बुधवार, 4 जनवरी 2012

अभ्यारण और राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़ने को मंजूरी

राष्ट्रीय अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना राजीव गांधी बायोस्फीयर रिजर्व गलियारे को राजस्थान राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल ने धौलपुर से झालावाड़ के बीच 11,000 वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्र में बाघ और अन्य जंगली जानवरों को बेहतर वातावरण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह गलियारा करौली, सवाई माधौपुर, कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़ और बारां जिलों से गुजरेगा। इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए केंद्रीय मंत्रालय और पर्यावरण को भेजा जाएगा।
वन और वन्य जीवन मंत्री बीना काक ने कहा कि इसके बाद चारदीवारी और बाड़ लगाने का काम शुरू किया जा सकेगा। पूर्व पीसीसीएफ आरएन मेहरोत्रा ने कहा कि यह अपनी तरह का पहला परिदृश्य मॉडल होगा।
यह कार्यक्रम यूनेस्को और बायोस्फीयर के तहत विकसित किया जा रहा है। इस संबंध में घोषणा जून में केंद्रीय और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने जून मे की थी। इस योजना में रणथंभौर का मुकुंद्रा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान, कोटा का दर्राह वन्यजीव अभ्यारण, कैलादेवी सवाई मान सिंह अभ्यारण्य, सवाई माधौपुर अभ्यारण्य, भानसागर और जमालसागर अभ्यारण्य, रामगढ़ विशधारी अभ्यारण्य और चंबल अभ्यारण्य के कुछ वन क्षेत्रों में लागू होगा।
राज्य मंत्रिपरिषद ने Mukundra हिल्स राष्ट्रीय उद्यान के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अंतिम अधिसूचना के प्रकाशन के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस के साथ साथ, कैबिनेट के 37 परिवारों के पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय पार्क में रुपये लाख प्रत्येक 10 के मुआवजे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

बुधवार, 21 दिसम्बर 2011

लीजिए अब यमुना पर कब्जे की तैयारी



एक विदेशी कंपनी को अब यमुना को बचाने की चिंता सताई है। ब्रिटेन की यह कंपनी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ मिलकर यमुना को बचाने और उसे इंग्लैंड की थीमस नदी की तरह पवित्र बनाने के काम में जुट गई है। इटावा के पास डिभौली घाट पर थेम्स खिर रेस्टोरेशन ट्रस्ट के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी ने नारियल फोड़कर आज इसकी शुरूआत की।
सवाल उठता है कि देश की सरकारें, तमाम संगठन क्या बिल्कुल ही नालायक हैं जो कि एक विदेशी कंपनी को यह काम सौंपा गया है। ट्रस्ट के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रॉबर्ट और पीटर स्विलित ने बताया कि
थेम्स खिर रेस्टोरेशन ट्रस्ट इग्लैंड डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया तथा पीस इंसट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में यमुना नदी के जल को पवित्र बनाने और उसके जेल में लुप्त हो रहे जलचरों को बचाने के उद्देश्य से संयुक्त अभियान चलाया गया। इसके तहत प्रथम चरण में भरेह से लेकर बटेश्वर तक सर्वे कराया जायेगा और जमुना के जल में जीवन यापन कर रहे जलचरों की गतिविधियों के ज्ञान के साथ-साथ उनकी घटती जनसंख्या के कारणों को खोजा जायेगा।
गौरतलब है कि बीते कुछ सालों से चंबल प्रोजेक्ट के कारण यमुना में भी कछुआ और डाल्फिन की संख्या बढ़ रही है। सवाल है कि जब चंबल प्रोजेक्ट के सफल कार्यान्वयन का उदाहरण सामने है तो फिर उसे आगे बढ़ाने की बजाए यह नया प्रयोग क्यों किया जा रहा है। कहीं नदियों के जल को गुपचुप तरीके से बेचने की योजना का यह कोई गुप्त एजेंड़ा तो नहीं। पहले यह कंपनियां हमें लुभावने सपने दिखाएंगी। हमारी परेशानी को दूर करने के दावे करेंगी और फिर धीरे से हमारे संसाधनों पर कब्जा कर लेंगी। अगर ऐसा नहीं है तो जिस यमुना को बचाने के लिए जल संचयन पुरुष राजेंद्र सिंह ने पंचनद पर जो अभियान शुरू किया उस पर सरकार ने ध्यान क्यों नहीं दिया।

