बीहड़ की दुनिया में आपका स्वागत है। नए सनसनी और संघर्ष की जानकारी

बीहड़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बीहड़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 16 जनवरी 2010

सब कुछ शांत नहीं बीहड़ में

बीहड़ ऊपर से भले ही शांत दिखाई दे रहा हो लेकिन यहां सब कुछ शांत नहीं है। तमाम बड़े डकैतों के मारे जाने के बाद भी अभी उनके हथियार और साथी सुरक्षित हैं। यह सही है कि अभी इन साथियों ने अपनी गतिविधियों को शांत कर रखा है लेकिन इसे बड़ी तैयारी भी माना जा रहा है। आगरा, धौलपुर और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में आतंक का पर्याय रामविशेष गुर्जर, जगन गुर्जर के साथी संगठित हो रहे हैं तो चित्रकुट में भी रागिया, केवट गैग के बचे साथियों ने संगठित होना शुरू कर दिया है। इटावा और औरैया का बीहड़ अभी कुछ शांत है।

बुधवार, 4 नवंबर 2009

बीहड़ में घुसा बाजार

बीहड़ में अपहरण का उद्योग और फूलन के बाद डकैती को ग्लेमर का बाना पहनते हम देख चुके हैं। अब शहर से लेकर गांव और देहात तक अपनी जड़ जमा चुका बाजार काररूक बीहड़ की तरफ घूम गया है। मुरैना और उसके आसपास बीहड़ की जमीन को निजी और बहुराष्ठीय कंपनी को देने के बाद अब उत्तरप्रदेश सरकार ने भी कानपुर देहात और उसके आसपास की यमुना के बीहड़ की जमीन पर फूलों की खेती कराने की योजना तैयार की है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि सरकार बीहड़ के उत्थान का यह पम काम किसके जरिए और किस तरह कराएगी। अगर सरकार इस काम में नरेगा की तरह गांव की सीधी भागेदारी करा उनके आर्थिक विकास का रास्ता तैयार करती है तब तो यह ठीक हैऔर अगर वह मध्यप्रदेश की सरकार की तर्ज पर चल कर इसे निजी कंपनियों के हवाले करती है तो यह बीहड़ में एक नये तरह के संघर्ष को जन्म दे सकती है। आखिर बीहड़ के अक्खड़, आक्रामक और विद्रोही तेवर ने उसका जो व्यक्तिवत बनाया है वह इसे कैसे बर्दाश्त करेगा कि कोई उसकी जमीन से लाभ कमाए और वह देखता रहे।

मंगलवार, 30 जून 2009

राजकुमार गैंग का सदस्य पकड़ा

भिंड की अटेर कनेरा परियोजना से छह लोगों का सामूहिक अपहरण करने वाले राजनारायण और राजकुमार गैंग के सदस्य को मुरैना पुलिस ने मंगलवार को देवगढ़ से गिरफ्तार कर लिया।मुरैना पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह के अनुसार भिंड से 21 जून को छह लोगों का अपहरण करने वाले गैंग के दो सदस्य अपने एक साथी के साथ मुरैना में कोई वारदात करने की फिराक में थे। थाना देवगढ़ की टीम ने घेराबंदी कर गैंग के सदस्य रामप्रसाद सिकरवार को नंदपुरा में दबोच लिया। उसके साथी लला भदौरिया और प्रेम शर्मा भागने में सफल रहे।

रविवार, 28 जून 2009

बीहड़ टूरिज्म हमारे साथ

बीहड़ के बारे में मन में बैठ चुके डर को दूर करने के लिए यह मेरा प्रोफेशनल प्रयास है। वह जो बीहड़ को नजदीक से देखना चाहते हैं। उसमें घूमना चाहते हैं। पुराने बागियों से मुलाकात की इच्छा रखते हैं और बीहड़ के एडवेंचर को जीने की इच्छा है। वह मुझसे मोबाइल नंबर 9456073566 पर संपर्क कर सकते हैं।

