बसई डांग में आसानी से पानी नहीं मिलता है। कई किलोमीटर तक पानी नहीं है। पानी का साधन या तो चंबल नदी है या फिर इक्का-दुक्का कुआं। इन कुओं में भी गरमी के दिनों में पानी नहीं रहता है। हां बरसात में पानी गड्ढ़ो तक में भरा मिल जाता है। ऐसे हालातों में भी यहां हीरा बाबा मंदिर में एक कुआं ऐसा भी है जहां हाथ से बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया जाता है। मंदिर के बाबा के अनुसार बस गरमियों में दो फुट की रस्सी की जरूरत होती है।
मंगलवार, 22 जुलाई 2008
एक कुआं ऐसा भी
बसई डांग में आसानी से पानी नहीं मिलता है। कई किलोमीटर तक पानी नहीं है। पानी का साधन या तो चंबल नदी है या फिर इक्का-दुक्का कुआं। इन कुओं में भी गरमी के दिनों में पानी नहीं रहता है। हां बरसात में पानी गड्ढ़ो तक में भरा मिल जाता है। ऐसे हालातों में भी यहां हीरा बाबा मंदिर में एक कुआं ऐसा भी है जहां हाथ से बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया जाता है। मंदिर के बाबा के अनुसार बस गरमियों में दो फुट की रस्सी की जरूरत होती है।
खत्म हुआ जेजे का गैंग
जगजीवन परिहार उर्फ जेजे गैंग अब पूरी तरह से खुर्द-बुर्द हो गया है। ग्वालियर पुलिस ने सोमवार यानी 21 जुलाई की रात मुठभेड़ में मारे जा चुके दस्यु सरगना जगजीवन परिहार के दो साथियों को पकड़ लिया। यह दोनों वेश बदलकर यूपी की रोडवेज बस से ग्वालियर आ रहे थे। दोनों डकैत 25-25 हजार के इनामी हैं। मुरैना के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि पकड़े गए दस्यु जिलेदार सिंह और लोकेंद्र सिंह निवासी मेहचंदपुर थाना सरायछोला जिला मुरैना हैं। बताया गया कि दोनों डकैत पिछले काफी दिनों से दिल्ली जाकर रहने लगे थे।
फिरौती के मंदिर

बीहड़ के बाहर बने मंदिर और धर्मशालाएं फिरौती लेने के स्थान के रूप में कुख्यात हैं। अपह्त व्यक्ति को भी इन्हीं मंदिरों में सरगना अपने संरक्षण में लेता है। फिरौती की बातचीत भी इन्हीं मंदिरों में होती है। राजस्थान के बसई डांग के बीहड़ में दूधाधारी का मंदिर, हीरा बाबा का मंदिर और गेंदा बाबा की धर्मशाला ऐसे ही स्थान हैं।
रविवार, 20 जुलाई 2008
बीहड़ में कौन कहां

राजस्थान के धौलपुर का बीहड़। गैंगों के लिए सुरक्षित किले की तरह है। धौलपुर के बाड़ी रोड़ पर बसई डांग थाने की सीमा के साथ ही शुरु होता है डकैतों का इलाका। इसी इलाके में डेरा डाले हुए हैं वे डकैत जिनके खौफ से इस समय दहशत है।--कौन कहां-राजस्थान के धौलपुर, मध्यप्रदेश के मुरैना और उत्तरप्रदेश के आगरा जिलों से सटे चंबल के बीहड़ों में इन दिनों चार दस्यु गिरोह सक्रिय हैं। दिलचस्प यह है कि चारों ही गुर्जर हैं और इन सभी ने बीहड़ में अपने इलाके बांटे अपना इलाका घोषित कर रखा है।बसई डांग-धौलपुर जिले के इस इलाके में रामसकल और कमल गुर्जर और राजेंद्र का गिरोह सक्रिय है। मासलपुर-रामसकल गुर्जर गैंग का नया ठिकाना इस इलाके में बना है। कमल से मनमुटाव के बाद उसने यह स्थान चुना है।सरमथुरा-मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से लगने वाले राजस्थान के इस इलाके में जगन गुर्जर का हुकुम चलता है। यहां वह पत्थर खदानों के ठेकेदार से चौथ वसूलता है।यह है कमल गुर्जर का देवपुर गांव में स्थित मकान

