नहीं सकी। पुलिस की माने तो उसका संबंध जेजे गैंग से था।

बुधवार, 23 जुलाई 2008

बीहड़ में ऐसी हो जाती है हालत


बीहड़ में डकैतों का पीछा आसान नहीं है। इसका अंदाज शहर में बैठे और पुलिस को गाड़ी पर घूमते देखने वाले नहीं लगा सकते हैं। इन दिनों बीहड़ के जानकारों के बीच राजस्थान के धौलपुर जिले के बसई डांग की खूब चर्चा है। दरअसल बीहड़ में चर्चित चार गैंग इन दिनों इसी बीहड़ में हैं। इनमें रामसहाय, कमल गुर्जर, जगन गुर्जर इसी इलाके के हैं। इस बीहड़ की संरचना कुछ ऐसी है कि इसमें कांबिंग करना बेहद कठिन है। दूसरे संचार क्रांति ने डकैतों के मुखबिर तंत्र को और अधिक मजबूत बना दिया है। बीहड़ के आसपास पुलिस की आहट होते ही गैंग मुखिया तक इसकी सूचना पहुंच जाती है। बसई डांग के बीहड़ में घुसने के दो ही रास्ते हैं। इसके एक रास्ते में कमल गुर्जर का गांव पड़ता है और दूसरे में गेंदा बाबा का मंदिर है जहं कमल का चाचा पुजारी है। ऐसे में पुलिस कहीं से घुसे गिरोह को सूचना हो जाती है। यही नहीं करीब 40 किलोमीटर की पट्टी में फैले इस बीहड़ में पानी की बेहद किल्लत है। अगर गेंदा बाबा मंदिर से चंबल को सीधे चलें तो करीब 20 खादर को पार करना होता है। इसे पार करने में ही पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में बीहड़ में पानी की खोज में ही मुशिकल होती है।

मंगलवार, 22 जुलाई 2008

एक कुआं ऐसा भी


बसई डांग में आसानी से पानी नहीं मिलता है। कई किलोमीटर तक पानी नहीं है। पानी का साधन या तो चंबल नदी है या फिर इक्का-दुक्का कुआं। इन कुओं में भी गरमी के दिनों में पानी नहीं रहता है। हां बरसात में पानी गड्ढ़ो तक में भरा मिल जाता है। ऐसे हालातों में भी यहां हीरा बाबा मंदिर में एक कुआं ऐसा भी है जहां हाथ से बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया जाता है। मंदिर के बाबा के अनुसार बस गरमियों में दो फुट की रस्सी की जरूरत होती है।

खत्म हुआ जेजे का गैंग

जगजीवन परिहार उर्फ जेजे गैंग अब पूरी तरह से खुर्द-बुर्द हो गया है। ग्वालियर पुलिस ने सोमवार यानी 21 जुलाई की रात मुठभेड़ में मारे जा चुके दस्यु सरगना जगजीवन परिहार के दो साथियों को पकड़ लिया। यह दोनों वेश बदलकर यूपी की रोडवेज बस से ग्वालियर आ रहे थे। दोनों डकैत 25-25 हजार के इनामी हैं। मुरैना के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि पकड़े गए दस्यु जिलेदार सिंह और लोकेंद्र सिंह निवासी मेहचंदपुर थाना सरायछोला जिला मुरैना हैं। बताया गया कि दोनों डकैत पिछले काफी दिनों से दिल्ली जाकर रहने लगे थे।

फिरौती के मंदिर



बीहड़ के बाहर बने मंदिर और धर्मशालाएं फिरौती लेने के स्थान के रूप में कुख्यात हैं। अपह्त व्यक्ति को भी इन्हीं मंदिरों में सरगना अपने संरक्षण में लेता है। फिरौती की बातचीत भी इन्हीं मंदिरों में होती है। राजस्थान के बसई डांग के बीहड़ में दूधाधारी का मंदिर, हीरा बाबा का मंदिर और गेंदा बाबा की धर्मशाला ऐसे ही स्थान हैं।