शनिवार, 3 दिसम्बर 2011

गट्टा का चबूतरा बनवाओ नहीं तो मचा देंगे तबाही

डकैत पप्पू गुर्जर ने दी मोरवान के ग्रामीण को फोन पर धमकी

चंबल आईजी ने किया मोरावन व हथेड़ी गांव का दौरा

डकैतों के भय से हथेड़ी गांव खाली करने वाले लोग अभी अपने गांव बापस जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे कि डकैत पप्पू गुर्जर ने दो दिन पहले मोरावन के ग्रामीणों को फोन पर धमकी देकर दशहत और बड़ा दी है। डकैत पप्पू गुर्जर ने धमकी दी है कि यदि मोरवान में गट्टा का चबूतरा नहीं बनवाया तो वह तबाही मचा देंगे। धमकी की खबर के बाद चंबल आईजी व एसपी ने गांव का दौरा कर ग्रामीणों से चर्चा की और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।
मालूम हो, कि डकैत पप्पू गुर्जर ने १४ अक्टूबर को हथेड़ी गांव की खिरखाईयों पर मोरावन निवासी मोहर सिंह गुर्जर की नाक व हाथ काट दिए थे। इसके बाद से ही लोग दहशत में थे और गांव खाली कर पारौन पहुंच गए थे। एक दिन पहले ही कलेक्टर ज्ञानेश्वर बी पाटील और पुलिस अधीक्षक महेन्द्र सिंह सिकरवार ने यहां के लोगों से मिलकर गांव बापस लौटने की बात कही थी, लेकिन ग्रामीणों ने गांव बापस जाने से इंकार कर दिया था। डकैत पप्पू गुर्जर ने दो दिन पहले मोरवान निवासी विक्रम गुर्जर को फोन पर धमकी दी है कि ग्रामीण गांव में गिरोह के सरगना राजेन्द्र उर्फ गट्टा का चबूतरा बनवाय, अन्यथा तबाही मचा दी जाएगी। डकैत पप्पू गुर्जर ने मोरावन निवासी विक्रम गुर्जर को फोन पर यह बात भी कही कि ग्रामीण बार-बार पुलिस की शरण लेंगे तो वह गांव की पुलिस चौकी पर भी हमला कर देगा। डकैतों की इस धमकी से मोरावन और नसीहर के ग्रामीणों में इतनी दहशत है कि उन्होंने घर से निकलना बंद कर दिया है। मोरावन के ग्रामीण अब दूसरी जगह डेरा डालने के लिए जगह खोज रहे हैं। धमकी की खबर के बाद चंबल आईजी एसडब्लू नकवी ने शुक्रवार को एसपी महेन्द्र सिंह सिकरवार के साथ मोरावन और हथेड़ी गांव का दौरा किया और ग्रामीणों से चर्चा की और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया, लेकिन ग्रामीणों की दहशत अभी भी कम नहीं हुई है। है।


एक व्यक्ति के मोबाइल पर धमकी दी गई है। गांव में सुरक्षा व्यवस्था भी बड़ा दी गई है। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि वे वहीं रहें, पुलिस पूरी तरह से सतर्क हैं।
महेन्द्र सिंह सिकरवार
पुलिस अधीक्षक

शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

चंबल घाटी विकास होगा चुनाव का मुद्दा



चंबल घाटी विकास होगा चुनाव का मुद्दा
चंबल के विकास के लिए केंद्र से 12 हजार करोड़ का पैकेज
इटावा। इस बार चुनाव में चंबल का इलाका फिर छाया रहेगा, लेकिन इस बार इसका कारण डकैतों के फरमान नहीं बल्कि विकास की आवास होगी। इलाके की एक समिति ने चंबल घाटी के विकास के सवाल को उठाते हुए इसे चुनाव का मुद्दा बनाने का ऐलान किया है। इस समिति ने चंवल के विकास को हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा करने की भी मांग की है।
लोक समिति चंबल घाटी समग्र विकास आंदोलन का दूसरा चरण दीपावली के बाद शुरू कर इसे आने वाले विधान सभा चुनाव में मुद्दा बनाएंगी।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुल्तान सिंह ने कहा कि समिति विधान सभा चुनाव में उस पार्टी और उम्मीदवार का समर्थन करेगी जो विधान सभा में पहुंचकर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आवाज बुंलद करेगा। लोक समिति पिछल्ले दो वषों से भारत सरकार से बीहड़ क्षेत्र विकास के लिए संघर्ष कर रही है। इसके लिए इटावा, भिंड तथा आगरा में धरना-प्रदर्शन और अनशन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी दिये जा चुके हैं। दूसरे चरण का आंदोलन प्रभावी बनाने के लिए पंचनदा से लेकर मुरैना तक जनजागरण यात्रा शुरू की जाएगी तथा इसा समापन मुरैना में धरना-प्रदर्शन कर होगा।
लोकसमिति एक ओर चंबल घाटी समग्र विकास के लिए भारत सरकार से 12000 करोड़ के पैकेज की मांग कर रही है। वही दूसरी ओर कंपिल से कन्नौज तक गंगा-रामगंगा क्षेत्र को बाढ़ मुक्त कराने के लिए नदियों के दोनों और तटबंध बनाने की मांग शुरू हो चुकी है। चंबल घाटी क्षेत्र इटावा, आगरा, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, धौलपुर, भरतपुर तक 38000 वर्ग किमी में फैला है, जो अत्यंत गरीब और पिछड़ा है। इसकी उप्र, मप्र तथा राजस्थान की सरकारों द्वारा घोर उपेक्षा की गई है।

मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

डकैतों के डर से कोलूपुरा बस्ती खाली




- कूनों नदी के किनारे पालपुर तक चल रही पुलिस की सर्चिंग कूनों(श्योपुर) के बीहड़ से खास रिपोर्ट



पप्पू गिरोह की वारदात के बाद मोरावन, नहीयर, कोलूपुरा के लोगों में दहशत हैं। डकैतों के डर से कोलूपुरा बस्ती के लोग पलायन कर चुके हैं। कुछ लोगों ने अस्थाई रूप से मोरावन में डेरा डाल लिया है, वहीं कुछ लोग कराहल में रहने की जुगाड़ बिठा रहे हैं। घटना की रात से ही पुलिस कूनों नदी के दोनों किनारों पर सर्चिंग कर रही है, लेकिन अभी तक डकैतों का कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस की सर्चिंग पार्टिंया प्राथमिकता के तौर पर उन लोगों की तलाश कर रही है, जो लोग डकैतों को रसद पहुंचाते हैं।
मालूम हो, गट्टा गिरोह के सरगना पप्पू ने शनिवार की रात को हथेड़ी गांव की खिरकाईयों पर आधा दर्जन ग्रामीणों की मारपीट कर एक युवक मोहर सिंह का हाथ और नाक काट दी थी। घटना के बाद से ही कराहल क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। मोरावन, नसीयर और सेसईपुरा में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है। पप्पू गुुर्जर गिरोह की दहशत से कोलूपुरा बस्ती में रहने वाले एक दर्जन परिवारों मेें से कुछ परिवार तो शनिवार को ही बस्ती खाली कर मोरावन पहुंच गए थे। शेष लोगों ने रविवार को कराहल और सेसईपुरा में डेरा डाल लिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय सिंह ने बताया कि घटना के बाद से ही डकैतों की तलाश में पुलिस की पार्टिंया सर्चिंग कर रही हैं। प्राथमिकता के तौर पर कूनों नदी के दोनों किनारों पर बसे गांवों में डकैतों की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि नबलपुरा, दौलतपुरा, मोरावन से लेकर पालपुर तक के गांवों में पुलिस प्राथमिकता के तौर पर उन लोगों को पकडऩे का प्रयास कर रही है, जो इस गिरोह को दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली सामग्री पहुंचाते हैं।

पीडि़तों से मिलने पहुंचे जनप्रतिनिधि...


