मंगलवार, 30 जून 2009

राजकुमार गैंग का सदस्य पकड़ा

भिंड की अटेर कनेरा परियोजना से छह लोगों का सामूहिक अपहरण करने वाले राजनारायण और राजकुमार गैंग के सदस्य को मुरैना पुलिस ने मंगलवार को देवगढ़ से गिरफ्तार कर लिया।मुरैना पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह के अनुसार भिंड से 21 जून को छह लोगों का अपहरण करने वाले गैंग के दो सदस्य अपने एक साथी के साथ मुरैना में कोई वारदात करने की फिराक में थे। थाना देवगढ़ की टीम ने घेराबंदी कर गैंग के सदस्य रामप्रसाद सिकरवार को नंदपुरा में दबोच लिया। उसके साथी लला भदौरिया और प्रेम शर्मा भागने में सफल रहे।

रविवार, 28 जून 2009

बीहड़ टूरिज्म हमारे साथ

बीहड़ के बारे में मन में बैठ चुके डर को दूर करने के लिए यह मेरा प्रोफेशनल प्रयास है। वह जो बीहड़ को नजदीक से देखना चाहते हैं। उसमें घूमना चाहते हैं। पुराने बागियों से मुलाकात की इच्छा रखते हैं और बीहड़ के एडवेंचर को जीने की इच्छा है। वह मुझसे मोबाइल नंबर 9456073566 पर संपर्क कर सकते हैं।

आखिर कहां है पंजाब गुर्जर

मध्यप्रदेश का एक लाख का ईनामी डकैत पंजाब गुर्जर पुलिस के हत्थे नहीं आ रहा है। पुलिस का अनुमान है कि पंजाब ने बीहड़ छोड़ दिया है और वह आगरा में छुपकर जीवन बिता रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस ने उसे ढूंढ निकालने के लिए कुछ टीम गठित की हैं। पुलिस को पक्का यकीन है कि पंजाब इन दिनों आगरा में कहीं काम धंधा कर रहा है। इससे पहले पंजाब को पकड़ने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने फीरोजाबाद में छापा मारा था। पुलिस को सूचना थी कि पंजाब चूड़ी फैक्ट्री में काम कर रहा है। पुलिस के आने से पहले ही पंजाब पत्नी सहित निकल भागा था।

मंगलवार, 23 जून 2009

सुरक्षाकर्मी ही निकला अपहरण कांड का विभीषण

गिरोह से मुक्त हुए अपहृत
भिंड जिले के अटेर में चल रही कनेरा परियोजना में जिस सुरक्षाकर्मी को हिफाजत के लिए रखा गया था वहीं अपहरण कराने का सूत्रधार निकला। पुलिस से घिरा डकैत राजकुमार अपहृत प्रोजेक्ट मैनेजर शरद झावर, अभिमन्यु त्रिपाठी दिलीप ओझा, सलीम और संतोष पचौरी को छोड़कर भाग निकला। एक अन्य अपहृत सुरेश माहेश्वरी को डकैतों ने भागने के लिए मजबूर किया। सूचना है कि इससे उनकी मौत हो गई। सुरेश पचौरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह ने इन अपहृतों की रिहाई के लिए एक करोड़ की फिरौती मांगी थी जो घटकर दस लाख तक आ गई। इससे पहले ही पुलिस के दबाव में गिरोह भाग निकला।
नंगे पैर घंटों दौड़ाया
अपहृतों के साथ राजकुमार गैंग ने दरिंदगी का व्यवहार किया। उनके जूते उतरवा लिए। कंटीली झाड़ियों और बीहड़ के ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर नंगे दौड़ाया गया। इससे शरद झावर की हालत तो बेहद खराब हो गई। सुरेश के पैर में राड पड़ी थी इससे वह भाग नहीं सके। भूख प्यास से बुरा हाल था। उनके साथी कुछ समय तक उन्हें साथ लेकर भागते रहे लेकिन कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
राजकुमार का दादा भी था डकैत