रविवार, 20 जुलाई 2008

बीहड़ में कौन कहां



राजस्थान के धौलपुर का बीहड़। गैंगों के लिए सुरक्षित किले की तरह है। धौलपुर के बाड़ी रोड़ पर बसई डांग थाने की सीमा के साथ ही शुरु होता है डकैतों का इलाका। इसी इलाके में डेरा डाले हुए हैं वे डकैत जिनके खौफ से इस समय दहशत है।--कौन कहां-राजस्थान के धौलपुर, मध्यप्रदेश के मुरैना और उत्तरप्रदेश के आगरा जिलों से सटे चंबल के बीहड़ों में इन दिनों चार दस्यु गिरोह सक्रिय हैं। दिलचस्प यह है कि चारों ही गुर्जर हैं और इन सभी ने बीहड़ में अपने इलाके बांटे अपना इलाका घोषित कर रखा है।बसई डांग-धौलपुर जिले के इस इलाके में रामसकल और कमल गुर्जर और राजेंद्र का गिरोह सक्रिय है। मासलपुर-रामसकल गुर्जर गैंग का नया ठिकाना इस इलाके में बना है। कमल से मनमुटाव के बाद उसने यह स्थान चुना है।सरमथुरा-मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से लगने वाले राजस्थान के इस इलाके में जगन गुर्जर का हुकुम चलता है। यहां वह पत्थर खदानों के ठेकेदार से चौथ वसूलता है।यह है कमल गुर्जर का देवपुर गांव में स्थित मकान



बीहड़ में भिड़ गई पुलिस


राजस्थान और यूपी के बॉर्डर पर देखने वालों को एक नया तमाशा देखने मिला। अब तक बीहड़ में डकैत गिरोहों को आपस में लड़ते सुना होगा लेकिन यहां तो पुलिस ही आपस में उलझ गई। राजस्थान और यूपी के बीहड़ में डकैत कमल गुर्जर को ढूंढने गई पुलिस को कमल तो नहीं मिला अलबत्ता राजस्थान पुलिस जरूर मिल गई वह भी एसएसपी के साथ। उत्तरप्रदेश के आगरा के एसएसपी रघुवीर लाल को देख राजस्थान पुलिस की भौंहे तन गईं। होना तो यह चाहिए था कि दोनों दल गरमजोशी से मिलते लेकिन राजस्थान के एसएसपी कुछ ज्यादा ही गरम हो गए। यूपी के पुलिस बल के साथ गाली गलौज पर उतर आए। अगर यूपी का दल समझ से काम नहीं लेता तो कुछ भी हो सकता। शायद पुलिस यह मामला भी दबा जाती लेकिन पुलिस दल के साथ गए कैमरामैन ने कैमरे की आंख खोल दी और सब कुछ कैद हो गया। आपकी नजर को पेश है एक तस्वीर.....। इसके साथ ही दूसरी तसवीर के कमल गुर्जर के गांव देवपुरा में स्थित उसके घर की।

शनिवार, 19 जुलाई 2008

बुद्धा की धमकी.. तो गांव कर देगा बरबाद

उत्तरप्रदेश के औरैया जिले के गांव कैथोली के लोग इन दिनों बहुत भयभीत है। डर का कारण है डकैत बुद्धा का एक फरमान। इस फरमान में बुद्धा ने अपने साथी और अब जेल में बंद बिजली के खिलाफ किसी भी तरह का बयान देने पर पूरे गांव को बर्बाद करने की धमकी दी है। बुद्धा डाकू जगजीवन परिहार का साथी है और उसके बचे गिरोह का मुखिया है। बिजली कभी उसी का साथी था। कैथोली वही गांव है जहां से 2006 की शुरुआत में 10 लोगों का जगजीवन गिरोह ने अपहरण कर लिया था और बाद में 100 ब्राह्मणों का कत्ल करने का ऐलान किया था। कैथोली के लोगों से उसकी दुशमनी तभी से है। बुद्धा का धमकी का असर यह है कि अब लोग गांव से पलायन कर रहे हैं और पुलिस है कि बस शेखी मार रही है।