आखिर कहां है पंजाब गुर्जर

मध्यप्रदेश का एक लाख का ईनामी डकैत पंजाब गुर्जर पुलिस के हत्थे नहीं आ रहा है। पुलिस का अनुमान है कि पंजाब ने बीहड़ छोड़ दिया है और वह आगरा में छुपकर जीवन बिता रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस ने उसे ढूंढ निकालने के लिए कुछ टीम गठित की हैं। पुलिस को पक्का यकीन है कि पंजाब इन दिनों आगरा में कहीं काम धंधा कर रहा है। इससे पहले पंजाब को पकड़ने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने फीरोजाबाद में छापा मारा था। पुलिस को सूचना थी कि पंजाब चूड़ी फैक्ट्री में काम कर रहा है। पुलिस के आने से पहले ही पंजाब पत्नी सहित निकल भागा था।

मंगलवार, 23 जून 2009

सुरक्षाकर्मी ही निकला अपहरण कांड का विभीषण

गिरोह से मुक्त हुए अपहृत
भिंड जिले के अटेर में चल रही कनेरा परियोजना में जिस सुरक्षाकर्मी को हिफाजत के लिए रखा गया था वहीं अपहरण कराने का सूत्रधार निकला। पुलिस से घिरा डकैत राजकुमार अपहृत प्रोजेक्ट मैनेजर शरद झावर, अभिमन्यु त्रिपाठी दिलीप ओझा, सलीम और संतोष पचौरी को छोड़कर भाग निकला। एक अन्य अपहृत सुरेश माहेश्वरी को डकैतों ने भागने के लिए मजबूर किया। सूचना है कि इससे उनकी मौत हो गई। सुरेश पचौरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह ने इन अपहृतों की रिहाई के लिए एक करोड़ की फिरौती मांगी थी जो घटकर दस लाख तक आ गई। इससे पहले ही पुलिस के दबाव में गिरोह भाग निकला।
नंगे पैर घंटों दौड़ाया
अपहृतों के साथ राजकुमार गैंग ने दरिंदगी का व्यवहार किया। उनके जूते उतरवा लिए। कंटीली झाड़ियों और बीहड़ के ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर नंगे दौड़ाया गया। इससे शरद झावर की हालत तो बेहद खराब हो गई। सुरेश के पैर में राड पड़ी थी इससे वह भाग नहीं सके। भूख प्यास से बुरा हाल था। उनके साथी कुछ समय तक उन्हें साथ लेकर भागते रहे लेकिन कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
राजकुमार का दादा भी था डकैत

सिमरई गांव में राजकुमार का घर

राजकुमार और उसका भाई राजनारायण का दादा भी अपने जमाने में डकैत रहा था। रामसनेही के यह दोनों पुत्र भिंड जिले के गोरमी थाना क्षेत्र के स्वेच्छापुर गांव के रहने वाले थे। सिमरई गांव में अब उनका घर खंडहर हो चुका है। उनके दादा रामलाल का साठ के दशक में चंबल के बीहड़ों में आतंक था। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि रामलाल ने 40 साल पहले अकेले ही तीन दिन तक राजस्थान पुलिस से लोहा लिया था। राजकुमार और राजनारायण ने 2007 में गोरमी थाने के स्वेच्छापुर गांव में भारत भूषण उर्फ सेठी की हत्या की थी। दो साल में दोनों भाइयों ने मध्यप्रदेश के पावुई, अटेर, गोरमी, महुआ थाना क्षेत्र में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देकर आतंक मचा दिया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश पुलिस ने दोनों पर 15-15 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया है। फिलहाल गैंग में दस सदस्य हैं। राजकुमार हमेशा वर्दी में रहता है। उसके सदस्य उसे फौजी कहकर बुलाते हैं।