बीहड़ में भिड़ गई पुलिस

राजस्थान और यूपी के बॉर्डर पर देखने वालों को एक नया तमाशा देखने मिला। अब तक बीहड़ में डकैत गिरोहों को आपस में लड़ते सुना होगा लेकिन यहां तो पुलिस ही आपस में उलझ गई। राजस्थान और यूपी के बीहड़ में डकैत कमल गुर्जर को ढूंढने गई पुलिस को कमल तो नहीं मिला अलबत्ता राजस्थान पुलिस जरूर मिल गई वह भी एसएसपी के साथ। उत्तरप्रदेश के आगरा के एसएसपी रघुवीर लाल को देख राजस्थान पुलिस की भौंहे तन गईं। होना तो यह चाहिए था कि दोनों दल गरमजोशी से मिलते लेकिन राजस्थान के एसएसपी कुछ ज्यादा ही गरम हो गए। यूपी के पुलिस बल के साथ गाली गलौज पर उतर आए। अगर यूपी का दल समझ से काम नहीं लेता तो कुछ भी हो सकता। शायद पुलिस यह मामला भी दबा जाती लेकिन पुलिस दल के साथ गए कैमरामैन ने कैमरे की आंख खोल दी और सब कुछ कैद हो गया। आपकी नजर को पेश है एक तस्वीर.....। इसके साथ ही दूसरी तसवीर के कमल गुर्जर के गांव देवपुरा में स्थित उसके घर की।
शनिवार, 19 जुलाई 2008
बुद्धा की धमकी.. तो गांव कर देगा बरबाद
उत्तरप्रदेश के औरैया जिले के गांव कैथोली के लोग इन दिनों बहुत भयभीत है। डर का कारण है डकैत बुद्धा का एक फरमान। इस फरमान में बुद्धा ने अपने साथी और अब जेल में बंद बिजली के खिलाफ किसी भी तरह का बयान देने पर पूरे गांव को बर्बाद करने की धमकी दी है। बुद्धा डाकू जगजीवन परिहार का साथी है और उसके बचे गिरोह का मुखिया है। बिजली कभी उसी का साथी था। कैथोली वही गांव है जहां से 2006 की शुरुआत में 10 लोगों का जगजीवन गिरोह ने अपहरण कर लिया था और बाद में 100 ब्राह्मणों का कत्ल करने का ऐलान किया था। कैथोली के लोगों से उसकी दुशमनी तभी से है। बुद्धा का धमकी का असर यह है कि अब लोग गांव से पलायन कर रहे हैं और पुलिस है कि बस शेखी मार रही है।
बुधवार, 16 जुलाई 2008
अब बैंडिट टूरिज्म

राजस्थान की सरकार में बैठे कुछ ज्ञानियों की चली तो जल्द ही बीहड़ डरने की नहीं देखने और सैर सपाटे की जगह होगी। अकेली राजस्थान सरकार ही क्यों मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सरकार भी इससे लगभग सहमत ही है। मसला यह है कि राजस्थान सरकार ने चंबल के बीहड़ो में टूरिज्म को बढ़ावा देने की पूरी रुपरेखा भी तैयार कर ली है। इस योजना के तहत पर्यटकों को उन स्थानों पर घूमाया जाएगा जहां कभी डकैत रहा करते थे या फिर जिन जगहों पर मशहूर मुठभेड़ हुई या कोई डकैत मारा गया। इसके साथ ही बीहड़ में डकैत किस तरह रहते हैं और उनकी दिनचर्या क्या रहती है यह भी बताया जाएगा। इस सबके लिए गाइड का काम करेंगे आत्मसमर्पण कर चुके डकैत। इन डकैतों को इसके लिए तैयार भी किया जा रहा है। राजस्थान डांग एरिया डवलपमेंट बोर्ड के चैयरमेन का कहना है कि करौली, भरतपुर, धौलपुर, कोटा के बीहड़ों में इसके लिए काम शुरू भी कर दिया गया है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकार से भी इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। इनकी सहमति मिलते ही तीनों सरकारें सम्मिलित तौर पर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगी। यानी अब बीहड़ से सीधा पैसा बनाया जाएगा। भइया इस तरह तो सरकार मेरे ब्लॉग के पीछे पड़ गई है। जब वही यह काम करेगी तो हम क्या करेंगे।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)