शनिवार, 28 फ़रवरी 2009
गुर्जर गैंगों की धमक
चंबल के बीहड़ों में इन दिनों गुर्जर गैंगों का ही सिक्का चल रहा है। मध्यप्रदेश के मुरैना,भिंड,शिवपुरी से लेकर उत्तरप्रदेश के औरैया, इटावा और आगरा तक इसी जाति के गैंगों का आतंक है। मध्यप्रदेश में पंजाब गुर्जर और उसके पार्ट गिरोह राजेंद्र उर्फ गट्टा का आतंक है। यह गिरोह हाल ही में फोरेस्ट आफीसर, उसके बेटे और गनर के बदले 50 लाख की फिरौती मांगने के कारण चर्चा में आया है। आगरा में राजेंद्र और जगन के बचे गैंग का आतंक है। वहीं औरैया, इटावा और जालौन भान सिंह गुर्जर, तहसीलदार गुर्जर के नाम से कांप रहे हैं। पुलिस को अगर बीहड़ की जनता की सलामती चाहिए तो इन पर लगाम लगाए वैसे बीहड़ की जनता ने इनके बीच रहते हुए जीना सीख लिया है।
बुधवार, 25 फ़रवरी 2009
हिंदुस्तान में आया बीहड़
शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009
बीहड़ में नई बादशाहत
राजेंद्र गुर्जर। जगन गुर्जर के आत्मसमर्पण के बाद यही नाम बीहड़ में तेजी से गूंज रहा है। मध्यप्रदेश के मुरैना से लेकर आगरा और राजस्थान के धौलपुर तक गैंग की चहलकदमी जारी है। हाल ही में मुरैना से एक व्यवसायी राठी के अपहरण के बाद यह गैंग तेजी से चर्चा में आया है। शहरों से बड़े आसामियों की पकड़ के लिए इस गैंग ने अपने कैरियर्स छोड़ रखे हैं। यह लोग बच्चों को अपना अधिक निशाना बना रहे हैं। पुलिस अभी इस गैंग को हलके में ही ले रही है।
सोमवार, 9 फ़रवरी 2009
बीहड़ में फिर शुरू धमाचौकड़ी
औरैया और इटावा के आसपास रज्जन गैंग फिर सक्रिय
भानसिंह और तहसीलदार सिंह ने संभाली बागडोर
बीहड़ कभी शांत नहीं होता। यह फिर एक बार साबित हुआ है। दिलेर एसएसपी दलजीत चौधरी की अगुवाई में लगभग दो साल पहले बीहड़ में मौजूद चंदन यादव, रज्जन, सलीम, निर्भय गैंग का सफाया और नीलम और श्याम सहित अन्य के समर्पण के बाद माना जा रहा था कि अब लंबे समय तक बीहड़ शांत रहेगा। इस बात को अभी दो साल भी नहीं बीते हैं कि रज्जन गैंग के बचे खुचे साथियों ने भान सिंह और तहसीलदार के नेतृत्व में एकजुट होकर फिर से बीहड़ में दहशत काम कर दी है। हाल ही में औरैया के पास इस गैंग ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इन लोगों पर रज्जन की मुखबिरी करने का शक था। भान सिंह और तहसीलदार सिंह के हाथों यादव अधिक प्रताडित किए जा रहे हैं। ऐसे में चर्चा तो यहां तक है कि चंदन यादव गैंग के बचे साथी भी एकजुट हो रहे हैं। इसके लिए हाल ही में औरैया और इटावा से सटे बीहड़ में कुछ यादव बदमाशों की पंचायत भी बुलाई गई। इसमें इस बात पर सहमति भी बनी है कि गुर्जर गैंगों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।
भानसिंह और तहसीलदार सिंह ने संभाली बागडोर
बीहड़ कभी शांत नहीं होता। यह फिर एक बार साबित हुआ है। दिलेर एसएसपी दलजीत चौधरी की अगुवाई में लगभग दो साल पहले बीहड़ में मौजूद चंदन यादव, रज्जन, सलीम, निर्भय गैंग का सफाया और नीलम और श्याम सहित अन्य के समर्पण के बाद माना जा रहा था कि अब लंबे समय तक बीहड़ शांत रहेगा। इस बात को अभी दो साल भी नहीं बीते हैं कि रज्जन गैंग के बचे खुचे साथियों ने भान सिंह और तहसीलदार के नेतृत्व में एकजुट होकर फिर से बीहड़ में दहशत काम कर दी है। हाल ही में औरैया के पास इस गैंग ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इन लोगों पर रज्जन की मुखबिरी करने का शक था। भान सिंह और तहसीलदार सिंह के हाथों यादव अधिक प्रताडित किए जा रहे हैं। ऐसे में चर्चा तो यहां तक है कि चंदन यादव गैंग के बचे साथी भी एकजुट हो रहे हैं। इसके लिए हाल ही में औरैया और इटावा से सटे बीहड़ में कुछ यादव बदमाशों की पंचायत भी बुलाई गई। इसमें इस बात पर सहमति भी बनी है कि गुर्जर गैंगों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।