सोमवार, 22 जून 2009

अपहृत छोड़कर भाग गया राजकुमार

पुलिस के बढ़ते दबाव से राजकुमार गैंग अटेर से अपहृत किए लोगों में से एक को छोड़ बाकी सभी को खेरा राठौर के जंगल में छोड़कर भाग गया है। समझा जाता है कि ऐसा उसने पुलिस पर पीछा न करने का दबाव बनाने के लिए किया है। गौरतलब है कि राजकुमार गैंग के पीछे मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश ने अपनी पूरी ताकत झौंक रखी है।

बीहड़ का दशकों का सपना पंचनद बांध

प्रोजेक्ट का खाका (क्लिक करके बड़ा करें)
पंचनद बांध बीहड के सपनों में शामिल है। सपना जो सत्ताधारी यहां की जनता को बीते तीन दशकों के दिखा रहे हैं. पंचनद मध्यप्रदेश के भिंड और उत्तरप्रदेश के इटावा, जालौन, औरैया जिले की सीमा पर यमुना और उसकी सहायक नदियों चंबल, क्वारी, पहुंच और सिंध का मिलन स्थल है। इस जगह पर ही वह प्रसिद्ध मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि तुलसीदास ने यहां प्रवास किया हो। आज तो यह स्थल बीहड़ में अपराध और गरीबी के बीच सांसे ले रही जनता और उपजाऊ होने के बाद भी बेकार पड़ी बीहड़ की जमीन को एक नई जिंदगी दे सकता है। इस बांध पर सबसे पहली योजना1986 में बनी थी। यहां बांध बनाने की बात इंदिरा गांधी ने कही थी। तब बनाई गई योजना के प्रस्ताव को संक्षिप्त रूप में जस का तस यहां दे रहा हूं। अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड, मऊरानीपुर एसपी शुक्ला ने बनाया था।