बुधवार, 16 जुलाई 2008

अब बैंडिट टूरिज्म


राजस्थान की सरकार में बैठे कुछ ज्ञानियों की चली तो जल्द ही बीहड़ डरने की नहीं देखने और सैर सपाटे की जगह होगी। अकेली राजस्थान सरकार ही क्यों मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सरकार भी इससे लगभग सहमत ही है। मसला यह है कि राजस्थान सरकार ने चंबल के बीहड़ो में टूरिज्म को बढ़ावा देने की पूरी रुपरेखा भी तैयार कर ली है। इस योजना के तहत पर्यटकों को उन स्थानों पर घूमाया जाएगा जहां कभी डकैत रहा करते थे या फिर जिन जगहों पर मशहूर मुठभेड़ हुई या कोई डकैत मारा गया। इसके साथ ही बीहड़ में डकैत किस तरह रहते हैं और उनकी दिनचर्या क्या रहती है यह भी बताया जाएगा। इस सबके लिए गाइड का काम करेंगे आत्मसमर्पण कर चुके डकैत। इन डकैतों को इसके लिए तैयार भी किया जा रहा है। राजस्थान डांग एरिया डवलपमेंट बोर्ड के चैयरमेन का कहना है कि करौली, भरतपुर, धौलपुर, कोटा के बीहड़ों में इसके लिए काम शुरू भी कर दिया गया है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकार से भी इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। इनकी सहमति मिलते ही तीनों सरकारें सम्मिलित तौर पर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगी। यानी अब बीहड़ से सीधा पैसा बनाया जाएगा। भइया इस तरह तो सरकार मेरे ब्लॉग के पीछे पड़ गई है। जब वही यह काम करेगी तो हम क्या करेंगे।

शनिवार, 5 जुलाई 2008

लोहे से लोहा काटती पुलिस

एक हैं रामसहाय गुर्जर। इन दिनों महाशय का आतंक राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की पुलिस झेल रही है। बीहड़ में डकैत हैं रामसहाय गुर्जर। कल तक इनकी डकैत कमल गुर्जर से खूब छनती थी लेकिन अब पुलिस कमल गुर्जर के जरिए रामसहाय तक पहुंचने की फिराक में है। कमल गुर्जर गुर्जर आंदोलन के दौरान राजस्थान की मुख्यमंत्री को धमकी तक दे डाली थी। धमकी जगन गुर्जर ने भी दी थी। जगन पर अब दस लाख का ईनाम घोषित कर दिया गया है। राजस्थान और मध्यप्रदेश की पुलिस हाथ धोकर उसके पीछे पड़ गई है। कमल का भाई भी उसका साथ छोड़कर समर्पण कर चुका है। ऐसे में कमल भी समर्पण का मन बना रहा है। उसे जरूरत है तो किसी ऐसे विश्वस्त की जो उसकी जान सलामती का भरोसा दे सके। कमल की इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पुलिस कमल के जरिए रामसहाय तक पहुंचने की जुगत लगा रही है। कहा जाता है कि रामसहाय इन दिनों धौलपुर के जंगलों में डेरा डाले हुए है। यह इलाका कमल गुर्जर का कहा जाता है। रामसहाय के पास मुरैना और ग्वालियर की कुछ पकड़ भी हैं।

