जगन गुर्जर मारा गया, अजमेर जेल में गला घोंटकर हत्या
जगन गुर्जर मारा गया......कब....सोमवार 29 मई को.....कहां अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में.....कैसे.....इसका उत्तर आपको विचलित कर सकता है। उदास भी कर सकता है। कभी तीन राज्यों की पुलिस को हिला देने वाला, धौलपुर राजघराने को धमकी देने वाला, दस्यु सम्राट जगन गुर्जर को मामूली से अपराधी विष्णु ने तौलिये से गला घोंटकर मार डाला। कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल में ही उससे हाथापाई हुई। यह वारदात सोमवार 29 मई को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच हुई।
जगन गुर्जर कोई मामूली अपराधी नहीं था। वह राजस्थान के धौलपुर जिले का रहने वाले था। उसके खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में लगभग 100 मामले दर्ज थे। वह 2008 में तब चर्चा में आया जब उसने धौलपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का घर उड़ाने की धमकी दी थी। बाद में 2009 में उसने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने सरेंडर कर दिया था। जून 2019 में, गुर्जर को दो महिलाओं के साथ मारपीट करने और उनके कपड़े फाड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. गुर्जर को पकड़ने के ऑपरेशन में लगभग 500 पुलिसकर्मी शामिल थे। 11 लाख रुपए के इनामी रहे पूर्व दस्यु जगन गुर्जर का राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा में आतंक फैला हुआ था।
अजमेर के SP हर्षवर्धन ने बताया, "शुरुआती जांच से पता चला है कि जेल के अंदर किसी मामूली बात पर दोनों के बीच हाथापाई हुई, जिसके बाद जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई. आरोपी विष्णु, गुर्जर के साथ ही सेल में रह रहा था."
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया कि जगन गुर्जर और आरोपी कैदी विष्णु दोनों एक ही बैरक (सेल) में बंद थे. जेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के हवाले से उन्होंने बताया सुबह 11 बजे की रिकॉर्डिंग में यह साफ आया है कि दोनों कैदी मिलकर बैरक की साफ-सफाई कर रहे थे. सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच जब कैदियों को लॉक किया जाता है, उस दौरान वे साथ में लूडो भी खेल रहे थे. इसके बाद दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ, यह अभी गहन जांच का विषय है.
जेल के अधिकारी ने बताया, "उन्हें सुबह 11 बजे सेल में बंद किया गया था और जब दोपहर 3 बजे एक गार्ड सेल में गया, तो उसने उसे मृत पाया. शव पर चोट का कोई बाहरी निशान नहीं था." उन्होंने बताया कि विष्णु पिछले तीन साल से हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद था, जबकि जगन गुर्जर को इस साल मार्च में इस जेल में ट्रांसफर किया गया था.
एसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान विष्णु ने तौलिए से जगन गुर्जर का गला घोंटने की बात कबूल की. उन्होंने कहा कि मामले की आगे जांच की जाएगी.
चाय देने पहुंचे संतरी के सामने आरोपी ने खुद कुबूला जुर्म
जेल प्रशासन को इस वारदात की भनक दोपहर 3 बजे लगी. रोजाना के नियम के अनुसार, जब जेल का संतरी दोपहर 3 बजे बैरक खोलने और चाय के समय कैदियों को जगाने के लिए पहुंचा, तो उसने देखा कि जगन गुर्जर अपने बिस्तर से नहीं उठा.
गमछे से घोंटा गला, शरीर पर चोट के निशान नहीं
संतरी ने जब बैरक में ही मौजूद दूसरे कैदी विष्णु से कड़क लहजे में पूछा कि "जगन क्यों नहीं उठ रहा है?", तो विष्णु ने बिना किसी डर के ठंडे दिमाग से खुद अपना जुर्म कुबूल कर लिया. विष्णु ने संतरी से सीधे कहा, "मैंने यह काम कर दिया है." इसके तुरंत बाद जेल में सायरन बजाया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया.
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया कि जगन गुर्जर और आरोपी कैदी विष्णु दोनों एक ही बैरक (सेल) में बंद थे. जेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के हवाले से उन्होंने बताया सुबह 11 बजे की रिकॉर्डिंग में यह साफ आया है कि दोनों कैदी मिलकर बैरक की साफ-सफाई कर रहे थे. सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच जब कैदियों को लॉक किया जाता है, उस दौरान वे साथ में लूडो भी खेल रहे थे. इसके बाद दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ, यह अभी गहन जांच का विषय है.
