गुरुवार, 31 मार्च 2011

चंबल में लड़ मरेंगे डाल्फिन और घड़ियाल


चंबल नदी में पानी का स्तर चिंतनीय स्तर तक गिर गया है। क•ाी अपनी विशाल जल राशि से डराने वाली चंबल को इन दिनों लोग पैदल ही पार किए ले रहे हैं। सबसे बड़ा संकट डाल्फिन और घड़ियालों पर आने वाला है। डाल्फिन और घड़ियालों की चंबल में देश की एकमात्र सेंचुरी होने के कारण चिंता अधिक बढ़ गई है। मुरैना से विश्वजीत गोले की रिपोर्ट सा•ाार कल्पतरु एक्सप्रेस .. .. .. .. ..
विश्वजीत गोले
मुरैना। चंबल नदी में पानी का स्तर लगातार तेजी से कम हो रहा है। हालत यही रहे तो इस नदी में डाल्फिन और घड़ियालों के सामने •ोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। वन्य प्राणी विशेषज्ञों को डर है कि इससे जलीय जीवों के बीच •ोजन के लिए जंग शुरू हो सकती है। इस संकट ने केंद्रीय वन मंत्रालय को •ाी संकट में डाल दिया है लेकिन समस्या से निपटने का उपाय अ•ाी किसी को नहीं सूझ रहा है।
वर्ष 2011 में की गई जलचरों की गणना में ऐसी स्थिति सामने आई है। चंबल के बीहड़ों को हिलाने वाले कुख्यात डकैतों को अपनी अथाह जलराशि से डराने वाली चंबल नदी, अब सूख रही है। जिसे सीधे शब्दों में कहें तो बांझ होती जा रही है। पानी कम होने से चंबल नदी में पलने वाले जलीय जीव मार्च माह में ही गहरे-गहरे गड्ढों में चले गए है। हर साल कम हो रहे पानी ने वन वि•ााग ही नहीं केन्द्रीय वन मंत्रालय तक को चिंता में डाल दिया है।
चंबल सेंचुरी में काम कर रही तमाम देशी व विदेशी स्वयं सेवी संस्थाएं तथा वन्य प्राणी विशेषज्ञ •ाी खासे चिंता में आ गए है। चंबल नदी का जलस्तर कैसे बढ़े अ•ाी फिलहाल इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हुआ है। चंबल नदी में पानी की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सैकड़ों स्थानों पर नदी को पैदल ही पार किया जा सकता है। पानी कम होने की गति को देखते हुए, यह साफतौर पर झलकने लगा है कि महज दो वर्ष में ही चंबल नदी की जलधारा टूट जाएगी, और इसमें पलने वाले जलीय जीव डाल्फिन, मगर, कछुआ तथा विलुप्तप्राय घड़ियाल हमेशा के लिए यहां से खत्म हो जाएंगे।
चंबल नदी राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश की सीमा में बह रही है। चंबल नदी से राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में पानी की सप्लाई की जा रही है। जिसमें राजस्थान सरकार द्वारा तो •ाारी मात्रा में पानी का दोहन करने के लिए चंबल राजघाट पुल पर बकायदा अपने दो प्लांट लगा रखे हैं। जिनके जरिए हर रोज लाखों गैलन पानी निकाला जा रहा है। एक प्लांट से पानी थर्मल पावर प्लांट के लिए सप्लाई हो रहा है तो दूसरे से धौलपुर व •ारतपुर के लिए पानी •ोजा जा रहा है। चंबल नदी से अनेक नहर राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश क्षेत्र में आती है, जिनके जरिए से पानी को सिंचाई के लिए लिया जा रहा है। वन वि•ााग द्वारा जलचरों की गणना के लिए किए गए सर्वे के दौरान सवा पांच सौ किलोमीटर लंबी चंबल सेंचुरी में दो सैकड़ा से अधिक पुल मिले। इनमें से जलचरों के रहने लायक पुलों को छांटे तो वे 73 है। सर्वे में एक सैकड़ा से अधिक ऐसे स्थान मिले जहां चंबल नदी का पानी घुटनों से नीचे था तथा नदी को पैदल ही पार किया जा सकता है। पिछले पांच साल पूर्व की बात करें तो चंबल नदी में एक दर्जन स्थानों पर ही •ाीषण गर्मी के दिनों में चंबल नदी को पार किया जा सकता था, लेकिन कम होते जलस्तर ने इस संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि की है।

वर्जन बाक्स...
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प्रोजेक्ट फाइनल नहीं हुआ
"चंबल सेंचुरी में पानी हर साल तीव्र गति से कम हो रहा है। ये बहुत बड़ी चिंता का विषय है। पानी की कमी, •ाारी मात्रा में हो रहे दोहन से आई है। चंबल में पानी बढ़ाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि अ•ाी फिलहाल इस पर प्रोजेक्ट फाइनल नहीं हुआ है।"
आर.एस. सिकरवार
वन मंडलाधिकारी मुरैना

"सर्वे के दौरान चंबल नदी में पुलों की संख्या 73 मिली है। मगर, घड़ियाल तथा डाल्फिनों ने पुलों में पहुंचना शुरू कर दिया है। पुलों में इन्हें •ोजन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कमी होने पर टेरटरी बनाएंगें और तब तक इनके बीच •ोजन के लिए युद्ध की सं•ाावनाएं बढ़ जाती हैं।"
डॉ. ऋषिकेश शर्मा, वन्य प्राणी विशेषज्ञ
देवरी घड़ियाल ईको सेंटर मुरैना