सिमरई गांव में राजकुमार का घर

राजकुमार और उसका भाई राजनारायण का दादा भी अपने जमाने में डकैत रहा था। रामसनेही के यह दोनों पुत्र भिंड जिले के गोरमी थाना क्षेत्र के स्वेच्छापुर गांव के रहने वाले थे। सिमरई गांव में अब उनका घर खंडहर हो चुका है। उनके दादा रामलाल का साठ के दशक में चंबल के बीहड़ों में आतंक था। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि रामलाल ने 40 साल पहले अकेले ही तीन दिन तक राजस्थान पुलिस से लोहा लिया था। राजकुमार और राजनारायण ने 2007 में गोरमी थाने के स्वेच्छापुर गांव में भारत भूषण उर्फ सेठी की हत्या की थी। दो साल में दोनों भाइयों ने मध्यप्रदेश के पावुई, अटेर, गोरमी, महुआ थाना क्षेत्र में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देकर आतंक मचा दिया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश पुलिस ने दोनों पर 15-15 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया है। फिलहाल गैंग में दस सदस्य हैं। राजकुमार हमेशा वर्दी में रहता है। उसके सदस्य उसे फौजी कहकर बुलाते हैं।

सोमवार, 22 जून 2009

अपहृत छोड़कर भाग गया राजकुमार

पुलिस के बढ़ते दबाव से राजकुमार गैंग अटेर से अपहृत किए लोगों में से एक को छोड़ बाकी सभी को खेरा राठौर के जंगल में छोड़कर भाग गया है। समझा जाता है कि ऐसा उसने पुलिस पर पीछा न करने का दबाव बनाने के लिए किया है। गौरतलब है कि राजकुमार गैंग के पीछे मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश ने अपनी पूरी ताकत झौंक रखी है।

बीहड़ का दशकों का सपना पंचनद बांध

प्रोजेक्ट का खाका (क्लिक करके बड़ा करें)
पंचनद बांध बीहड के सपनों में शामिल है। सपना जो सत्ताधारी यहां की जनता को बीते तीन दशकों के दिखा रहे हैं. पंचनद मध्यप्रदेश के भिंड और उत्तरप्रदेश के इटावा, जालौन, औरैया जिले की सीमा पर यमुना और उसकी सहायक नदियों चंबल, क्वारी, पहुंच और सिंध का मिलन स्थल है। इस जगह पर ही वह प्रसिद्ध मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि तुलसीदास ने यहां प्रवास किया हो। आज तो यह स्थल बीहड़ में अपराध और गरीबी के बीच सांसे ले रही जनता और उपजाऊ होने के बाद भी बेकार पड़ी बीहड़ की जमीन को एक नई जिंदगी दे सकता है। इस बांध पर सबसे पहली योजना1986 में बनी थी। यहां बांध बनाने की बात इंदिरा गांधी ने कही थी। तब बनाई गई योजना के प्रस्ताव को संक्षिप्त रूप में जस का तस यहां दे रहा हूं। अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड, मऊरानीपुर एसपी शुक्ला ने बनाया था।