घटना के बाद से ही डकैतों का शिकार हुए भयभीत ग्रामीणों से मिलने के लिए मोरावन गांव में जनप्रतिनिधियों का तांता शुरू हो गया। ग्वालियर में भर्ती मोहर सिंह से शनिवार को वन विकास निगम के उपाध्यक्ष बाबूलाल मेवरा मिले, वहीं शाम को क्षेत्रीय विधायक रामनिवास रावत मोरावन पहुंच गए। रविवार की सुबह जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डीबाई ने भी मोरावन पहुंचकर पीडि़तों से चर्चा की है।

...तो खाली कर देंगे गांव


नाम नहीं छापने की शर्त पर पप्पू गिरोह से भयभीत मोरावन, नसीहर के ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार डकैत मोरावन पर हमला कर रहे हैं, बावजूद इसके पुलिस गिरोह को पकड़ नहीं पा रही है। यदि यही हालात रहे तो हम लोग गांव से पलायन कर जाएंगे।

गट्टा गिरोह की पुलिस को खुली चुनौती







मोरावन के हथेड़ी गांव की खिरकाई पर रात भर मचाया तांडव
मोटर साइकिल जलाई, युवक का हाथ और नाक काटे
मध्यप्रदेश के श्योपुर से एक रिपोर्ट
डकैत राजेन्द्र गुर्जर उर्फ गट्टा की मौत के बाद गिरोह के सरगना बने पप्पू गुर्जर ने एक बार फिर खुले शब्दों में पुलिस को चेतावनी दी है। डकैत पप्पू गुर्जर ने एक पत्र के माध्यम से पुलिस अधीक्षक व एसडीओपी को धमकी दी है कि गट्टा की मौत के साथ जो सामान मोरावन, नसीहर और कोलूपुरा के ग्रामीणों ने लूटा है, पुलिस उसे तत्काल वापस दिलाए अन्यथा तीनों गांवों में तबाही मचा दूंगा। उसने सिर्फ धमकी ही नहीं दी बल्कि वह क्या कर सकता है यह दिखाने के लिए मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के हथेड़ी गांव की खिरकाइयों पर रात भर तांडव मचाया। मोटरसाइकिल को आग के हवाले किया, वहीं गुर्जर समाज के मोरावन व नसीहर में रहने वाले छह ग्रामीणों की जमकर मारपीट की और जाते-जाते एक का हाथ व नाक काट ले गया। खबर मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल हुए युवक को ग्वालियर उपचार के लिए भेज दिया है।
घटनाक्रम के मुताबिक शुक्रवार की रात करीब साढ़े ८ बजे पुलिस की वर्दी में डकैत पप्पू गुर्जर अपने ६ हथियारबंद साथियों के साथ हथेड़ी गांव की खिरकाईयां पर पहुंच गया। पहले तो डकैतों ने खिरकाई पर सो रहे निहाल सिंह (२७) पुत्र मानसिंह, सोहनसिंह (२५) पुत्र नारायण सिंह, मुकेश (२५) पुत्र मानसिंह निवासी नसीहर को जगाया और फिर चाय पीने की इच्छा जाहिर की। इस दौरान डकैतों का व्यवहार घटना के विपरीत था। बातों ही बातों में गिरोह के सरगना पप्पू गुर्जर ने तीनों युवकों से खिरकाई पर कितने लोग हैं, कौन कहां गया है, की जानकारी ले ली। करीब साढ़े ९ बजे जैसे ही पहले से डीजल लेने गए मोहर सिंह (२७) पुत्र हरीलाल, पंजाब (१८) पुत्र अमरसिंह, मुकेश (२१) पुत्र नारायण निवासी मोरावन वापस खिरकाईयों पर पहुंचे, डकैतों को अपने तीनों साथियों के पास बैठे देख उनकी रुह कांप गई। डकैतों ने पहले तो सबके साथ बैठकर चाय पी और फिर करीब साढ़े १० बजे अपना असली रूप दिखा दिया। एक-एक कर गिरोह के सदस्यों ने ग्रामीणों की पहले तो मारपीट की और फिर पुलिस के नाम एक चि_ी थमा कर मोहर सिंह (२७) पुत्र हरीलाल निवासी मोरावन का बांया हाथ व नाक काट दिए। जाने से पहले डकैतों ने खिरकाई पर बनी पाटोर के बाहर रखी मोहर सिंह की मोटर साइकिल की टंकी में जलती माचिस की तीली डालकर उसे आग के हवाले कर दिया। डकैतों के जाने के बाद भयभीत ग्रामीण गिरते-पड़ते टिकटोली पहुंचे, जहां से उन्होंने अपने परिजनों को सूचना दी। परिजनों ने तत्काल घटना से सेसईपुरा थाना पुलिस को अवगत कराया। घटना के तीन घंटे बाद मौके पर पहुंची पुलिस गंभीर रूप से जख्मी मोहर सिंह को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कराहल लेकर आई, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर के लिए रेफर कर दिया।