पंचनद बांध योजना के तहत उत्तरप्रदेश के औरैया जनपद में यमुना नदी पर औरैया घाट से 16 किमी अपस्ट्रीम में सढरापुर गांव में बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इस स्थल के अपस्ट्रीम में चंबल, क्वारी, सिंध और पहुंज नदियां मिलती हैं। इस परियोजना से सिंचाई के साथ-साथ विद्युत उत्पादन भी होगा। दिनांक 29.6.81 को श्री जीके मिश्रा, प्रमुख अभियंता सिंचाई विभाग उप्र की अध्यक्षता में मुख्य अभियंता कंसलटैंसी कमीटी द्वारा केंद्रीय जल आयोग के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में यह निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित पंचनद बांध के डाउन स्ट्रीम में कम से कम 3000 क्सूसेक के डिस्चार्ज अवश्य छोड़ा जाना चाहिए। न्यूनतम 3000 क्यूसेक की क्षमता का जल विद्युत स्टेशन प्रस्तावित किया जाए। इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न प्रस्तावों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं-
डैम,बैराज-
कुल 764 मी. लंबे बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें 12 मी. के 41 अदद बे होंगे। कुल 40 अदद पीयरों में से 34 अदद पीयर की मोटाई 5 मी. होगी एवं 6 अदद पीयर मी मोटाई 17 मी. होगी। इन्हीं 6 अदद पीयरों में पावर यूनिट लगाए जाएंगे। इनमें प्रत्येक की क्षमता 15 मेगावाट होगी। बैराज के दोनों और गाइड बांध और एफ्लक्स बांध का प्रस्ताव है। बैराज में केस्ट की ऊंचाई 4 मी. एवं 21 मी. ऊंटे ट्रेनर गेट होंगे। इसकी जीवंत क्षमता 3578 मिलियन घमी (2.9 मिलियन एकड़ फुट) होगी। इसमें 1 जनवरी से 30 जून तक के इनफ्लो की गणना में शामिल नहीं किया गया है। 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक के इनफ्लो से 2677 मिलियन घमी. सिंचाई के लिए प्रयुक्त होगा और 8581 मिलियन घमी. पावर यूनिटों के रास्ते नीचे छोड़ा जाएगा। शेष मानसून रन आफ के रूप में 10121 मिलियन घमी. जल बैराज बे से इस्केप किया जाएगा।
पावर हाउस
छह अदद पीयर टाइप पावर यूनिटों का प्रावधान है। इसमें प्रत्येक की क्षमता 15 मेगा वाट होगी। इस प्रकार जनित 90 मेगावाट से कुल 410 मिलियन यूनिट विद्युत पैदा होगी जिसमें से 157 मिलियन यूनिट बाएं और दाएं तट पर प्रस्तावित फीडरों में पानी छोड़ने में प्रयुक्त होगी एवं शेष 253 मिलियन यूनिट कामर्शियल उद्देश्य के लिए प्रयुक्त होगी।
लिफ्ट फीडर कैनाल
जलाशय के दोनों तट पर एक-एक लिफ्ट फीडर कैनाल का प्रावधान किया गया है। कुल 7150 क्यूसेक जल को पंप किया जाएगा। इसमें से 6150 क्यूसेक बाएं फीडर में डाला जाएगा और 1000 क्यूसेक दाहिने फीडर में डाला जाएगा।
बायां फीडर- इसकी लंबाई 72 किमी. होगी। इसमें भोगनीपुर, इटावा और कानपुर में निचली गंगा नहर प्रणाली एवं पश्चिम इलाहाबाद शाखा को पोषित किया जाएगा।
दायां फीडर- इसकी लंबाई 5.40 किमी होगी जिससे बेतवा नहर प्रणाली के कुठोंद शाखा को पोषित किया जाएगा।
पंचनद बांध परियोजना से लाभ-इस परियोजना से 4.42 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी जिससे बाएं तट पर निचली गंगा नहर प्रणाली के कमांड में सिंचाई की तीव्रता 70 फीसदी से बढ़कर 102.4 फीसदी होगी। दाएं तट पर बेतवा नहर प्रणाली के कुठोंद शाखा के कमांड में सिंचाई की तीव्रता 65 से बढ़कर 85.8 हो जाएगी। इससे 8880 लाख रूपये (वर्ष 1982 की दरों पर आधारित) का अतिरिक्त वार्षिक खाद्यान्न की पैदावार होगी।इस योजना से सिंचाई के अलावा 410 मिलियन यूनिट की बिजली प्रति वर्ष पैदा होगी। इसमें से 157 मिलियन यूनिट दोनों तटों पर प्रस्तावित फीडरों में जल डालने में व्यय होगा एवं शेष 258 मिलियन यूनिट कामर्शियल उद्देश्य के लिए उपलब्ध होगा।
परियोजना की लागत
वर्ष 1982 की दरों पर आधारित परियोजना की कुल लागत 55934.49 लाख रुपये आगणित की गई थी। इसमें से सिंचाई सेक्टर की लागत 43308.40 लाख रुपये थी एवं पावर सेक्टर की लागत 12626.09 लाख रुपये आगणित की गई थी। परियोजना की फिजीबिल्टी रिपोर्ट तैयार की गई थी। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का कार्य फरवरी 2008 से सिंचाई निर्माण खंड मऊरानीपुर द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 1982 से अब तक परियोजना की लागत तीन गुने से भी अधिक होने की आशा है।