पंचनद बांध योजना के तहत उत्तरप्रदेश के औरैया जनपद में यमुना नदी पर औरैया घाट से 16 किमी अपस्ट्रीम में सढरापुर गांव में बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इस स्थल के अपस्ट्रीम में चंबल, क्वारी, सिंध और पहुंज नदियां मिलती हैं। इस परियोजना से सिंचाई के साथ-साथ विद्युत उत्पादन भी होगा। दिनांक 29.6.81 को श्री जीके मिश्रा, प्रमुख अभियंता सिंचाई विभाग उप्र की अध्यक्षता में मुख्य अभियंता कंसलटैंसी कमीटी द्वारा केंद्रीय जल आयोग के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में यह निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित पंचनद बांध के डाउन स्ट्रीम में कम से कम 3000 क्सूसेक के डिस्चार्ज अवश्य छोड़ा जाना चाहिए। न्यूनतम 3000 क्यूसेक की क्षमता का जल विद्युत स्टेशन प्रस्तावित किया जाए। इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न प्रस्तावों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं-
डैम,बैराज-
कुल 764 मी. लंबे बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें 12 मी. के 41 अदद बे होंगे। कुल 40 अदद पीयरों में से 34 अदद पीयर की मोटाई 5 मी. होगी एवं 6 अदद पीयर मी मोटाई 17 मी. होगी। इन्हीं 6 अदद पीयरों में पावर यूनिट लगाए जाएंगे। इनमें प्रत्येक की क्षमता 15 मेगावाट होगी। बैराज के दोनों और गाइड बांध और एफ्लक्स बांध का प्रस्ताव है। बैराज में केस्ट की ऊंचाई 4 मी. एवं 21 मी. ऊंटे ट्रेनर गेट होंगे। इसकी जीवंत क्षमता 3578 मिलियन घमी (2.9 मिलियन एकड़ फुट) होगी। इसमें 1 जनवरी से 30 जून तक के इनफ्लो की गणना में शामिल नहीं किया गया है। 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक के इनफ्लो से 2677 मिलियन घमी. सिंचाई के लिए प्रयुक्त होगा और 8581 मिलियन घमी. पावर यूनिटों के रास्ते नीचे छोड़ा जाएगा। शेष मानसून रन आफ के रूप में 10121 मिलियन घमी. जल बैराज बे से इस्केप किया जाएगा।
पावर हाउस
छह अदद पीयर टाइप पावर यूनिटों का प्रावधान है। इसमें प्रत्येक की क्षमता 15 मेगा वाट होगी। इस प्रकार जनित 90 मेगावाट से कुल 410 मिलियन यूनिट विद्युत पैदा होगी जिसमें से 157 मिलियन यूनिट बाएं और दाएं तट पर प्रस्तावित फीडरों में पानी छोड़ने में प्रयुक्त होगी एवं शेष 253 मिलियन यूनिट कामर्शियल उद्देश्य के लिए प्रयुक्त होगी।
लिफ्ट फीडर कैनाल
जलाशय के दोनों तट पर एक-एक लिफ्ट फीडर कैनाल का प्रावधान किया गया है। कुल 7150 क्यूसेक जल को पंप किया जाएगा। इसमें से 6150 क्यूसेक बाएं फीडर में डाला जाएगा और 1000 क्यूसेक दाहिने फीडर में डाला जाएगा।
बायां फीडर- इसकी लंबाई 72 किमी. होगी। इसमें भोगनीपुर, इटावा और कानपुर में निचली गंगा नहर प्रणाली एवं पश्चिम इलाहाबाद शाखा को पोषित किया जाएगा।
दायां फीडर- इसकी लंबाई 5.40 किमी होगी जिससे बेतवा नहर प्रणाली के कुठोंद शाखा को पोषित किया जाएगा।
पंचनद बांध परियोजना से लाभ-इस परियोजना से 4.42 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी जिससे बाएं तट पर निचली गंगा नहर प्रणाली के कमांड में सिंचाई की तीव्रता 70 फीसदी से बढ़कर 102.4 फीसदी होगी। दाएं तट पर बेतवा नहर प्रणाली के कुठोंद शाखा के कमांड में सिंचाई की तीव्रता 65 से बढ़कर 85.8 हो जाएगी। इससे 8880 लाख रूपये (वर्ष 1982 की दरों पर आधारित) का अतिरिक्त वार्षिक खाद्यान्न की पैदावार होगी।इस योजना से सिंचाई के अलावा 410 मिलियन यूनिट की बिजली प्रति वर्ष पैदा होगी। इसमें से 157 मिलियन यूनिट दोनों तटों पर प्रस्तावित फीडरों में जल डालने में व्यय होगा एवं शेष 258 मिलियन यूनिट कामर्शियल उद्देश्य के लिए उपलब्ध होगा।
परियोजना की लागत
वर्ष 1982 की दरों पर आधारित परियोजना की कुल लागत 55934.49 लाख रुपये आगणित की गई थी। इसमें से सिंचाई सेक्टर की लागत 43308.40 लाख रुपये थी एवं पावर सेक्टर की लागत 12626.09 लाख रुपये आगणित की गई थी। परियोजना की फिजीबिल्टी रिपोर्ट तैयार की गई थी। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का कार्य फरवरी 2008 से सिंचाई निर्माण खंड मऊरानीपुर द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 1982 से अब तक परियोजना की लागत तीन गुने से भी अधिक होने की आशा है।