शनिवार, 31 जनवरी 2009
जगन ने डाल दिए हथियार
11 लाख के ईनामी बदमाश जगन गुर्जर भी आखिर प्यार के आगे हार ही गया। साथी दस्यु कौमेश की गिरफ्तारी के बाद टूटे जगन ने आखिरकार बसंत पंचमी यानी 31 जनवरी को आत्मसमर्पण कर ही दिया। जगन ने करौली जिले के निकटवर्ती गांव कैमरी में स्थित जगदीश मंदिर परिसर में बसंत मेला के दौरान दौसा सांसद सचिन पायलट के सामने शाम 4बजकर 30 मिनट पर सरेंडर कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। जगन गुर्जर के खिलाफ राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश में 72 मुकदमें दर्ज हैं। इनमें से दो दर्जन हत्या के हैं। जगन का बीहड़ी जीवनजगन का बीहड़ों में प्रवेश 1994 में हुआ। इसके बाद उसके चार भाई भी गैंग में शामिल हो गए। वर्तमान में उसके गैंग में 25 सदस्य हैं। जगन गुर्जर अकेला ही 315 वोर की रायफल और 10 जिंदा कारतूस की पेटी लटकाकर मेला स्थल आया। यहां पुलिस अधिकारियों के प्रतिनिधि के रुप में मौजूद करौली के अपर पुलिस अधीक्षर ने उससे हथियार लेकर हिरासत में ले लिया। इस मौके पर उसने कहा कि अब वह सामाजिक जीवन जीना चाहता है। उसने स्वीकारा कि उत्तरप्रदेश की पुलिस के लोगों के उसकी मिलीभगत थी और यहीं से उसे हथियार और कारतूस मिलते थे। जगन ने कुछ शर्ते भी रखी हैं लेकिन इसके विषय में अधिकारी अभी कुछ नहीं बता रहे हैं।
शुक्रवार, 30 जनवरी 2009
सरेंडर चाहता है जगन
मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश की सीमा की दहशत और 11 लाख का ईनामी डकैत जगन गुर्जर अब थकने लगा है। वह सरेंडर चाहता है। मैं पहले ही इस बात की संभावना व्यक्त कर चुका हूं। असल में लगातार पकड़े जा रहे गिरोह के साथी और दस्यु प्रेमिका कौमेश की गिरफ्तारी के बाद जगन बेहद कमजोर हो गया है। इससे वह सरेंडर चाहता है। सूचना है कि वह करौली के किसी टीवी जर्नलिस्ट की मार्फत समर्पण का प्रस्ताव भी दे रहा है। उसकी शर्त सिर्फ इतनी है कि समर्पण के बाद उसे ज्यादा परेशान न किया जाए। हालांकि पुलिस अभी इसके लिए तैयार नहीं है और वह कमजोर पड़ते जगन को मुठभेड़ में गिरफ्तार करना चाहती है। जगन राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी देने और गुर्जर आंदोलन के दौरान चर्चा में आया था।
शनिवार, 27 दिसंबर 2008
धीरे-धीरे घिर रहा है जगन
बीहड़ और खासकर राजस्थान के लिए सिरदर्द जगन गुर्जर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। बीते दिनों जिस तरह उसके साथी पकड़े गए हैं उससे लगता है कि इस दस्यु का सूचना तंत्र कमजोर हुआ है साथ ही पुलिस की चौकसी इस गैंग को लेकर तेज हुई है। यह अलग बात है कि पुलिस को इस गैंग के खिलाफ कोई बड़ी सफलता नही है हालांकि पुलिस जगन की साथी दस्यु सुंदरी कौमेश को पकड़ने में कामयाब हुई है। यह भी सच है कि जगन इस बीच कोई बड़ी हलचल भी नहीं कर सका है।
चुनाव के बाद फिर बढ़ी हलचल
मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही एक बार फिर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र में अपहरण की वारदात बढ़ने लगी हैं। बीते 15 दिन में अकेले आगरा से ही तीन लोगों का अपहरण हो चुका है। इसमें दो व्यवसायी है। पुलिस इनमें से एक का भी पता नहीं लगा सकी है। यही नहीं अब यह साफ हो गया है कि दस्यु गैंग ने शहरों में अपने केरियर्स फैला रखे हैं। यह छोटे बदमाश बहुत कम रकम के लिए पकड़ कर गैंग तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कई मामलों में तो अब अपह्रत को बीहड़ में पहुंचाने की बजाए शहर के ही किसी इलाके में रख दिया जाता है। दस्यु दलों की चुप्पी और शहरी इलाकों में बढ़ रही अपराध की घटना एक नए चलन की ओर इशारा तो जरुरी ही करती हैं।
बदली अपराध की पट्टी
जैसे बदलती हैं नदी अपना मार्ग, जैसे बदलती है जलवायु वैसे ही बीहड़ में अपराध की जगह भी समय-समय पर बदलती रही है। बीहड़ को जानने वाले यह जानते हैं कि मध्यप्रदेश के मुरैना से लेकर उत्तरप्रदेश के औरैया और जालौन तक फैले बीहड़ में अपराधियों की हलचल के स्थान बदलते रहे हैं। 1960-70 के दशक तक अपराध की हलचल मुरैना और भिंड के जिलों में अधिक थी। तब इस इलाके में मलखान सिंह, मोहर सिंह,लाखन, माखन,छिद्दा, मास्टर मंशाराम जैसे गैंग थे। 70 के बाद अपराध की यह हलचल यहां से पूर्व की ओर खिसकी और तब अपराध और गैंग की चहलकदमी औरैया, इटावा, कानपुर देहात और जालौन के इलाके में अधिक रही। इसर दौरान, राम सिंह,मान सिंह मल्लाह, फूलन देवी के गैंग इस इलाके में थे। 2000 के बाद अपराध की यह पट्टी फिर पश्चिम की ओर खिसक कर आगरा, धौलपुर और मुरैना जिले में आ गई है। आज इस इलाके में तीन गुर्जर गैंग का आतंक है।
चुनाव के बाद फिर बढ़ी हलचल
मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही एक बार फिर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र में अपहरण की वारदात बढ़ने लगी हैं। बीते 15 दिन में अकेले आगरा से ही तीन लोगों का अपहरण हो चुका है। इसमें दो व्यवसायी है। पुलिस इनमें से एक का भी पता नहीं लगा सकी है। यही नहीं अब यह साफ हो गया है कि दस्यु गैंग ने शहरों में अपने केरियर्स फैला रखे हैं। यह छोटे बदमाश बहुत कम रकम के लिए पकड़ कर गैंग तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कई मामलों में तो अब अपह्रत को बीहड़ में पहुंचाने की बजाए शहर के ही किसी इलाके में रख दिया जाता है। दस्यु दलों की चुप्पी और शहरी इलाकों में बढ़ रही अपराध की घटना एक नए चलन की ओर इशारा तो जरुरी ही करती हैं।
बदली अपराध की पट्टी
जैसे बदलती हैं नदी अपना मार्ग, जैसे बदलती है जलवायु वैसे ही बीहड़ में अपराध की जगह भी समय-समय पर बदलती रही है। बीहड़ को जानने वाले यह जानते हैं कि मध्यप्रदेश के मुरैना से लेकर उत्तरप्रदेश के औरैया और जालौन तक फैले बीहड़ में अपराधियों की हलचल के स्थान बदलते रहे हैं। 1960-70 के दशक तक अपराध की हलचल मुरैना और भिंड के जिलों में अधिक थी। तब इस इलाके में मलखान सिंह, मोहर सिंह,लाखन, माखन,छिद्दा, मास्टर मंशाराम जैसे गैंग थे। 70 के बाद अपराध की यह हलचल यहां से पूर्व की ओर खिसकी और तब अपराध और गैंग की चहलकदमी औरैया, इटावा, कानपुर देहात और जालौन के इलाके में अधिक रही। इसर दौरान, राम सिंह,मान सिंह मल्लाह, फूलन देवी के गैंग इस इलाके में थे। 2000 के बाद अपराध की यह पट्टी फिर पश्चिम की ओर खिसक कर आगरा, धौलपुर और मुरैना जिले में आ गई है। आज इस इलाके में तीन गुर्जर गैंग का आतंक है।
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