रविवार, 21 जून 2009

एकजुट हो रहे शंकर और उमर के साथी

चित्रकुट और बांदा के जंगलों में घनश्याम केवट के मारे जाने के बाद डकैत गिरोहों ने नई रणनीति बनाकर इसका बदला लेने की तैयारी की जा रही है। पचास-पचास हजार के ईनामी शंकर और उमर केवट के मारे जाने के बाद उनके बचे साथी अब एकजुट होकर अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हैं। पुलिस अब तक यहां ददुआ, शंकर, उमर, लवकुश केवट, बच्चा केवट, रामराज केवट, बीस हजार के ईनामी बूंदी पासी का सफाया कर चुकी है। अब उमर गैंग का सदस्य रहा फतेहपुर जिले के किशनपुर थाना क्षेत्र के डडियां गैंग के कल्लू केवट ने नए गैंग की कमान संभाली है। इस गैंग में मो.शाहिद, होरीलाल, रमेश केवट और रामपाल केवट हैं। इस गैंग के पास दस्यु उमर, रामराज और लवकुश केवट गैंग के दर्जनों हथियार भी हैं। वहीं शंकर गैंग की कमान किशनपुर थाना क्षेत्र के ही मडैडयन गांव के रामफल केवट ने संभाली है। इस गैंग में बुज्जन केवट, मोती केवट, होरीलाल, राममिलन केवट हैं। इन गैंगों ने अपना ठिकाना धाता, किशनपुर, खखरेरू व असोथर क्षेत्र को बनाया है।

अभी जिंदा है सुंदर पटेल

घनश्याम केवट को मारने के बाद उत्तरप्रदेश के बीहड़ को डाकुओं से खाली कराने का दावा कर रही प्रदेश पुलिस क्या सुंदर पटेल को भूल रही है। सुंदर पटेल की ताकत से पुलिस वाकिफ है। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में आतंका का पर्याय इस डकैत पर डेढ़ लाख का ईनाम है। इसमें एक लाख मध्यप्रदेश सरकार ने और 50 हजार उत्तरप्रदेश सरकार ने घोषित किया है। सुंदर पटेल उर्फ रागिया की ताकत निर्भय जैसे डकैतों के बराबर आंकी जाती है। उसका निशाना भी अचूक बताया जाता है। यह डकैत मध्यप्रदेश के चित्रकूट से सटे एक गांव में आग लगा कई लोगों को मारने के बाद चर्चा में आया।

चंबल में घिरा कुख्यात राजकुमार गैंग

मध्यप्रदेश के अटेर(भिंड)थाना क्षेत्र में चंबल नहर कनैरा परियोजना पर काम कर रहे प्रोजेक्ट इंजीनियर समेत छह लोगों का अपहरण की खबर से बीहड़ में खलबली मच गई है। दस्यु राजकुमार पकड़ों के साथ चंबल के बीहड़ में घिर गया है। चंबल रेंज के डीआईजी और आगरा रेंज के डीआईजी के बीच वार्ता हुई। इसके बाद रेंज स्कीम लागू कर बदमाश गिरोह की धरपकड़ शुरू कर दी है। बाह, जैतपुर, चित्राहाट, खेड़ा राठौर, बासौनी की पुलिस ने बीहड़ को घेर लिया है। अपहृत लोगों में शरद झवर (इंदौर), अभिमन्यु त्रिपाठी(गोरखपुर, सुरेश माहेश्वरी(भिंड),ड्राइवर सलील खान (भिंड), गनमैन संतोष पचौरी(कनेरा), मैकेनिक दिलीप ओझा शामिल हैं।
सिमराई गांव का है कुख्यात राजकुमार
चंबल के बीहड़ में एक नई ताकत के रूप में उभरा राजकुमार मूलरूप से उत्तरप्रदेश की बाह तहसील के खेड़ा राठौर थाने के सिमरई गांव का रहने वाला है। उसने चंबल के बीहड़ में मध्यप्रदेश के क्षेत्र में अपराध कर इस दुनिया में कदम रखा। राजकुमार का छह सदस्यीय गैंग मध्यप्रदेश में वारदात कर उत्तरप्रदेश के जंगलों में छिपता रहा है। उसके एक साथ छह लोगों का अपहरण कर यूपी, एमपी पुलिस को खुली चुनौती दी है।

