मंगलवार, 21 जून 2011

उम्मीद जगाती एक नदी का रुदन



प्लांट के लिए चंबल से डाली जा रही पाइपलाइन



चंबल में कैटफिश






खूंखार, खौफनाक, खतरनाक.. .. .. ऐसे विशेषण जुड़े हैं उससे। रोंगटे खड़ी कर देने वाली घटनाओं की गवाह उसकी छाती ने सदियों से बहुत सहा, लेकिन आज वह जो सह रही है उसका रुदन सुनने वाला कोई नहीं। पूरे देश की नदियां जहां पानी की कमी और प्रदूषण की मार से जूझ रही हैं ऐसे संकट के समय में भी चंबल नदी उम्मीद जगा रही है। उम्मीद लुप्त हो चुके जलचरों के बचे रहने की। उम्मीद साफ पानी के बहाव की और उम्मीद अपने बचे रहने की।
इंदौर के पास विंध्य की पहाड़ियों में मऊ स्थान से निकलकर उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली यह नदी राजस्थान, मध्यप्रदेश की सीमा में 900 किलोमीटर बहने के बाद इटावा के पास यमुना को जीवन देती है। जीवन इसलिए कि दिल्ली से चलकर इटावा तक पहुंचते-पहुंचते यमुना अपनी शक्ति खो चुकी होती है। चंबल की धार के दम पर ही यमुना इलाहाबाद तक अपना सफर तय करती है। ऐसे समय जब देश की तमाम नदियां प्रदूषण की मार से अधमरी हुई जा रही हैं, चंबल की गिनती आज भी देश की सबसे कम प्रदूषण वाली नदियों में होती है। वेदों में चर्मणी, चर्मरा, चर्मावती नाम की यह नदी आज ऐसे जलचरों का आवास बनी है जिन्हें विलुप्त श्रेणी के ए वर्ग में दर्ज किया गया है। ए यानी ऐसा वर्ग जिस पर खतरा सबसे अधिक है। कई जलचर तो ऐसे है जो सिर्फ इसी नदी में पाए जाते हैं। आठ प्रजाति के कछुआ ढोंगेंका, टेटोरिया, ट्राइनेस, लेसीमान पंटाटा, चित्रा एंडका और इंडेजर, ओट्टर के साथ ही एलिगेटर की दो प्रजाति वाले घड़ियाल, मगर और गंगा डाल्फिन का चंबल स्थायी आवास बन चुकी है। इसके साथ ही ब्लैक बेलिएड टर्नस, सारस, क्रेन, स्ट्रॉक पक्षी इन नदी में कलरव करते हैं। स्कीमर पक्षी तो सिर्फ चंबल में ही पाया जाता है।
960 किलोमीटर तक अविरल धार वाली इस नदी का इतिहास कम वैभवशाली नहीं रहा है। पांचाल राज्य की दक्षिणी सीमा बनाने वाली इस नदी क्षेत्र के एक बड़े भूभाग में शकुनि का राज्य रहा। इसका नाम चर्मावती होने के पीछे कथा है कि वैदिक काल में राजा रंतिदेव ने यहां अग्निहोत्र यज्ञ कर इतने जानवरों की बलि दी कि इस नदी के किनारे चमड़े से भर गए। इन कारण इस नदी का नाम चर्मणी हुआ। तमिल भाषाओं में चंबल का अर्थ मछली भी है। इस नदी में कैटफिश करोड़ों की संख्या में आज भी मिलती हैं। पांचाल राज्य की द्रोपदी ने भी इस नदी का पानी पिया और उसकी पहल पर ही राजा द्रुपद ने पहली बार इस नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल कर इसके किनारों को अपवित्र करने को निषेध कर दिया।
देश की सबसे साफ नदियों में दर्ज इस नदी का आज सबसे अधिक शोषण हो रहा है। इन नदी के सौ किलोमीटर क्षेत्र में पहले से ही गांधी सागर, राणा प्रताप, जवाहर सागर और कोटा बैराज बांध मौजूद होने के बाद अब इसके पानी से भरतपुर और धौलपुर की प्यास बुझाने की तैयारी की जा रही है। जनता की प्यास बुझाने में किसी को शायद ही कोई गुरेज हो लेकिन यह काम चंबल के पानी को लिफ्ट कर किया जाना है। 137 करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना से धौलपुर के 69 और भरतपुर के 930 गांवों को पानी दिया जाएगा। धौलपुर के लिए 25.6 मिलियन लीटर और भरतपुर को 220 मिलियन लीटर पानी चंबल से उठाया जाएगा। यही चिंता का विषय है क्योंकि गर्मी के दिनों में चंबल पानी की कमी से जूझती है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के डायरेक्टर पीआर सिन्हा का कहना है कि इन जलचरों के जिंदा रहने के लिए चंबल में हर हाल में 10 मीटर पानी रहना जरूरी है। आज हालत यह हैं कि कोटा से लेकर धौलपुर के बीच कई स्थानों पर ग्रामीण चंबल को पैदल ही पार कर जाते हैं। ऐसे में राजस्थान सरकार की चंबल से पानी उठाने की योजना चंबल के सांस लेने पर सवाल खड़े कर रही है।

5 टिप्‍पणियां:

satyendra ने कहा…

अच्छा लिखा है आपने. कोशिश तो ये होनी चाहिए कि पीने के पानी के लिए अलग श्रोत विकसित किये जाएँ, भले ही वो नदी से जुड़े हों.. लेकिन नदी को रिचार्ज किये बगैर सिर्फ पानी खीचने से तो दिक्कत आएगी ही. वही गति होगी जो अन्य नदियों की हो गई है...

Uday Prakash ने कहा…

Bhind-Moraina ke paas Chambal ko mai varshon se dekhataa aa rahaa hoon...har saal soolhatee hui...aapki chintaa waajib hai...

Tushar Tiwari ने कहा…

1982 में मुरैना में एसएफ़आई के राज्य सम्मेलन के दौरान चन्द दिन रहने का अवसर मिला था. तब से लेकर आज तक दिलचस्पी बनी हुई है बीहड़ के लिए, आपका लेख मेरी क्षुधा को बढाने वाला साबित हुआ. धन्यवाद..

yogesh ने कहा…

मेरी तो सिर्फ चिंता है कुछ करने का न तो साहस बन पाता है न साधन जिन्हें करना है उन्हें अपनी नालियों की फिक्र है नदियों को कौन पूछे।

pawan karan ने कहा…

chambal nadi hee nahin is ilake kee achchi buri pahchan bhee hai kya uska is kadar shoshan jayaj hai magar dheere dheere hamari ve nadiyan jo hamara parichay hain hamare hathon isi tarah marne ja rahin hain