बीहड़ की दुनिया में आपका स्वागत है। नए सनसनी और संघर्ष की जानकारी

बुधवार, 4 नवंबर 2009

बीहड़ में घुसा बाजार

बीहड़ में अपहरण का उद्योग और फूलन के बाद डकैती को ग्लेमर का बाना पहनते हम देख चुके हैं। अब शहर से लेकर गांव और देहात तक अपनी जड़ जमा चुका बाजार काररूक बीहड़ की तरफ घूम गया है। मुरैना और उसके आसपास बीहड़ की जमीन को निजी और बहुराष्ठीय कंपनी को देने के बाद अब उत्तरप्रदेश सरकार ने भी कानपुर देहात और उसके आसपास की यमुना के बीहड़ की जमीन पर फूलों की खेती कराने की योजना तैयार की है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि सरकार बीहड़ के उत्थान का यह पम काम किसके जरिए और किस तरह कराएगी। अगर सरकार इस काम में नरेगा की तरह गांव की सीधी भागेदारी करा उनके आर्थिक विकास का रास्ता तैयार करती है तब तो यह ठीक हैऔर अगर वह मध्यप्रदेश की सरकार की तर्ज पर चल कर इसे निजी कंपनियों के हवाले करती है तो यह बीहड़ में एक नये तरह के संघर्ष को जन्म दे सकती है। आखिर बीहड़ के अक्खड़, आक्रामक और विद्रोही तेवर ने उसका जो व्यक्तिवत बनाया है वह इसे कैसे बर्दाश्त करेगा कि कोई उसकी जमीन से लाभ कमाए और वह देखता रहे।

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

शिवपुरी जिले में डकैत गड़रिया गिरोह

मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में डकैत गड़रिया गिरोह के खात्में के बाद गुर्जर डकैत गैंग की चहलकदमी बढ़ गई है। पुलिस थानों में डाकुओं के मुकाबले को आधुनिक हथियार एके-47, इनसास और एसएलआर तो हैं लेकिन उन्हें चलाने वाले हाथों की बेहद कमी है। इससे कम क्षमता वाले हथियारों से लैस डकैत पुलिस पर भारी पड़ रहे हैं। इस समय इस जिले में सक्रिय डकैत और उनकी क्षमता कुछ ऐसी है---
गिरोह सदस्य हथियार
रामविशेष गुर्जर 10 306 बोर बंदूक
रामविलास गुर्जर 08 315 बोर बंदूक
लाल सिंह गुर्जर 08 315 बोर बंदूक
उत्तम गड़रिया 10 315 बोर बंदूक
राजेंद्र गुर्जर 05 315 बोर बंदूक

मंगलवार, 30 जून 2009

राजकुमार गैंग का सदस्य पकड़ा

भिंड की अटेर कनेरा परियोजना से छह लोगों का सामूहिक अपहरण करने वाले राजनारायण और राजकुमार गैंग के सदस्य को मुरैना पुलिस ने मंगलवार को देवगढ़ से गिरफ्तार कर लिया।मुरैना पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह के अनुसार भिंड से 21 जून को छह लोगों का अपहरण करने वाले गैंग के दो सदस्य अपने एक साथी के साथ मुरैना में कोई वारदात करने की फिराक में थे। थाना देवगढ़ की टीम ने घेराबंदी कर गैंग के सदस्य रामप्रसाद सिकरवार को नंदपुरा में दबोच लिया। उसके साथी लला भदौरिया और प्रेम शर्मा भागने में सफल रहे।

रविवार, 28 जून 2009

बीहड़ टूरिज्म हमारे साथ

बीहड़ के बारे में मन में बैठ चुके डर को दूर करने के लिए यह मेरा प्रोफेशनल प्रयास है। वह जो बीहड़ को नजदीक से देखना चाहते हैं। उसमें घूमना चाहते हैं। पुराने बागियों से मुलाकात की इच्छा रखते हैं और बीहड़ के एडवेंचर को जीने की इच्छा है। वह मुझसे मोबाइल नंबर 9456073566 पर संपर्क कर सकते हैं।