क्या लिखा है गिरोह के सरगना पप्पू ने...
गट्टा गिरोह के सरगना पप्पू गुर्जर टाइगर ने पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी कराहल व सेसईपुरा थाना प्रभारी को सम्बोधित करते हुए लिखा है कि गिरोह के सरगना गट्टा की मौत के समय ग्रामीणों ने गिरोह के १५९ कारतूस व दो लाख ७७ हजार रुपए, पांच तौला सोने की जंजीर, चार अंगूठी, चार मोबाइल पुलिस को नहीं मिल हैं। क्योंकि ग्रामीणों ने छुपा लिए थे। पुलिस गिरोह के सामान को दिलाए, अन्यथा मोरावन, नसीयर और कोलूपुरा में तबाही मचा दूंगा।

पहले भी कई बार किया है गिरोह ने मोरावन में हमला...
गिरोह के सरगना राजेन्द्र गुर्जर उर्फ गट्टा की मौत के बाद गिरोह के साथियों ने गट्टा की मौत का बदला लेने के लिए पहले भी कई बार ग्रामीणों को धमकी दी है। ६ जनवरी को जहां गिरोह ने ग्रामीणों को धमकाया था, वहीं ४ जून की रात को मोरावन निवासी पप्पू गुर्जर के घर पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। खरीफ की बोवनी से पूर्व भी गट्टा गिरोह ने ग्रामीणों को कई बार मोरावन गांव में आकर खेती करने से रोका था।

कैसे हुई थी गिरोह के सरगना गट्टा की मौत...
गिरोह का सरगना राजेन्द्र गुर्जर उर्फ गट्टा ३ जनवरी २०११ की रात को अपने साथियों के साथ मोरावन गांव में रुका था। शराब पीने के बाद गिरोह में आपस में विवाद हो गया। इस बीच जमकर गोलीबारी हुई, जिसमें गिरोह के मुखिया गट्टा की मौत हो गई। गिरोह के बचे हुए साथियों को शक हुआ कि गट्टा की मौत मोरावन निवासी पप्पू गुर्जर की गोली से हुई है, तभी से गिरोह मोरावन गांव को निशाना बनाए हुए है।

क्या चाहता है पप्पू गुर्जर का गिरोह...
पप्पू गुर्जर गिरोह ने कई बार मोरावन गांव में आकर गिरोह के पूर्व सरगना राजेन्द्र उर्फ गट्टा की याद में गांव के बीचों-बीच चबूतरा बनाने की मांग रखी है। गांव वाले चबूतरा इसलिए नहीं बनाना चाहते कि पुलिस उन पर गिरोह से मिले होने का आरोप लगाएगी। एक ओर पुलिस का भय दूसरी ओर डकैतों का खौफ ग्रामीणों की जिंदगी को नर्क बनाए हुए है।