जेल के अधिकारी ने बताया, "उन्हें सुबह 11 बजे सेल में बंद किया गया था और जब दोपहर 3 बजे एक गार्ड सेल में गया, तो उसने उसे मृत पाया. शव पर चोट का कोई बाहरी निशान नहीं था." उन्होंने बताया कि विष्णु पिछले तीन साल से हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद था, जबकि जगन गुर्जर को इस साल मार्च में इस जेल में ट्रांसफर किया गया था.
एसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान विष्णु ने तौलिए से जगन गुर्जर का गला घोंटने की बात कबूल की. उन्होंने कहा कि मामले की आगे जांच की जाएगी.
चाय देने पहुंचे संतरी के सामने आरोपी ने खुद कुबूला जुर्म
जेल प्रशासन को इस वारदात की भनक दोपहर 3 बजे लगी. रोजाना के नियम के अनुसार, जब जेल का संतरी दोपहर 3 बजे बैरक खोलने और चाय के समय कैदियों को जगाने के लिए पहुंचा, तो उसने देखा कि जगन गुर्जर अपने बिस्तर से नहीं उठा.
गमछे से घोंटा गला, शरीर पर चोट के निशान नहीं
संतरी ने जब बैरक में ही मौजूद दूसरे कैदी विष्णु से कड़क लहजे में पूछा कि "जगन क्यों नहीं उठ रहा है?", तो विष्णु ने बिना किसी डर के ठंडे दिमाग से खुद अपना जुर्म कुबूल कर लिया. विष्णु ने संतरी से सीधे कहा, "मैंने यह काम कर दिया है." इसके तुरंत बाद जेल में सायरन बजाया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया.
सचिन पायलट के कहने पर आत्मसमर्पण
कभी दूसरों को डराने वाला जगन गुर्जर अब खुद डर के साए में अजमेर जेल में था। कुख्यात डकैत जगन गुर्जर राजस्थान का खूंखार अपराधी रहा है। साल 2022 में बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को भी अशोभनीय भाषा बोलकर जान से मारने की धमकी दी थी।
उसके बाद पुलिस के दबाव को देखते हुए जगन गुर्जर ने 7 फरवरी 2022 की देर शाम को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। जगन के उत्पात को देखकर उसे अजमेर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। डकैत जगन गुर्जर ने अपनी गैंग के साथ करीब सात साल तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में जमकर आतंक मचाया था।
हत्या, अपहरण और लूट को लेकर तीनों राज्यों में जगन गुर्जर का खौफ कायम हो गया था। डकैत जगन ने वर्ष 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने पहली बार आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद जमानत पर जेल से बाहर आ गया था और दोबारा अपना आतंक फैलाना शुरू कर दिया।
28 मई 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान जगन गुर्जर ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद इस पर 11 लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया। पुलिस से घबरा कर जगन गुर्जर ने 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
हत्या, अपहरण और लूट को लेकर तीनों राज्यों में जगन गुर्जर का खौफ कायम हो गया था। डकैत जगन ने वर्ष 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने पहली बार आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद जमानत पर जेल से बाहर आ गया था और दोबारा अपना आतंक फैलाना शुरू कर दिया।
28 मई 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान जगन गुर्जर ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद इस पर 11 लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया। पुलिस से घबरा कर जगन गुर्जर ने 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव में राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
विधायक को दी थी जान से मारने की धमकी
वर्ष 2022 में बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक गिर्राज मलिंगा को धमकी देने के बाद जगन गुर्जर फिर से सुर्खियों में आ गया है और पुलिस ने जगन पर 50 हजार रूपये का इनाम घोषित कर दिया। पुलिस के दबाव को देखते हुए जगन गुर्जर ने 7 फरवरी 2022 की देर शाम को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
करीब 20 वर्ष से धौलपुर जिले के डांग और चंबल के बीहड़ों में अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ 125 संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। जगन गुर्जर राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में भी संगीन वारदातों को अंजाम दे चुका था।