आखिर कहां है पंजाब गुर्जर

मध्यप्रदेश का एक लाख का ईनामी डकैत पंजाब गुर्जर पुलिस के हत्थे नहीं आ रहा है। पुलिस का अनुमान है कि पंजाब ने बीहड़ छोड़ दिया है और वह आगरा में छुपकर जीवन बिता रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस ने उसे ढूंढ निकालने के लिए कुछ टीम गठित की हैं। पुलिस को पक्का यकीन है कि पंजाब इन दिनों आगरा में कहीं काम धंधा कर रहा है। इससे पहले पंजाब को पकड़ने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने फीरोजाबाद में छापा मारा था। पुलिस को सूचना थी कि पंजाब चूड़ी फैक्ट्री में काम कर रहा है। पुलिस के आने से पहले ही पंजाब पत्नी सहित निकल भागा था।

मंगलवार, 23 जून 2009

सुरक्षाकर्मी ही निकला अपहरण कांड का विभीषण

गिरोह से मुक्त हुए अपहृत
भिंड जिले के अटेर में चल रही कनेरा परियोजना में जिस सुरक्षाकर्मी को हिफाजत के लिए रखा गया था वहीं अपहरण कराने का सूत्रधार निकला। पुलिस से घिरा डकैत राजकुमार अपहृत प्रोजेक्ट मैनेजर शरद झावर, अभिमन्यु त्रिपाठी दिलीप ओझा, सलीम और संतोष पचौरी को छोड़कर भाग निकला। एक अन्य अपहृत सुरेश माहेश्वरी को डकैतों ने भागने के लिए मजबूर किया। सूचना है कि इससे उनकी मौत हो गई। सुरेश पचौरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह ने इन अपहृतों की रिहाई के लिए एक करोड़ की फिरौती मांगी थी जो घटकर दस लाख तक आ गई। इससे पहले ही पुलिस के दबाव में गिरोह भाग निकला।
नंगे पैर घंटों दौड़ाया
अपहृतों के साथ राजकुमार गैंग ने दरिंदगी का व्यवहार किया। उनके जूते उतरवा लिए। कंटीली झाड़ियों और बीहड़ के ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर नंगे दौड़ाया गया। इससे शरद झावर की हालत तो बेहद खराब हो गई। सुरेश के पैर में राड पड़ी थी इससे वह भाग नहीं सके। भूख प्यास से बुरा हाल था। उनके साथी कुछ समय तक उन्हें साथ लेकर भागते रहे लेकिन कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
राजकुमार का दादा भी था डकैत

सिमरई गांव में राजकुमार का घर

राजकुमार और उसका भाई राजनारायण का दादा भी अपने जमाने में डकैत रहा था। रामसनेही के यह दोनों पुत्र भिंड जिले के गोरमी थाना क्षेत्र के स्वेच्छापुर गांव के रहने वाले थे। सिमरई गांव में अब उनका घर खंडहर हो चुका है। उनके दादा रामलाल का साठ के दशक में चंबल के बीहड़ों में आतंक था। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि रामलाल ने 40 साल पहले अकेले ही तीन दिन तक राजस्थान पुलिस से लोहा लिया था। राजकुमार और राजनारायण ने 2007 में गोरमी थाने के स्वेच्छापुर गांव में भारत भूषण उर्फ सेठी की हत्या की थी। दो साल में दोनों भाइयों ने मध्यप्रदेश के पावुई, अटेर, गोरमी, महुआ थाना क्षेत्र में ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देकर आतंक मचा दिया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश पुलिस ने दोनों पर 15-15 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया है। फिलहाल गैंग में दस सदस्य हैं। राजकुमार हमेशा वर्दी में रहता है। उसके सदस्य उसे फौजी कहकर बुलाते हैं।

सोमवार, 22 जून 2009

अपहृत छोड़कर भाग गया राजकुमार

पुलिस के बढ़ते दबाव से राजकुमार गैंग अटेर से अपहृत किए लोगों में से एक को छोड़ बाकी सभी को खेरा राठौर के जंगल में छोड़कर भाग गया है। समझा जाता है कि ऐसा उसने पुलिस पर पीछा न करने का दबाव बनाने के लिए किया है। गौरतलब है कि राजकुमार गैंग के पीछे मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश ने अपनी पूरी ताकत झौंक रखी है।