सोमवार, 1 जून 2009

चंबल में गिरी बस, 34 की मौत

धौलपुर से मुरैना के बीच चलने वाली एक मिनी बस के चंबल के पुल से गिर जाने से उसमें सवार 34 लोगों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में आठ धौलपुर और बाकी मुरैना जिले के हैं। मारे गए लोगों में अभी 17 की शिनाख्त हो पाई है। राजस्थान सरकार और मुरैना जिला प्रशासन ने मारे गए लोगों के परिजनों को 50-50 रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। धौलपुर से मुरैना जा रही यह बस धौलपुर से पांच किलोमीटर दूर चंबल नदी पुल की रेलिंग तोड़ते हुए पथरीली जमीन पर जा गिरी। इससे बस के परखच्चे उड़ गए।

मंगलवार, 31 मार्च 2009

अवैध खनन को दस्यु दलों में फायरिंग

यूपी और राजस्थान के बार्डर पर राजाखेड़ा के गढ़ी टिडावली और समौना घाट पर बालू के अवैध कारोबार को लेकर दस्यु चंदना और रामनिवास उर्फ मुंडा में सोमवार को सुबह तड़के जमकर गोलियां चली। फायरिंग की सूचना पर राजाखेड़ा पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।चंबल के बीहड में राजस्थान बार्डर के गढ़ी टिडावली और समौना घाट से सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंद के बाद भी बालू का अवैध खनन होता है। इसके एवज में डकैत रंगदारी वसूल करते हैं। तीन साल पहले इसी जगह से जगजीवन परिहार ने आठ लोगों का सामूहिक अपहरण कर सनसनी फैला दी थी। बताया जाता है िक चंदना गिरोह यहां से प्रति टोली 200 रुपये की रंगदारी वसूलता है। राम निवास में इस रायल्टी में अपना हिस्सा मांगना शुरु कर दिया है। इसी बात पर दोनों में फायरिंग हो गई।

सोमवार, 9 मार्च 2009

मुठभेड़ में तीन इनामी डकैत ढेर

मुरैना पुलिस ने क्वारी नदी के बीहड़ में रविवार मध्य रात्रि हुई मुठभेड़ में तीन इनामी डकैतों को मार गिराया। देवगढ़ थाना क्षेत्र के दत्त मंदिर के पास हुई मुठभेड़ में मार गए डकैतों की पहचान लक्ष्मण सिंह गुर्जर निवासी गांव गंगोली थाना डांगबसई धौलपुर(राजस्थान), रामवरन गुर्जर निवासी मठमलपुरा थना सरमथुरा(राजस्थान) और जितेंद्र त्यागी निकाय थाना जौरा (मध्यप्रदेश) के रूप में हुई है। इस सभी पर पांच-पांच हजार का इनाम घोषित था।

शनिवार, 7 मार्च 2009

मारा गया भान सिंह

औरैया और इटावा के बीहड़ों में सक्रिय मान सिंह गुर्जर गैंग को बीजलपुर गांव के पास औरैया पुलिस ने मार गिराया। एसपी नचिकेता झा के नेतृत्व में टीम ने रात्रि में घेराबंदी कर दस्यु को मार गिराया।

मंगलवार, 3 मार्च 2009

ग्वालियर में दो ईनामी डकैत ढेर

ग्वालियर चंबल संभाग में पुलिस ने दो ईनामी डकैतों को मार गिराया। दोनों डकैत हरी सिंह और मोहन सिंह रावत पर दस-दस हजार का ईनाम था। हरी सिहं गुर्जर को पुलिस ने शिवपुरी जिले के जंगल में मार गिराया। इस गैंग से दो अपह्रत भी मुक्त कराए गए हैं। दोनों मुक्त महुआखेड़ा घाटी गांव के रहने वाले हैं। डकैत मोहन सिंह रावत को तीन साथियों के साथ थरेट की चीना चौकी के पास पुलिस ने घेर लिया। गोलीबारी में मोहन सिंह मारा गया। उसके साथी भाग निकले।