करीब 20 वर्ष से धौलपुर जिले के डांग और चंबल के बीहड़ों में अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ 125 संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। जगन गुर्जर राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में भी संगीन वारदातों को अंजाम दे चुका था।
तीन राज्यों की पुलिस हो गई थी फेल
खास बात ये है कि डकैत जगन गुर्जर को कभी 3 प्रदेशों की पुलिस पकड़ नहीं पाई। हर बार उसने खुद ही सरेंडर किया है। डकैत जगन ने वर्ष 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने समर्पण किया। उसके बाद 31 जनवरी 2009 को कैमरी गांव के जगन्नाथ मेला में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के सामने समर्पण किया।
19 अगस्त 2018 को तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष समर्पण किया। 28 जून 2019 को धौलपुर एसपी के समक्ष समर्पण किया और 5 सितंबर 2021 को भी समर्पण किया। इसके बाद 7 फरवरी 2022 को करौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
चंबल के बीहड़ सदियों से बागी, बजरी, बंदूक और बदमाशों के नाम से कुख्यात रहे हैं। चम्बल के बीहड़ो पर डकैतों के लिए यह भी कहा जाता हैं कि "एक मरे दो जावे,जाको वंश डूब ना पावे"वाली कहावत चरितार्थ होती हैं। सदियों से चंबल के बीहड़ को डकैतों की शरण स्थली माना जाता रहा है। चंबल के बीहड़ो में डकैतों की बंदूक कभी भी खामोश नहीं रही।
जिले की एक खूबसूरत महिला भी डकैत जगन की गैंग में शामिल हुई थी। यह महिला थी कौमेश गुर्जर, जो बदले की आग में डकैत बन गई। धौलपुर जिले के नगर गांव के रहने वाले सरपंच छीतरिया गुर्जर के यहां 1986 में कौमेश का जन्म हुआ था। अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए 14 वर्ष की उम्र में ही कोमेश ने बंदूक थाम ली थी।
कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहती थी, और बदले की आग में कोमेश गुर्जर चम्बल के बीहड़ों में कूद गई। बीहड़ो में कौमेश की मुलाक़ात डकैत जगन गुर्जर से हुई। कौमेश जगन गुर्जर को बचपन से जानती थी, क्योकि जगन कौमेश के घर पर आता-जाता रहता था और कौमेश जगन से प्यार करती थी।
बीहड़ में जाने के बाद खूबसूरत महिला दस्यु सुंदरी बन गई। डकैत जगन ने कोमेश को उसके पिता छीतरिया की हत्या का बदला लेने में मदद की थी और इसके बाद कौमेश ने पलट कर नहीं देखा।
वर्ष 2000 के आस-पास की बात है, जब कौमेश गर्भवती हुई और प्रसव के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो कौमेश को अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई। लेकिन डकैत जगन और उसके गिरोह के साथी अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकते थे। इसके बाद कौमेश अकेले ही ऊंटों पर जंगलो से निकल कर हिंडौन सिटी पहुंच गई।
कौमेश को रास्ते भर जंगलो में जगन के लोगों और उसके रिश्तेदारों से मदद मिलती रही। कौमेश ने हिंडौन के नर्सिंग होम में पहले बच्चे को जन्म दिया। नर्सिंग होम से कुछ दिन बाद दस्यु सुंदरी कौमेश को डकैत जगन और उसके साथियों के सहयोग से ऊंटों पर बैठ बच्चे के साथ दोबारा बीहड़ों में पहुंच गई। साल 2008 में कौमेश बीहड़ो में दोबारा गर्भवती हुई और पुलिस ने गैंग को घेर लिया।
पुलिस की मुठभेड़ में एक गोली कौमेश को लग गई और घायल होने पर कौमेश को पुलिस ने पकड़ लिया। कौमेश के गोली लगने के बाद इलाज के दौरान पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। जेल से छूटने के बाद कौमेश ने एक बेटी को भी जन्म दिया। वर्ष 2014 की बात हैं कि कौमेश पुराने मामलों में डकैत जगन के साथ भरतपुर की जेल में बंद थी। तब कौमेश के छोटे भाई रामू की हत्या कर दी थी।
कौमेश को अपने भाई की हत्या का काफी दुख हुआ। जेल से बाहर आने के बाद कौमेश ने अपने भाई रामू की हत्या का बदला लेने के लिए अपने रिश्तेदार जंडेल गुर्जर के साथ मिलकर 21 अप्रैल 2020 को संजीत कोली की बाड़ी उप खंड के तिलुआ का अड्डा गांव में उसके घर में घुसकर उसके सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। कौमेश पर दो ह्त्या समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।
पूर्व दस्यु सुंदरी कौमेश को पुलिस जब जब धौलपुर कोर्ट में पेशी पर लाती थी तो उसे देखने के लिए कोर्ट में लोगो की भीड़ लग जाती थी। कौमेश वर्तमान में अपने बच्चो के साथ गांव में जीवन व्यतीत कर रही है।