दहशत में हैं तीनों गांवों के निवासी...
डकैतों का ग्रामीणों में इतना भय है कि वह पुलिस और मीडियाकर्मियों से बात करने तक को तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार गिरोह के सरगना पप्पू गुर्जर ने ग्रामीणों को पुलिस और मीडियाकर्मियों से रूबरू होने पर जान से मारने की धमकी दी है। यही वजह है कि ग्रामीण कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है।

क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक

- पुलिस पार्टियां सर्चिंग के लिए जंगल की तरफ कूच कर चुकी हैं। यह बात सही है कि पहले भी इस गिरोह ने मोरावन में गोलीबारी की है। गिरोह के खात्मे के लिए पुलिस पूरी तरह से प्रयासरत है।
महेन्द्र सिंह सिकरवार
पुलिस अधीक्षक

बुधवार, 10 अगस्त 2011

फक्कड़ और कुसुमा नाइन सहित पांच को आजीवन कारावास




इटावा। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अदालत में 13 वर्ष पुराने अपहरण हत्या जैसे संगीन मामले में विशेष न्यायाधीश संदीप जैन ने पूर्व दस्यु कुख्यात रामआसरे उर्फ फक्कड़ और कुसमा नाइन सहित पांच लोगों का आजीवन कारावास की सजा सुनायी तथा सभी से 25-25 हजार का अर्थदंड भी वसूलने का आदेश दिया।
भरेह थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हरोली निवासी वादिनी हीरा देवी द्वारा तीन जुलाई 1998 को लिखित शिकायत के आधार पर बताया कि फक्कड़ गिरोह द्वारा ग्राम हरोली के ग्राम प्रधान को बंधक बनाकर उसके छोटे भाई सत्यवीर सिंह द्वारा उसके पति आदेश तिवारी को बुलाया गया। उसके एक सप्ताह बाद पांच लाख की फिरोती की मांग की गयी। एक अक्टूबर 1998 को मुकदमा दर्ज किया गया। उक्त घटना की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष भरेह लल्लूराम द्वारा की गई थी एक तथ्य और सामने आया कि जिस दिन आदेश तिवारी का अपहरण फक्कड़ गिरोह द्वारा किया था। उसी दिन गांव से शिवशंकर का भी अपहरण किया गया परन्तु फिरोती देकर वह छूट आया था। उसी ने ब्यान दिया कि फक्कड़ ने आदेश तिवारी को अभियुक्तगण रामकरन चौबे, भगवान दास, श्रीनारायण और विशंबर को सौंप दिया था। उसके बाद इन चारों अभियुक्तों को आदेश तिवारी को कुल्हाड़ी से काटते हुये देखा है। उसने यह भी ब्यान दिया कि उक्त अभियुक्तों ने हत्या में प्रयोग की गयी कुल्हाड़ी को खून से सनी हुयी रामआसरे उर्फ फक्कड़ को दे दी। देते समय फक्कड़ ने कहा था कि यदि शिवशंकर और अन्य ने अगर तीन-तीन लाख नहीं दिये तो उनका भी यही हाल होगा। यह भी बताया कि आदेश की लाश को उसी दिन शाम सात बजे उपरोक्त अभियुक्तगणों ने एक बोरे में भरकर क्वारी नदी में फेंक दी थी।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तमाम गवाहों को भी सुना तत्पश्चात यह आदेश दिया कि उक्त मामले में अभियुक्त श्रीनारायन उर्फ गिल्लू पुत्र राजाराम दुबे को तथा रामकरन चौबे पुत्र शंभूदयाल चौबे निवासी ग्राम हरौली थाना भरेह तथा तीसरा अभियुक्त विशंभर सिंह पुत्र जंगीसिंह उर्फ जंगबहादुर निवासी बसरी थाना विठोली तथा राम आसरे उर्फ फक्कड़ और कुसमा नाइन का आदेश तिवारी की हत्या के अपराध में धारा 302 भादसं सश्रम कारावास तथा 15 हजार रुपया अर्थदंड तथा अर्थदंड न करने पर दो वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास से दंडित किया। उपरोक्त मामले में राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता दयाशंकर शुक्ला ने पैरवी की।