रविवार, 21 जून 2009

एकजुट हो रहे शंकर और उमर के साथी

चित्रकुट और बांदा के जंगलों में घनश्याम केवट के मारे जाने के बाद डकैत गिरोहों ने नई रणनीति बनाकर इसका बदला लेने की तैयारी की जा रही है। पचास-पचास हजार के ईनामी शंकर और उमर केवट के मारे जाने के बाद उनके बचे साथी अब एकजुट होकर अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हैं। पुलिस अब तक यहां ददुआ, शंकर, उमर, लवकुश केवट, बच्चा केवट, रामराज केवट, बीस हजार के ईनामी बूंदी पासी का सफाया कर चुकी है। अब उमर गैंग का सदस्य रहा फतेहपुर जिले के किशनपुर थाना क्षेत्र के डडियां गैंग के कल्लू केवट ने नए गैंग की कमान संभाली है। इस गैंग में मो.शाहिद, होरीलाल, रमेश केवट और रामपाल केवट हैं। इस गैंग के पास दस्यु उमर, रामराज और लवकुश केवट गैंग के दर्जनों हथियार भी हैं। वहीं शंकर गैंग की कमान किशनपुर थाना क्षेत्र के ही मडैडयन गांव के रामफल केवट ने संभाली है। इस गैंग में बुज्जन केवट, मोती केवट, होरीलाल, राममिलन केवट हैं। इन गैंगों ने अपना ठिकाना धाता, किशनपुर, खखरेरू व असोथर क्षेत्र को बनाया है।

अभी जिंदा है सुंदर पटेल

घनश्याम केवट को मारने के बाद उत्तरप्रदेश के बीहड़ को डाकुओं से खाली कराने का दावा कर रही प्रदेश पुलिस क्या सुंदर पटेल को भूल रही है। सुंदर पटेल की ताकत से पुलिस वाकिफ है। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में आतंका का पर्याय इस डकैत पर डेढ़ लाख का ईनाम है। इसमें एक लाख मध्यप्रदेश सरकार ने और 50 हजार उत्तरप्रदेश सरकार ने घोषित किया है। सुंदर पटेल उर्फ रागिया की ताकत निर्भय जैसे डकैतों के बराबर आंकी जाती है। उसका निशाना भी अचूक बताया जाता है। यह डकैत मध्यप्रदेश के चित्रकूट से सटे एक गांव में आग लगा कई लोगों को मारने के बाद चर्चा में आया।