बुधवार, 2 जुलाई 2008

कुछ कहने से पहले यह भी जान लें---

न्यायालय का आदेश ईश्वर का हुकुम। मगर इस संदर्भ में मैं एक घटना का जिक्र कर देना चाहूंगा। बात उस समय की है जब में उत्तरप्रदेश के औरैया जिले में एक प्रतिष्ठित अखबार का ब्यूरो चीफ था। उस समय न्यायालय से जुड़ी तमाम खबरें मैने धारावाहिक निकाली थी। उसमें एक डकैती की फाइल के चोरी होने और बाद मे उस फाइल के एक माननीय जज के ड्राइवर के पास उनकी ही गाड़ी से मिलने का समाचार भी था। मैं उन जज साहब का नाम भी लिख सकता हूं लेकिन यहां उसे बताना जरूरी नहीं समझता। तो, साहब उन खबरों के बाद मुझे डाक से एक चिट्ठी मिली। यह चिट्ठी जैसा की उस पर अंकित था उस समय के दुर्दांत डकैती जगजीवन परिहार की ओर से भेजी गई थी। इस चिट्ठी के साथ एक और चिट्ठी की फोटोकापी भी थी। यह चिट्ठी उन्हीं जज साहब ने जगजीवन को लिखी थी। इसमें लिखा गया था कि अगर जगजीवन इस रिपोर्टर यानी मुझे ठिकाने लगा दे तो 10 लाख रुपये देगा। दूसरी चिट्ठी जो कि जगजीवन की ओर से मुझे लिखी गई थी उसका लब्बोलुबाब यह था कि वह किसी पत्रकार को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता। ऐसे में मेरी भलाई के लिए वह यह पत्र मुझे भेज रहा है। साथ ही एक पत्र पुलिस अधीक्षक भिंड को भी ताकि मेरी हिफाजत की जा सके।कुल मिलाकर इस पत्र के बाद में चुप नहीं बैठा। मै और मेरे एक वकील साथी इस पत्र को लेकर तत्कालीन एसएसपी दलजीत चौधरी, जिन्हें बाद में डकैतों के सफाए के लिए राष्ट्रपति पदक भी दिया गया के पास पहुंचे। भिड़ के एसपी जिनका नाम इस वक्त मुझे याद नहीं है से भी मिला। भिंड एसपी की बातों से हमें ऐसा लगा कि उन्हें इसके बारे में बहुत कुछ जानकारी है लेकिन वह कुछ छुपा रहे हैं। हालांकि उन्होंने मुझसे सावधान रहने को जरूर कहा। यहां यह जरूर बता देना चाहता हूं कि इस समय जगजीवन का गैंग भिड़ के आसपास ही था।दलजीत चौधरी ने शुरूआत में पत्र को काफी गंभीरता से लिया लेकिन बाद में वह भी धीरे पड़ गए। इस मामले मैं रिपोर्ट लिखाना चाहता था लेकिन वह नहीं लिखी गई।बाद मैं इन्हीं जब साहब के बारे में एक स्टोरी और मैने की। जज साहब जिस मकान में कुछ दिन किराएदार रहे उसका पुत्र गायब था। मकान मालिक का आरोप था कि जज के उनकी पुत्रवधू से नाजायज संबंध थे और जज साहब ने ही उसका मर्डर करा दिया था। यह पुत्र इन बुजुर्गों की एकमात्र संतान थी। हालांकि मेरी इस स्टोरी को बाद में स्टार ने भी चलाया। नतीजा यह हुआ कि जज साहब को निलंबित कर दिया गया। मगर मेरे नाम जगजीवन को सुपारी देने वाली उस चिट्ठी की सच्चाई अभी भी मेरे लिए रहस्य बनी हुई है। न्यायालय में मैने इस संबंध में पत्र भी दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ।मैरे कहने का मतलब है कि हर अच्छे बुरे में मीडिया के सिर बुराई का ठीकरा फोड़ने से पहले खुद की ओर देख लेना भी ठीक रहता है।ज्यादा क्या कहूं। कोर्ट चालू है.....पता नहीं कब कह दिया जाए मोहन जोशी हाजिर हो....

डाकुओं पर हाईकोर्ट की अंगुली


मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बैंच ने केंद्र और राज्य सरकार समेत देश के प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया को निर्देशित किया है कि वे डकैतों का महिमा मंडन कतई न करें और न होने दें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है कि भावी पीढ़ी डकैतों के जघन्य अपराधों से प्रेरित न हो। मुख्य न्यायाधीश एके पटनायक और न्यायामूर्ति एके गोहिल की युगलपीठ ने यह निर्देश शर्मा फार्म रोड चार शहर का नाका निवासी विशन सिंह की जनहित याचिका की सुनवाई पर दिया। यह याचिका तब दायर की गई जब निर्भय सिंह के आत्मसमर्पण की योजना चल रही थी।

