बसई डांग में आसानी से पानी नहीं मिलता है। कई किलोमीटर तक पानी नहीं है। पानी का साधन या तो चंबल नदी है या फिर इक्का-दुक्का कुआं। इन कुओं में भी गरमी के दिनों में पानी नहीं रहता है। हां बरसात में पानी गड्ढ़ो तक में भरा मिल जाता है। ऐसे हालातों में भी यहां हीरा बाबा मंदिर में एक कुआं ऐसा भी है जहां हाथ से बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया जाता है। मंदिर के बाबा के अनुसार बस गरमियों में दो फुट की रस्सी की जरूरत होती है।
बीहड़ संसाधन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बीहड़ संसाधन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 22 जुलाई 2008
एक कुआं ऐसा भी
बसई डांग में आसानी से पानी नहीं मिलता है। कई किलोमीटर तक पानी नहीं है। पानी का साधन या तो चंबल नदी है या फिर इक्का-दुक्का कुआं। इन कुओं में भी गरमी के दिनों में पानी नहीं रहता है। हां बरसात में पानी गड्ढ़ो तक में भरा मिल जाता है। ऐसे हालातों में भी यहां हीरा बाबा मंदिर में एक कुआं ऐसा भी है जहां हाथ से बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया जाता है। मंदिर के बाबा के अनुसार बस गरमियों में दो फुट की रस्सी की जरूरत होती है।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)