चंबल के बीहड़ सदियों से बागी, बजरी, बंदूक और बदमाशों के नाम से कुख्यात रहे हैं। चम्बल के बीहड़ो पर डकैतों के लिए यह भी कहा जाता हैं कि "एक मरे दो जावे,जाको वंश डूब ना पावे"वाली कहावत चरितार्थ होती हैं। सदियों से चंबल के बीहड़ को डकैतों की शरण स्थली माना जाता रहा है। चंबल के बीहड़ो में डकैतों की बंदूक कभी भी खामोश नहीं रही।
महिला डकैत पर आया दिल
कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेना चाहती थी, और बदले की आग में कोमेश गुर्जर चम्बल के बीहड़ों में कूद गई। बीहड़ो में कौमेश की मुलाक़ात डकैत जगन गुर्जर से हुई। कौमेश जगन गुर्जर को बचपन से जानती थी, क्योकि जगन कौमेश के घर पर आता-जाता रहता था और कौमेश जगन से प्यार करती थी।
बीहड़ में जाने के बाद खूबसूरत महिला दस्यु सुंदरी बन गई। डकैत जगन ने कोमेश को उसके पिता छीतरिया की हत्या का बदला लेने में मदद की थी और इसके बाद कौमेश ने पलट कर नहीं देखा।
वर्ष 2000 के आस-पास की बात है, जब कौमेश गर्भवती हुई और प्रसव के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो कौमेश को अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई। लेकिन डकैत जगन और उसके गिरोह के साथी अपनी जान खतरे में नहीं डाल सकते थे। इसके बाद कौमेश अकेले ही ऊंटों पर जंगलो से निकल कर हिंडौन सिटी पहुंच गई।
कौमेश को रास्ते भर जंगलो में जगन के लोगों और उसके रिश्तेदारों से मदद मिलती रही। कौमेश ने हिंडौन के नर्सिंग होम में पहले बच्चे को जन्म दिया। नर्सिंग होम से कुछ दिन बाद दस्यु सुंदरी कौमेश को डकैत जगन और उसके साथियों के सहयोग से ऊंटों पर बैठ बच्चे के साथ दोबारा बीहड़ों में पहुंच गई। साल 2008 में कौमेश बीहड़ो में दोबारा गर्भवती हुई और पुलिस ने गैंग को घेर लिया।
पुलिस की मुठभेड़ में एक गोली कौमेश को लग गई और घायल होने पर कौमेश को पुलिस ने पकड़ लिया। कौमेश के गोली लगने के बाद इलाज के दौरान पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। जेल से छूटने के बाद कौमेश ने एक बेटी को भी जन्म दिया। वर्ष 2014 की बात हैं कि कौमेश पुराने मामलों में डकैत जगन के साथ भरतपुर की जेल में बंद थी। तब कौमेश के छोटे भाई रामू की हत्या कर दी थी।
कौमेश को अपने भाई की हत्या का काफी दुख हुआ। जेल से बाहर आने के बाद कौमेश ने अपने भाई रामू की हत्या का बदला लेने के लिए अपने रिश्तेदार जंडेल गुर्जर के साथ मिलकर 21 अप्रैल 2020 को संजीत कोली की बाड़ी उप खंड के तिलुआ का अड्डा गांव में उसके घर में घुसकर उसके सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। कौमेश पर दो ह्त्या समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं।
पूर्व दस्यु सुंदरी कौमेश को पुलिस जब जब धौलपुर कोर्ट में पेशी पर लाती थी तो उसे देखने के लिए कोर्ट में लोगो की भीड़ लग जाती थी। कौमेश वर्तमान में अपने बच्चो के साथ गांव में जीवन व्यतीत कर रही है।
जगन की हैं तीन पत्नियां
जगन गुर्जर की 3 पत्नियां हैं। जून 2010 में बेटी की शादी में जेल में बंद डकैत जगन को पुलिस प्रोटेक्शन में गांव लाया गया था। बेटी की शादी में डकैत जगन गुर्जर ने अपराध से दूर रहने की कसम खाई थी। करीब 8 साल जेल में रहने के बाद 6 मार्च 2017 को जगन गुर्जर जेल से बाहर आ गया। साल 2017 विधानसभा चुनाव में धौलपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पत्नी ममता को चुनाव में उतारा।
चुनाव में पत्नी हार गई। जगन के उत्पात को देखकर उसे अजमेर जेल शिफ्ट कर दिया गया था। धौलपुर पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर के खिलाफ वर्ष 1994 में साधारण मारपीट का पहला प्रकरण दर्ज हुआ था, उसके बाद उसके खिलाफ कुल 125 आपराधिक मामले दर्ज हुए। फिलहाल जगन गुर्जर मार्च 2026 में थाना कोतवाली बाड़ी के मारपीट के मामले में जेल गया था।
चुनाव में पत्नी हार गई। जगन के उत्पात को देखकर उसे अजमेर जेल शिफ्ट कर दिया गया था। धौलपुर पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर के खिलाफ वर्ष 1994 में साधारण मारपीट का पहला प्रकरण दर्ज हुआ था, उसके बाद उसके खिलाफ कुल 125 आपराधिक मामले दर्ज हुए। फिलहाल जगन गुर्जर मार्च 2026 में थाना कोतवाली बाड़ी के मारपीट के मामले में जेल गया था।