शुक्रवार, 27 जून 2008

बीहड़ सुधरे तो मिले दस्यु समस्या से छुटकारा

बीहड़ी इलाकों में दस्यु समस्या का कारण इस क्षेत्र में फैला बीहड़ है। भुमी कटाव से हर वर्ष 0.3 फीसदी उपजाऊ भूमि बीहड़ में तब्दील हो जाती है। इस बीहड़ का समतलीकरण करके और भूमि कटाव को रोककर जनता को दस्यु समस्या से छुटकारा दिलाया जा सकता है। शासन ने भूमि सुधार के अब तक जो भी प्रयास किए हैं वह नाकाफी रहे हैं और इनमें जनता की सीधी भागेदारी नहीं हुई है।शासन और प्रशासन के लिए इटावा, जालौन, कानपुर, हमीरपुर, आगरा, फीरोजाबाद, मध्यप्रदेश में भिंड और मुरैना के लगभग 10 लाख हेक्टेयर में फैले बीहड़ की भूमि को उपयोग में लाना एक चुनौती है वहीं इस क्षेत्र में पल रहे दुर्दांत डकैत, लोगों की जान माल के दुश्मन बने हुए हैं। इस बीहड़ भूमि में वृक्षारोपण के प्रयास तो किए गए हैं, लेकिन अभी भी कई ग्राम सभाओ के पास नंगी, सूखी, बंजर भूमि प़ड़ी हुई है।मैने खुद इटावा और औरैया जिले में इसके हालात देखे और जांचे हैं। यहां के भूमि संरक्षण विभाग के एक अध्ययन के मुताबिक बढ़ता बीहड़ हर साल लगभग 250 एकड़ उपजाऊ भूमि को निगल रहा है। हर सात साल में 2.3 फीसदी अच्छी भूमि कगारों के ढहने और कटने से बीहड़ में तब्दील होती जा रही है। जिला भूमि उपयोग समिति के आंकड़ों के मुताबिक इटावा और औरैया जनपद की कुल कार्यशील जनसंख्या में 79.9 फीसदी लोग कृषि कार्य में लगे हैं। 1995-96 में शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल 1 लाख 42 हजार 605 हेक्टेयर था जो 1997-98 में घटकर 1 लाख 40 हजार 431 हेक्टेयर रह गया है।चंबल और यमुना के संगम पर फैले अगर पंचनद बीहड़ की बात करें तो यहां हालात और भी खराब हैं। यहां यमुना, चंबल, पहुंच,सिंध और क्वारी का मिलन होता है। इसके साथ ही इटावा, औरैया, जालौन और मध्यप्रदेश के भिंड जिले की सीमा यहां मिलती है। इन नदियों के प्रवाह क्षेत्र के लगभग 220 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बीहड़ है। तेजी से बढ़ रहे बीहड़ी क्षेत्र से हर वर्ष उपजाऊ भूमि का 0.3 फीसदी भाग बेकार हो जा रहा है।
नाकारा प्रशासन
बेकार पड़ी भूमि को उपयोग में लाने के लिए जनता को प्रोत्साहित करने को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी भूमि उपयोग समिति भी इस दिशा में सार्थक काम नहीं कर सकी है। इस समिति का काम साल में एक दो बैठक करने तक ही सिमट गया है। भूमि संरक्षण विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि कटान से हर साल 250 एकड़ की गति से बढ़ रहे बीहड़ की रफ्तार को कुछ गांवों में चकडैम बनाकर कुछ कम तो किया गया है लेकिन बीहड़ी क्षेत्रफल को देखते हुए यह कदम कुछ भी नहीं है।
क्या कर सकते हैं
बीहड़ को समतल करने का काम जनता के हाथ में दे दिया जाए। समतल की गई भूमि का पट्टा उसी व्यक्ति या किसान के नाम कर दिया जाए। एक व्यक्ति को एक तय जमीन ही समतल करने को दी जाए। इससे होगा यह कि भूमिहीनों को जहां जमीन मिल सकेगी वहीं खेती का रकबा भी बढेगा। इसके साथ ही बीहड़ साफ होने से डाकुओं की समस्या से ही निजात मिल सकेगी।

इनामी दस्यु मोहन गुर्जर ढेर

जगन से खटपट के बाद खुद का गिरोह बनाया था

मध्यप्रदेश और राजस्थान में वांटेड और अपना नया गैंग खड़ा करने वाला मोहन गुर्जर गुरुवार की सुबह पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। घंटे भर चली गोलीबारी में 20 हजार का इनामी और लगभग 30 मामलों में वांछित मोहन गुर्जर मुरैना पुलिस की गोली से धराशायी हो गया। उसके छह साथी भागने में सफल हो गए।राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीहड़ में आतंक मचाने वाला डकैत सरगना जगन गुर्जर गैंग के सदस्य मोहन गुर्जर ने जगन गुर्जर से खटपट के बाद खुद का गैंग बना लिया था। उसके गैंग में छह सदस्य थे। मोहन राजस्थान के धौलपुर, बाड़ी, डांगबसई और मध्यप्रदेश के मुरैना, जौरा, सबलगढ़ आदि क्षेत्रों में लगातार वारदातें कर रहा था। वह राजस्थान में वारदात कर मध्यप्रदेश की सीमा में आ जाता था और फिर मध्यप्रदेश में वारदात करने के बाद राजस्थान भाग जाता था। मुरैना पुलिस के मुताबिक मोहन चंबल के बीहड़ों में अपने साले के यहां देवगढ़ में शरण लिए हुए थे। पुलिस ने बताया कि गैंग के पास एके 47 भी है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस को एके 47 के कुछ राउंड मिले हैं। मोहन गुर्जर थाना डांगबसई नयापुरा राजस्थान का रहने वाला था।

