बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

जगन का करौली में डेरा

तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना दस्यु जगन गुर्जर ने इन दिनों राजस्थान के करौली जिले में डेरा डाल रखा है। बीहड़ सूत्रों के मुताबिक जगन ने अपना ठिकाना महावीर जी थाना क्षेत्र के तहत आने वाले कैमरी और खीमा का पुरा में बना लिया है। यहीं पर एक ग्रामीण की जीप से वह आवाजाही कर रहा है। पुलिस से छिपकर वह अपनी ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। इसके लिए वह हथियार और कारतूस खरीदने की फिराक में है। उसने अपने गिरोह को तीन हिस्सों में बांट रखा है। वह स्वयं दस्यु सुंदरी कौमेश के साथ है। दूसरे हिस्से की कमान उसके भाई पप्पू और पान सिंह के हाथ में है।

धौलपुर में दो दस्यु ढेर

धौलपुर पुलिस ने सरमथुरा इलाके में बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ में दो इनामी दस्यु मुन्ना कंजर और बनियाराम मीणा को मार गिराया। भाग निकले दस्यु नारायन और निहाला की तलाश जारी है। मारे गए दस्यु खान इलाके में हत्या, चौथ वसूली और पुलिस पर हमला करने के आरोप में वांछित थे। उनके ऊपर दो-दो हजार का इनाम घोषित था। पुलिस ने इनके कब्जे से एक 306 बोर और एक 315 बोर की रायफल और करीब डेढ़ सौ कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस की माने तो मारे गए दस्यु खैमरी गांव में अपने लिए हथियार और कारतूस खरीदने आए थे।

शनिवार, 18 अक्तूबर 2008

गुपचुप जारी है एक लड़ाई

देश के ह्रदयस्थल मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में है कूनो अभ्यारण। घने जंगल और पहाड़ों के बीच के गुजरती कूनो नदी अमेजन घाटी जैसा नजारा पैदा करती है। कभी यहा इलाका ग्वालियर स्टेट में आता था और पालपुर रियासत के अधीन था। यह इलाका वीरपुर तहसील के तहत आता है और यह सहरिया आदिवासी बाहुल्य है। आजादी से पहले यह इलाका सिधिंया और पापुलर राजाओं के लिए आखेट का प्रिय इलाका था। तब से लेकर आजादी के बहुत बाद तक इन आदिवासियों की ग्वालियर और पालपुर दोनों की रियासतों के उत्तराधिकारियों को लेकर श्रद्धा का भाव रहा। यह जंगल इन आदिवासियों के लिए सब कुछ है। राजाओं के शिकार के शौक के बाद भी इस इलाके में जंगल और जमीन बचे रहे। तमाम बाघ भी इस इलाके में थे। बाद में यह लुप्त हो गए। हाल ही के कुछ वर्षों में इसमें फिर बाघों को छोड़ा गया है और इस इलाके को अभ्यारण का मानक दिया गया है।इसी इलाके के आदिवासी इन दिनों बिना किसी मेधा पाटकर या बड़े नाम के अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। लड़ाई जंगल और जमीन बचाने की। इन आदिवासियों की लड़ाई मौजूदा सरकार से हो जो इन्हें जंगल से बेदखल कर चुकी है। अभ्यारण के बहाने आदिवासियों को उनके सदियों पुराने आवासों से बेदखल कर दिया गया है। सरकार ने यह काम बड़ी ही सफाई से किया है। आदिवासियों को पहले बेहतर जमीन और मुआवजा देने के बहाने जंगल से बाहर किया गया फिर उन्हें आवास के लिए मात्र 35 हजार रुपये और जमीन के नाम पर कुछ बीघा पथरीली जमीन दी गई। ऐसी जमीन जिस पर हल चलाना तो संभव है ही नहीं। अब यह आदिवासी इस ठगी से हतप्रभ हैं और उन्होंने अपने परंपरागत हथियार उठा लिए हैं। इस पर सरकार ने उनके मुकाबले पुलिस बल को उतार दिया है। कुछ महीने पहले ही इन आदिवासियों का पुलिस बल से टकराव हुआ। आदिवासियों ने पुलिस बल को लगभग घेर ही लिया। इसका बीडियो टेप मेरे पास है। जल्द ही सबके सामने लाया जाएगा।मगर सवाल यह है कि आदिवासी जीवन की यह जंग कम तक और कितनी लड़ पाएंगे। यह सवाल तब और मौजू है जब मी़डिया का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मीडिया का इस तरफ ध्यान हो भी नहीं सकता। कारण यह इलाका इतने गहरे बीहड में है जहां जाने के लिए जिगर की जरूरत है जो कमोवेश अपने को तथाकथित धुरंधर कहने वाले कारपोरेट पत्रकार और सनसनी की दम पर नाम बटोरने वालों के पास तो नहीं हो सकता। दूसरे इन आदिवासियों के साथ मेधा पाटकर,अरूंधती राय जैसा नाम भी नहीं जुड़ा कि मीडिया टीआरपी बढ़ाने के लिए बावली हो जाए फिर आखिर इनके सवालों से कौन जूझेगा। कौन उन्हें पुशतैनी जमीन से बेदखल करने के अन्याय के खिलाफ लड़ी जा रही उनके हौंसले की लड़ाई में साथे देगा कौन....

गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008

खानों पर डकैतों का कब्जा

धौलपुर इलाका पत्थरों की खान के लिए मशहूर है। इस एक काम से ही राज्यों को करोड़ों की आमदनी होती है। अफसोस इस बात का है इस इलाके पर कानून नहीं डकैतों का राज्य चलता है। दस्यु उन्मूलन में पुलिस भले ही ताकत लगा रही हो लेकिन राजस्थान के धौलपुर जिले के बसेड़ी और सरमथूरा और मुरैना जिले के सबलगढ़ और करोली के कुछ इलाकों में डकैतों का ही हुकुम चलता है। इलाके में सक्रिय एक दर्जन से अधिक दस्यु बंदूक की दम पर इन खान संचालकों से लाखों रुपये की वसूली करते हैं। जनपद के चंबल इलाके में इस समय दस्यु सरगना जगन गुर्जर पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस गैंग का सदस्य पान सिंह और कोमेश चौथ वसूली के लिए जाते हैं। करौली जनपद में प्रेम सिंह मीणा और रामबाबू काछी के हाथ वसूली की बागडोर है। यह दस्यु विशेष तरीके से काम करते हैं और किसी एक दिन आकर खान संचालक या श्रमिकों को अपना फरमान सुना चौथ की रकम और स्थान देकर एक कोड वर्ड देते हैं। तय दिन और समय तक रकम न पहुंचने तक खान में काम बंद रहता है।

रविवार, 12 अक्तूबर 2008

दस्यु सीमा परिहार सपा में

पूर्व दस्युओं का राजनीति से और राजनेताओं का दस्युओं से लगाव तमाम बयानों के बावजूद मजबूत जोड़ की तरह जुड़ा हुआ है। ताजा घटनाक्रम यह है कि फूलन को डकैत बनाने की कहानी के मुख्य सूत्रधार लालाराम और श्रीराम गैंग की सीमा परिहार अब सपा में शामिल हो गई हैं। सीमा को लेकर एक फिल्म भी बन चुकी है। इससे पहले सीमा इंडियन जस्टिस पार्टी से सांसद का उत्तरप्रदेश की इटावा सीट से चुनाव भी लड़ चुकी है। इसके बाद वह रालोद में शामिल हुई और हाल ही में सपा में शामिल हो गई हैं। सीमा पर दो दर्जन से अधिक मुकदमें हैं और इन दिनों पर औरैया जिले के दिबियापुर कसबे में रहती हैं।

रविवार, 5 अक्तूबर 2008

मुरैना से अपहृत युवकों का सुराग नहीं

राजस्थान मडरायल से अपहृत मुरैना के चारों युवकों का अब तक अता-पता नहीं लग सका है। करौली पुलिस की पार्टियां रविवार को भी मडरायल के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र में युवकों की तलाश में भटकती रही। करौली के पुलिस अधीक्षक सरवर खान की माने तो पुलिस जल्दी ही अपहरणकर्ता तक पहुंच जाएगी। इस संदर्भ में पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण क्लू भी हाथ लगे हैं।
गौरतलब है कि कैलादेवी के दर्शनों को जा रहे मुरैना के भक्त सोबरन शर्मा, रिंकू अग्रवाल, नेमीचंद अग्रवाल और सोनू अग्रवाल का अज्ञात बदमाशों ने राजस्थान के करौली जिले में चंबल नदी के मडरायल घाट के उस पार से अपहरण कर लिया था। बदमाशों ने अपहृत रिंकू के मोबाइल से ही उनके घरवालों से फोन पर बात कर 40 लाख रुपये की फिरौती मांगी है।
अपहृतों को लेकर करौली पुलिस और मुरैना मध्यप्रदेश पुलिस चकरघिन्नी बनी हुई है। वहीं अपहृतों के परिजनों का भी बुरा हाल है। युवकों की तलाश में मुरैना से गई पार्टियां भी राजस्थान के चंबल बीहड़ों में सर्च कर रही हैं। करौली के पुलिस अधीक्षक सरवर खान ने बताया कि अभी तक अपहृतों की लोकेशन उनके मोबाइल के हिसाब से चंबल घाटियों में मडरायल और सबलगढ़ की तरफ मिल रही है। सरवर के अनुसार मुकेश की बातचीत से शक है कि फिरौती के लिए फोन करने वाले मुकेश की आवाज राजस्थानी बोलचाल से मेल नहीं खा रही है। माना जा रहा है कि मुकेश दादा मुरैना का ही रहने वाला है।