शनिवार, 22 सितंबर 2012

बीहड़ में फिर से फरमान सुनाने की तैयारी ?

बीहड़ में डकैत रामवीर गुर्जर (फाइल फोटो)।
रेनू यादव


 





चम्बल के कटीले जंगलों से डर रही है रेनू यादव , मगर पूर्व डाकू रामवीर चाहता है की रेनू फिर से उठाये असलहा और कूदे बीहड़ में / 
डाकुओं को "इष्टदेव" के रूप में पूजने वाले नेताओं की इसमें कोई चाल तो नहीं ?

देश की दिशा और दशा तय करने वाले  "राजनेता " दिल्ली में बैठकर सरकार की उम्र के आकलन के 
साथ  लोक सभा चुनाव की तैयारी में लग गए हैं तो दिल्ली से सैकड़ों मील दूर चम्बल और पाठा के डाकू 
भी आगामी लोक सभा चुनाव में अपनी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपस्थिति की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं 
/ उनको पता है की इस इलाके  में होने वाले चुनाव में उनकी थोड़ी सी भागीदारी उन्हें बड़ा इनाम दिला 
सकती है लिहाजा इस मौके को वह भुनाने की पूरी कोशिस में जुट गये हैं / चुनाव के दरम्यान कई बार 
इस इलाके के नेताओं के बीच "इष्टदेव" के रूप में पूजे जा चुके चम्बल और पाठा के डकैत अपनी नयी 
योजना की सफलता की तैयारी में उतनी ही सिद्दत के साथ लगे हैं जितना चुनाव लड़ने के लिए नेता / 
  चंबल के कुख्यात डकैत निर्भय गुर्जर , रज्जन गुर्जर , सलीम , और  और पाठा के   ददुआ, ठोकिया और 
रागिया की मौत के बाद कुछ समय के लिए चंबल और पाठा की  घाटी शांत हो गई थी, २०१२ में हुए 
यू.पी. अस्सेम्बली के चुनाव में डाकुओं के फरमान के बगैर जब चुनाव हुआ तो बीहड़ी इलाके की जनता 
ने भी बिना  किसी डर के दिल खोल कर मतदान क्या / लेकिन लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही डकैतों 
के कदमों की आहट फिर से सुनाई देने लगी है /.बीहड़ी सूत्रों के मुताबिक़  राजनीतिक आकाओं ने उन्हें 
फिर से बढ़ावा देना शुरू कर दिया है / .पाठा में  रागिया गिरोह की कमान संभालकर बलखंडिया पटेल ने
 आतंक का नया अध्याय शुरू कर दिया है / . डकैतों के रहमो-करम पर सांसद-विधायक बनने वाले 
सफेदपोशों ने भी बलखंडिया को ददुआ और ठोकिया की तरह 'ईष्ट' मान लिया है / जो जानकारी मिली है 
उसके मुताबिक़  पिछले माह चित्रकूट की अदालत में  पेशी के बाद   बांदा जाते समय पुलिस हिरासत से 
भागे 13 डकैत भी उसके गिरोह में शामिल हो गए हैं./  दूसरी तरफ, देश की आतंरिक और वाह्य सुरक्षा के
 लिए  कभी पंजाब में तैनात रहा सीआरपीएफ का सिपाही राम चन्द्र अब स्वयं अमन पसंद जनता के 
लिए ख़तरा बन गया है /  फौजी  रामचंद्र यादव भी चंबल में आ धमका है./  उसका गिरोह भी तेजी से 
अपना प्रभाव बढ़ाता जा रहा है./ सैकड़ों किलोमीटर की परिधि में फैले चम्बल के बीहड़ में रामचंद्र की 
चहल कदमी निर्द्वंद जारी है /  रामचंद्र ने बीहड़ में मारे जा चुके डाकुओं के गिरोह के बचे हुए डकैतों से 
संपर्क साधा और धीरे-धीरे उन्हें अपने साथ मिला लिया. आज उसके गैंग में 10-12 डकैत  हैं, जिनके 
पास अत्याधुनिक हथियार भी है./ इसके अलावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अरविन्द 
गुर्जर के गिरोह ने बाहर खुली हवा में सांस ले रही पूर्व दस्यु सुंदरी रेनू यादव को एक बार फिर से चम्बल 