सोमवार, 23 जून 2008

एनकाउंटर पर उबले दिग्विजय

मध्यप्रदेश की मुरैना जिले की तहसील कैलारस में इन दिनों हलचल है। हलचल है एक अपराधी को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराए जाने की। असल में विरोध पुलिस के एनकाउंटर को लेकर है। पुलिस ने बीते दिनों यहा कल्लू सिकरवार नाम के व्यक्ति का एनकाउंटर कर दिया। पुलिस के मुताबिक वह फरार चल रहा था। इस बात पर जनता ने तीव्र विरोध है। लोगों का कहन है कि कल्लू फरार नहीं था। वह बकायदा अपने परिवार के साथ कैलारस कस्बे में रह रहा था। वह एक मामले के सिलसिले में कोर्ट में पेशी पर गया था। तभी पुलिस ने उसे मार गिराया। यहां तक तो बात ठीक थी लेकिन इस मामले में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी कूद पड़े हैं। उन्होंने बयान दिया है कि पुलिस को यह एनकाउंटर महंगा पड़ेगा। बताते हैं कि यह व्यक्ति दिग्विजय सिंह का रिश्तेदार था। इस रिश्तेदारी के कारण पूर्व मुख्यमंत्री को मुंह खोलना पड़ा। सच्चाई कुछ भी हो लेकिन इससे मध्यप्रदेश की पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है।

मंगलवार, 17 जून 2008

बीहड़ में मुंडा

महीनों से भूमिगत चल रहा एक और सरगना जाग उठा। रामनिवास उर्फ मुंडा के नाम से चर्चित कभी छोटी-मोटी वारदात करने वाले इस सरगना ने इस बार मथुरा के रिटायर्ड नेवी अधिकारी पुत्र के अपहरण कर डाला। आगरा क पिनाहट से लगे बीहड़ में सरगना के टिके होने की पुलिस को भनक लग गई। इस समय सरगना सौदेबाजी कर रहा था। पुलिस आने की खबर से अपह्रत सहित भाग गया। कुछ समय पहले इस मुंडा के पास नगला पदी में रहने वाले पूर्व पार्षद नत्थी सिंह के पुत्र हरिओम की पकड़ पहुंचाई गई। सूत्रों को मुताबिक मुंडा ने हरिओम के परिजनों में 15 लाख फिरौती की मांग की है।

शुक्रवार, 13 जून 2008

नादिया मारा गया

यमुना और चंबल के बीहड़ में आतंक मचाने वाला अमीनाबाद दलित हत्याकांड का मुख्य आरोपी और तीन दर्जन से अधिक मामलों में वांछित दस्यु सरगना दीपचंद उर्फ नादिया इटावा के पास पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। उसके साथ 10 हजार रुपये का ईनामी डकैत सोनवीर और लुखरिया भी मुठभेड़ में मार गिराया गया। नादिया पर 20 हजार रुपये का इनाम था। पिछले कुछ ही दिन में वह इटावा, औरैया और भिंड के बीहड़ों में आतंक फैलाए हुए था। नादिया बिरौधी थाना भरथना इटावा का निवासी था। इकदिल के पास अमीनाबाद में पांच दलितों की सामूहिक हत्या कर वह चर्चा में आ गया था।

मंगलवार, 10 जून 2008

पुलिस ने पंजाब को घेरा

एक लाख के ईनामी डाकू और भिंड,ग्वालियर, शिवपुरी के साथ मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके डाकू पंजाब को ग्वालियर के पास घाटीगांव में पुलिस ने घेर लिया है। सूचना लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी है। मुठभेड़ में पंजाब के खास साथी राजेंद्र के घायल होने की सूचना है। मुठभेड़ की खबर सुनकर भारी भीड़ जमा हो गई है।जगजीवन परिहार और गड़रिया गिरोह के खत्म होने के बाद बीहड़ में पंजाब ही एक मात्र ताकतवर गैंग बचा हुआ है। यह खुशी की बात है कि बीते कुछ सालों से पुलिस डकैतों के खिलाफ काफी आक्रामक हुई है। वह डाकुओं को सीधे मुठभेड़ में मार गिरा रही है। अलबत्ता को किसी डाकू को मार गिराने के बाद अक्सर ही बीहड़ों में उसे धोखे से मार गिराने की कई कहानियां चल पड़ती हैं। मानों पुलिस ने किसी बहादुर के साथ बड़ी नाइंसाफी की हो।पंजाब का आतंक इस इलाके में बहुत है। वह गुर्जर डाकुओं की कड़ी में खतरनाक डाकू माना जाता है। अगर वह मारा गया तो यह इलाके की जनता के लिए राहत की बात होगी।