चंबल में घिरा कुख्यात राजकुमार गैंग

मध्यप्रदेश के अटेर(भिंड)थाना क्षेत्र में चंबल नहर कनैरा परियोजना पर काम कर रहे प्रोजेक्ट इंजीनियर समेत छह लोगों का अपहरण की खबर से बीहड़ में खलबली मच गई है। दस्यु राजकुमार पकड़ों के साथ चंबल के बीहड़ में घिर गया है। चंबल रेंज के डीआईजी और आगरा रेंज के डीआईजी के बीच वार्ता हुई। इसके बाद रेंज स्कीम लागू कर बदमाश गिरोह की धरपकड़ शुरू कर दी है। बाह, जैतपुर, चित्राहाट, खेड़ा राठौर, बासौनी की पुलिस ने बीहड़ को घेर लिया है। अपहृत लोगों में शरद झवर (इंदौर), अभिमन्यु त्रिपाठी(गोरखपुर, सुरेश माहेश्वरी(भिंड),ड्राइवर सलील खान (भिंड), गनमैन संतोष पचौरी(कनेरा), मैकेनिक दिलीप ओझा शामिल हैं।
सिमराई गांव का है कुख्यात राजकुमार
चंबल के बीहड़ में एक नई ताकत के रूप में उभरा राजकुमार मूलरूप से उत्तरप्रदेश की बाह तहसील के खेड़ा राठौर थाने के सिमरई गांव का रहने वाला है। उसने चंबल के बीहड़ में मध्यप्रदेश के क्षेत्र में अपराध कर इस दुनिया में कदम रखा। राजकुमार का छह सदस्यीय गैंग मध्यप्रदेश में वारदात कर उत्तरप्रदेश के जंगलों में छिपता रहा है। उसके एक साथ छह लोगों का अपहरण कर यूपी, एमपी पुलिस को खुली चुनौती दी है।

शनिवार, 20 जून 2009

बीहड़ एनडी टीवी पर

बीहड़ ब्लाग एनडी टीवी पर आ गया है. मात्र डेढ़ माह के सफर में इस ब्लाग को जिस तरह से पसंद किया गया है उससे मेरा उत्साह बढ़ा है.बीहड़ पर रवीस कुमार जी ने एक स्टोरी बनाई जो कि 19 तारीख को 9 बजे के बुलेटिन में चलाई गई. इसे 20 तारीख को रिपीट किया गया. इसमें मेरे ब्लॉग के ऊपर 20-20 सेकेंड के 3 वीओअनकट हैं. इसमें मेरी बाइट हैं. अभी यह यूट्यूब पर नहीं आया है। आते ही इसे में ब्लॉग पर डाउनलोड करूंगा. अभी मैं अपनी व्यवस्तताओ के कारण ब्लॉग को अधिक समय नहीं दे पा रहा हूं.

गुरुवार, 18 जून 2009

डकैत घनश्याम मारा गया







50 घंटे तक 400 जवानों से चित्रकूट के एक गांव में जूझता रहा डकैत घनश्याम केवट आखिरकार मारा गया। पुलिस का घेरा तोड़कर भागने का प्रयास करता घनश्याम आखिर पुलिस की गोलियों का शिकार बन गया। मरने से पहले घनश्याम ने पुलिस को जो घाव दिए हैं उसे शायद भूलाया नहीं जा सकता। इस मुठभेड़ में char जवान शहीद हो गए जबकि कई उच्चाधिकारी भी घायल हुए हैं। घनश्याम केवट ने बहुत जल्दी ही बीहड़ में अपनी ताकत बढ़ा ली थी। उसके पास फायर ताकत बहुत थी। हैंडग्रेनेट से लेकर अत्याधुनिक हथियरों से उसने पुलिस पर हमले किए।

सोमवार, 1 जून 2009

चंबल में गिरी बस, 34 की मौत

धौलपुर से मुरैना के बीच चलने वाली एक मिनी बस के चंबल के पुल से गिर जाने से उसमें सवार 34 लोगों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में आठ धौलपुर और बाकी मुरैना जिले के हैं। मारे गए लोगों में अभी 17 की शिनाख्त हो पाई है। राजस्थान सरकार और मुरैना जिला प्रशासन ने मारे गए लोगों के परिजनों को 50-50 रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। धौलपुर से मुरैना जा रही यह बस धौलपुर से पांच किलोमीटर दूर चंबल नदी पुल की रेलिंग तोड़ते हुए पथरीली जमीन पर जा गिरी। इससे बस के परखच्चे उड़ गए।