के बीहड़ों में भेजने और उसके गैंग के बचे डाकुओं की कमान सम्हालने की धमकी दे रहा है / रेनू यादव अपनी सुरक्षा की गुहार प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर कर चुकी है / रेनू का कहना है की चम्बल में डाकुओं के अंत की कहानी उसी के गिरोह से शुरू हुयी / ४ दिसंबर २००५ की रात उसे अच्छी तरह से याद है / औरैया जिले के मई गाँव के जंगलों में डाकू चन्दन यादव अपनी दस्यु सुंदरी रेनू यादव और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ आराम कर रहा था / तभी उस वक्त का सबसे खूंखार डाकू रामवीर गुर्जर अपने साथी डकैतों के साथ वहाँ आ धमका / दरअसल वह चाहता   था की  रेनू यादव चन्दन यादव  का साथ छोड़  कर उसकी  हमराह  बने  मगर  यह  ना  तो  चन्दन को पसंद  था और ना  ही  रेनू इससे सहमत  हुयी / रामवीर जानता  था की चन्दन के जीते  जी  वह  रेनू को नहीं  पा  सकता  / राम  वीर  ने  ६  घंटे  से अधिक  समय  तक  फायरिंग  कर चन्दन को मई के जंगलों में मार  गिराया  लेकिन  रेनू फिर भी  रामवीर  के गिरोह में शामिल नहीं हुयी / रेनू ने रामवीर की बन्दूक छीनकर उसको गोली मारकर लहूलुहान कर दिया और जंगल से भाग आई / रेनू के इस कदम से रामवीर गुर्जर बौखला गया और उसने अगले ही दिन चन्दन गिरोह के तीन अन्य सदस्यों को कैथौली के जंगलों में मारकर फेंक दिया / डाकुओं के बीच लगातार शुरू हुए गैंगवार का फायदा पुलिस ने उठाना शुरू किया / आखिर कार डाकुओं की दरिंदगी से परेशान बीहड़ की जनता पुलिस की सहायता के लिए आगे आई और चम्बल के ज्यादातर डाकू या तो पुलिस की गोलियों के शिकार हुए या फिर जान बचाने के लिए सरेंडर कर दिए / २०१२ में हुआ असेम्बली का चुनाव डाकुओं बगैर किसी फरमान के संपन्न हो गया / राज्य के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ की जनता ने भी जागरूकता दिखाई और जमकर मतदान किया वह भी बिना किसी डर और भय के / यहाँ की जनता को लगा की डाकुओं का फरमान अब इतिहास बन चुका है और भविष्य उनका है जिसमे वह अपने पसंद का प्रतिनिधि चुनकर अपने इलाके के विकास की नयी इबारत लिखेंगे / लेकिन जेल में ऊम्र कैद की सजा काट रहे रामवीर गुर्जर द्वारा डाकू चन्दन की प्रेमिका और  दस्यु सुंदरी रही रेनू यादव को दुबारा बीहड़ में जागर बचे डाकुओं के गिरोह का लीडर बनने के हुक्म को सुनकर रेनू और  यहाँ की जनता एक बार फिर काँप उठी है / शांत हो चुके बीहड़ में यदि एक बार फिर से असलहे की गर्जना सुनाई डे तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं / बीहड़ शांत रहे और वहाँ की जनता चैन की जिंदगी जी सके इसके लिए जरूरत है पुलिस के दमदार और प्रभावी पहल की लेकिन फिलहाल तो पुलिस के कदम कस्बों और शहर तक ही सीमित दिखाई डे रहे हैं / रेनू का कहना है की डकैतों का अंत उसी से शुरू हुआ लेकिन कहीं ऐसा ना हो की एक बार फिर डाकुओं की शुरुआत भी उसी से ना हो जाए / 
फिलहाल चंबल में बड़े डाकू तो नहीं हैं मगर जिस तरह से रामचंद्र गैंग की ताकत बढ़ी है, उसे देख कर 
यही कहा जा सकता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर डकैतों का फरमान आ सकता है /.
' अपहरण का दंश झेल चुके चंबल निवासी हरिशचंद्र तिवारी का कहना है, 'चंबल में डाकुओं का फरमान
 एक परंपरा है /. 2014 के संसदीय चुनाव मे भी इसी तरह का प्रभाव नजर आने की संभावनाओं से इंकार
 नहीं किया जा सकता/' फिलहाल, एसएसपी राजेश मोदक ने रामचंद्र पर 10 हजार रुपये का इनाम रख 
दिया है. एसओजी को भी सतर्क कर दिया गया है / 
दरअसल, इस इलाके में डाकू बहुत समय से नेताओं के काम आते रहे हैं/ पहले वे फरमान जारी करके 
नेताओं को जिताते हैं और फिर खुद या अपने रिश्तेदारों को सक्रिय राजनीति में ले आते हैं/ यही वजह है 
कि 2014 लोकसभा चुनाव में बलखंडिया और रामचंद्र यादव जैसे 'उभरते हुए' डकैतों की भूमिका न 
केवल चर्चा का विषय बनी हुई है बल्कि काफी हद असरदार भी साबित हो सकती है/ साफ संकेत मिल 
रहे हैं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में डकैतों के फरमान का प्रभाव फिर से नजर आएगा/

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