रविवार, 8 जून 2008

राजेंद्र और कमल गुजर्र

आगरा और धोलपुर के आसपास हंगामा मचा रहे बदमाश राजेंद्र और कमल गुर्जर पर डीजीपी उत्तरप्रदेश विक्रम सिंह ने 20 हजार का ईनाम घोषित किया है। साथ ही उन्होंने ऐलान किया है कि इन बदमाशों को मारो और मनपसंद पोस्टिंग और प्रमोशन पाओ। देखते हैं पुलिस का कौन बहादुर सामने आता है। डीजीपी महोदय कोई जुगत भिड़ाओ ऐसे तो यह हाथ आने वाले नहीं।

शुक्रवार, 6 जून 2008

जनप्रिय बागी

अपनी तमाम ऊंचनीच के बावजूद इस दौर के बागी जनप्रिय थे। अंग्रेजी कुशासन कुशासन और अव्यवस्था के खिलाफ लक्ष्यहीन और बहुत हद तक निजी ही सही उनकी बगावत बहुसंख्यक उत्पीड़ित जनता की प्रतिध्वनि ही थी। बागी मानसिंह के समाकालीन मुरैना जिले की पोरसा तहसील के गांव नगला के लाखनसिंह की लोकप्रियता तो इतनी अधिक फैल गई थी कि लोगों ने उन पर लंगुरिया (लोकगीत) तक बना लिए थे। जैसे-
नगरा के लाखनसिंह लगुंरिया।
तखत हिलाए दओ दिल्ली को।
अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें।
http://beehad.blogspot.com

सोमवार, 28 अप्रैल 2008

दस्यु सुंदरी कौमेश

दस्यु सुंदरी कौमेश
चंबल के बीहड़ में एक नई महिला डकैत। इसके खौफ से परेशान है मध्यप्रदेश और राजस्थान की पुलिस। ऐसी दिलेर की भरे कसबे में दिन दहाड़े गोलियों की बौछार कर दी। कौन है यह। कहां रहती है। जानिए......
कई दशक पूर्व चंबल के बीहड़ में दस्यु सुंदरी फूलन देवी के खौफ ने आम आदमी के साथ पुलिस को परेशान कर रखा था। अब चंबल के बीहड़ में एक और दस्यु सुंदरी ने बंदूक उठाई है। बीहड़ में फूलन की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली इस दस्यु सुंदरी का नाम है कौमेश। जनपद पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक जनपद के बसई डांग थाना क्षेत्र के गांव गोठियापुर निवासी छीतरिया की पुत्री कौमेश गुर्जर इन दिनों जगन गुर्जर गिरोह की सक्रिय सदस्य है। जनपद के बाडी कसबे में अंधाधुंध फायरिंग करने वाली कौमेश ने अपनी दिलेरी का परिचय दिया था। कौमेश के सिर पर मध्यप्रदेश पुलिस की ओर से चार हजार का ईनाम है। धौलपुर पुलिस ने उस पर पांच सौ रूपये का ईनाम घोषित किया है। अपराध बढ़ते देख पुलिस इनाम राशिर और बढ़ाने की तैयारी में है।

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2008

मोहर सिंह का अंत

एक और बेहमई को अंजाम देने की धमकी देने वाले मोहर सिंह मल्लाह का पुलिस ने अंत कर दिया। मोहर सिंह उन डकैतों की कड़ी में था जो राजनीतिक कारणों से बीहड़ों में कूदे। यमुना का बीहड़ मल्लाह डकैतों के लिए चर्चित रहा है। मोहर सिंह का बीहड़ी जीवन कुल जमा एक साल रहा। यूं वह मान सिंह मल्लाह और अरविंद गुजर्र गैंग में भी काम करता रहा। हाल ही में बीडीसी चुनाव हारने के बाद वह बीहड़ में कूद गया। इसके बाद उसने एक और बेहमई जैसे कांड को करने की धमकी दी थी।