सोमवार, 2 मार्च 2009

दस्यु जगन के गिरोह की कमान पप्पू गुर्जर के हाथ

आत्मसमर्पण कर चुके जगन गुर्जर के गैंग की कमान अब उसके भाई पप्पू गुर्जर के हाथ आ गई है। उसने जगन गिरोह के बचे साथियों को एकजुट कर गैंग खड़ा कर लिया है। डांग इलाके में एक स्थान पर पप्पू ने बंदूक का पूजन किया। इसके पास एके-47 जैसे घातक हथियार हैं। इससे गिरोह अभी भी ताकतवर बना हुआ है। इस गिरोह में पप्पू के साथ उसके भाई पान सिंह, लाल सिंह भी शामिल हैं।

शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

गुर्जर गैंगों की धमक

चंबल के बीहड़ों में इन दिनों गुर्जर गैंगों का ही सिक्का चल रहा है। मध्यप्रदेश के मुरैना,भिंड,शिवपुरी से लेकर उत्तरप्रदेश के औरैया, इटावा और आगरा तक इसी जाति के गैंगों का आतंक है। मध्यप्रदेश में पंजाब गुर्जर और उसके पार्ट गिरोह राजेंद्र उर्फ गट्टा का आतंक है। यह गिरोह हाल ही में फोरेस्ट आफीसर, उसके बेटे और गनर के बदले 50 लाख की फिरौती मांगने के कारण चर्चा में आया है। आगरा में राजेंद्र और जगन के बचे गैंग का आतंक है। वहीं औरैया, इटावा और जालौन भान सिंह गुर्जर, तहसीलदार गुर्जर के नाम से कांप रहे हैं। पुलिस को अगर बीहड़ की जनता की सलामती चाहिए तो इन पर लगाम लगाए वैसे बीहड़ की जनता ने इनके बीच रहते हुए जीना सीख लिया है।

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009

बीहड़ में नई बादशाहत

राजेंद्र गुर्जर। जगन गुर्जर के आत्मसमर्पण के बाद यही नाम बीहड़ में तेजी से गूंज रहा है। मध्यप्रदेश के मुरैना से लेकर आगरा और राजस्थान के धौलपुर तक गैंग की चहलकदमी जारी है। हाल ही में मुरैना से एक व्यवसायी राठी के अपहरण के बाद यह गैंग तेजी से चर्चा में आया है। शहरों से बड़े आसामियों की पकड़ के लिए इस गैंग ने अपने कैरियर्स छोड़ रखे हैं। यह लोग बच्चों को अपना अधिक निशाना बना रहे हैं। पुलिस अभी इस गैंग को हलके में ही ले रही है।

सोमवार, 9 फ़रवरी 2009

बीहड़ में फिर शुरू धमाचौकड़ी

औरैया और इटावा के आसपास रज्जन गैंग फिर सक्रिय
भानसिंह और तहसीलदार सिंह ने संभाली बागडोर
बीहड़ कभी शांत नहीं होता। यह फिर एक बार साबित हुआ है। दिलेर एसएसपी दलजीत चौधरी की अगुवाई में लगभग दो साल पहले बीहड़ में मौजूद चंदन यादव, रज्जन, सलीम, निर्भय गैंग का सफाया और नीलम और श्याम सहित अन्य के समर्पण के बाद माना जा रहा था कि अब लंबे समय तक बीहड़ शांत रहेगा। इस बात को अभी दो साल भी नहीं बीते हैं कि रज्जन गैंग के बचे खुचे साथियों ने भान सिंह और तहसीलदार के नेतृत्व में एकजुट होकर फिर से बीहड़ में दहशत काम कर दी है। हाल ही में औरैया के पास इस गैंग ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इन लोगों पर रज्जन की मुखबिरी करने का शक था। भान सिंह और तहसीलदार सिंह के हाथों यादव अधिक प्रताडित किए जा रहे हैं। ऐसे में चर्चा तो यहां तक है कि चंदन यादव गैंग के बचे साथी भी एकजुट हो रहे हैं। इसके लिए हाल ही में औरैया और इटावा से सटे बीहड़ में कुछ यादव बदमाशों की पंचायत भी बुलाई गई। इसमें इस बात पर सहमति भी बनी है कि गुर्जर गैंगों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।