शुक्रवार, 24 जून 2016

बीहड़ पर किताब लिखने के रुपरेखा मैने लगभग दस साल पहले तय की थी। मूर्खता में मैने अपने ब्लाग पर इसकी रुपरेखा भी डाल दी। अब देख रहा हूं जैसा कि एक महीने में मुझसे तीन लोग संपर्क कर चुके हैं सभी इस रुपरेखा पर ही किताब लिखने की तैयारी कर रहे हैं। मैं सोच रहा हूं क्यों न मैं अपना कार्यक्रम स्थगित ही कर दूं। भाई लोग हैं तो लिखने के लिए। किसी ने भी लिखा जानकारी तो लोगों तक पहुेच ही जाएंगी। मैं ही लिखूं ये जरूरी तो नहीं

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

आपने जो तय किया है, उस पर अवश्य अमल करें। साहित्य चोरी करने वालों की कोई कमी नहीं। ऐसे ही किसी के संपर्क कर लेने भर से कोई किताब नहीं लिख पाएगा। यह जान लें कि किसी किताब के लेखन में पूरा जीवन चला जाता है। आप जो मेहनत कर चुके हैं, कर रहे हैं, वह आपका अनुभव बन चुका है। वह अनुभव कोई भी लेखक कहां से लाएगा।

आप रूपरेखा में तब्दीली लाएं लेकिन किताब लिखने के महत्वपूर्ण कार्य से खुद को अलग न करें।

आप जिस स्तर पर ब्लॉग लिख रहे हैं, उसे देख कर लगता है कि आप किताब बेहतर लिख पाएंगे। उठाएं कलम, शुरू हो जाएं।
- विवेक अग्रवाल, मुंबई