गुरुवार, 10 अप्रैल 2008

तो शुरू करें

चंबल के बीहड़ों का अपराध जगत में अपना एक इतिहास है। चंबल और उसकी सहायक नदियों से बने लगभग 6 लाख एकड़ भूमि पर पसरे खौफनाक बीहड़ अपराधियों की शरणस्थली रहे हैं। इलाके में प्रचलित बागी,दस्यू या डकैत और लूटेरे जैसे शब्द एक प्रतीक हैं-अपराध की दुनिया के आए ह्रास का। ये शब्द ही नहीं अपराधी मानसिकता का जीता जागता दस्तावेज हैं।
क्षेत्र में प्रचलित सबसे पुराना अपराधी संबोधन बागी अंग्रेजी शासनकाल में प्रचलित था। यह वह समय था जब अंग्रेजी शासन में जमींदारों के जुल्मोसितम से तंग होकर लोग व्यक्तिगत तौर पर बगावत कर चंबल की गोद में चले जाते थे। तब वह इनकी मांग थी। हर मुसीबत में रक्षा करने वाली। बीहड़ बागी के लिए मां का आंचल। इन लोगों ने ही पहली बार इस जमीन पर गोलियों की आवाज गुंजित की थी। ये लोग भले ही व्यक्तिगत आघातों के चलते बीहड़ में कूदे हों लेकिन दिलों में अंग्रेजी शासन और जमींदारों के खिलाफ विक्षोभ तो था ही। इस समय लोगों ने उनके इस काम को नाम दिया बगावत। प्रचलित दमन की व्यवस्था से हटकर खड़े होने का कदम और इस तरह बन गए वह बागी। इस वर्ग में बागी सन्यासी,बह्मचारी, पंडित गेंदा लाल दीक्षित।
इन बागियों से क्षेत्र की जनता को कभी कोई बड़ी असुविधा नहीं हुई। यह ग्रामीणों से संपर्क भी कम रखते थे। डकैती डालते थे तो केवल सरकारी खजाने या जमींदार को ही लूटते थे। मगर जनता से संबंध नहीं। इनमें से कई डकैत तो सीधे-सीधे आजादी के लिए लड़े भी, हालांकि आजादी का कुल जमा उनका कंसेप्ट अंग्रेजों को देश से निकाल भर देना था। गांव वालों के संपर्क में न रहने से इनमें के कइयों को ग्रामीणों से ही मुठभेड़ हुई फिर या तो वह पकड़े गए या मार डाले गए। ब्रह्मचारी और गेंदालाल दीक्षित के दल की भी ग्रामीणों से भिडंत हुई थी। इसमें से उनमें 35 साथी मारे गए थे। इस मुठभेड़ में गेंदालाल और ब्रह्मचारी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। यह लोग इस समय ग्वालियर में एक जगह डकैती डालने जा रहे थे। तो इस तरह बागी बने। अब इस बारे में और जानकारी के लिए बागी लिंक पर मिलेंगी जानकारी। इंतजार कीजिए........नमस्कार।

बीहड़

बीहड़ चंबल और उसकी सहायक नदियों के कटान से बनी ऐसी भूमि जो अपने आश्रितों को हमेशा ही पनाह देता रहा है। उसमें रहने वालों के लिए यह सुखद अनूभूति है तो सभ्य कहे जाने वाले समाज के लिए एक सिहरन पैदा करने का कारक। कारण लगभग 6 लाख एकड़ भूमि पर फैले इस उवर्र मगर बंजर कंदराओं में ऐसी तमाम खोह और ठिकाने हैं जहां से सालों से बागी, दस्यु या फिर इन्हें डकैत कहें अपनी खौफ की दुनिया चलाते रहे हैं। कभी इस दुनिया का चेहरा ऐसा नहीं हुआ करता था। तब अपराध ने संगठित अपराध का ऐसा रूप नहीं लिया था। या कहे तब अपराध एक उद्योग की तरह विकसित नहीं था। फिर क्या था बीहड़ का चेहरा। कैसी रही उसकी दुनिया। बीहड़ क्यों बन गया इतना खौफनाक। जानना चाहते हैं तो रहे मेरे साथ।......लगातार। मैं आपको बताउंगा कि बागी,दस्यु और डकैत कहने और भावार्थ में एक शब्द होते हुए भी असल में कितने अलग हैं। अपने स्वभाव में, अपराध करने के अपने तरीके में, एक बागी एक दस्यू या फिर एक डकैत से कैसे भिन्न है। यह एक शब्द नहीं पूरा कालखंड है।

शनिवार, 5 अप्रैल 2008

बीहड़ ब्लाग में आप सभी का स्वागत है।

बीहड़ ब्लाग में आप सभी का स्वागत है। यहां पर हम बताएंगे बीहड़ के उन किस्सों कारनामों को जो अब तक कहीं पर न तो पढ़ा गया होगा और न सुना गया होगा। क्या है बीहड़ की शब्दावली, कौन हैं पर्दे के पीछे छिपे वो लोग जिनके चलते लोग बीहड़ में जाने और जीने को मजबूर होते हैं।