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मंगलवार, 28 जून 2011

नौ सो चूहे खाकर...नया काम अन्ना का साथ देंगी दस्यु सुंदरी सीमा परिहार



पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने ऐलान किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ गांधीवादी नेता अन्ना हजारे की लड़ाई में वह साथ देंगी और 16 अगस्त से जंतर मंतर दिल्ली में प्रस्तावित अनशन में उनके साथ बैठेंगी।

सियासत से तौबा कर चुकी सीमा परिहार ने 'दैनिक जागरण' से विशेष भेंट में कहा कि भ्रष्टाचार समाज के लिए कोढ़ बन चुका है, इसलिए इस मसले पर सियासी दलों को भी वोट बैंक की सियासत करने से बाज आना चाहिए।

लोकपाल विधयेक और इससे संबंधित मसौदे से अनभिज्ञ सीमा परिहार ने कहा कि उसे विधेयक और मसौदे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन वह इतना जानती है कि भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए और ऐसा कानून बनना चाहिए, जिससे भ्रष्टाचारियों को कड़ी सजा मिले। इसके लिए वे गांधीवादी नेता अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव की लड़ाई में वह पूरी तरह साथ हैं। भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति [महिला] की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा ने बताया कि अनशन शुरू होने से पहले वह अन्ना हजारे और बाबा रामदेव से मुलाकात करेंगी।

मंगलवार, 21 जून 2011

उम्मीद जगाती एक नदी का रुदन



प्लांट के लिए चंबल से डाली जा रही पाइपलाइन



चंबल में कैटफिश






खूंखार, खौफनाक, खतरनाक.. .. .. ऐसे विशेषण जुड़े हैं उससे। रोंगटे खड़ी कर देने वाली घटनाओं की गवाह उसकी छाती ने सदियों से बहुत सहा, लेकिन आज वह जो सह रही है उसका रुदन सुनने वाला कोई नहीं। पूरे देश की नदियां जहां पानी की कमी और प्रदूषण की मार से जूझ रही हैं ऐसे संकट के समय में भी चंबल नदी उम्मीद जगा रही है। उम्मीद लुप्त हो चुके जलचरों के बचे रहने की। उम्मीद साफ पानी के बहाव की और उम्मीद अपने बचे रहने की।
इंदौर के पास विंध्य की पहाड़ियों में मऊ स्थान से निकलकर उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली यह नदी राजस्थान, मध्यप्रदेश की सीमा में 900 किलोमीटर बहने के बाद इटावा के पास यमुना को जीवन देती है। जीवन इसलिए कि दिल्ली से चलकर इटावा तक पहुंचते-पहुंचते यमुना अपनी शक्ति खो चुकी होती है। चंबल की धार के दम पर ही यमुना इलाहाबाद तक अपना सफर तय करती है। ऐसे समय जब देश की तमाम नदियां प्रदूषण की मार से अधमरी हुई जा रही हैं, चंबल की गिनती आज भी देश की सबसे कम प्रदूषण वाली नदियों में होती है। वेदों में चर्मणी, चर्मरा, चर्मावती नाम की यह नदी आज ऐसे जलचरों का आवास बनी है जिन्हें विलुप्त श्रेणी के ए वर्ग में दर्ज किया गया है। ए यानी ऐसा वर्ग जिस पर खतरा सबसे अधिक है। कई जलचर तो ऐसे है जो सिर्फ इसी नदी में पाए जाते हैं। आठ प्रजाति के कछुआ ढोंगेंका, टेटोरिया, ट्राइनेस, लेसीमान पंटाटा, चित्रा एंडका और इंडेजर, ओट्टर के साथ ही एलिगेटर की दो प्रजाति वाले घड़ियाल, मगर और गंगा डाल्फिन का चंबल स्थायी आवास बन चुकी है। इसके साथ ही ब्लैक बेलिएड टर्नस, सारस, क्रेन, स्ट्रॉक पक्षी इन नदी में कलरव करते हैं। स्कीमर पक्षी तो सिर्फ चंबल में ही पाया जाता है।
960 किलोमीटर तक अविरल धार वाली इस नदी का इतिहास कम वैभवशाली नहीं रहा है। पांचाल राज्य की दक्षिणी सीमा बनाने वाली इस नदी क्षेत्र के एक बड़े भूभाग में शकुनि का राज्य रहा। इसका नाम चर्मावती होने के पीछे कथा है कि वैदिक काल में राजा रंतिदेव ने यहां अग्निहोत्र यज्ञ कर इतने जानवरों की बलि दी कि इस नदी के किनारे चमड़े से भर गए। इन कारण इस नदी का नाम चर्मणी हुआ। तमिल भाषाओं में चंबल का अर्थ मछली भी है। इस नदी में कैटफिश करोड़ों की संख्या में आज भी मिलती हैं। पांचाल राज्य की द्रोपदी ने भी इस नदी का पानी पिया और उसकी पहल पर ही राजा द्रुपद ने पहली बार इस नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल कर इसके किनारों को अपवित्र करने को निषेध कर दिया।
देश की सबसे साफ नदियों में दर्ज इस नदी का आज सबसे अधिक शोषण हो रहा है। इन नदी के सौ किलोमीटर क्षेत्र में पहले से ही गांधी सागर, राणा प्रताप, जवाहर सागर और कोटा बैराज बांध मौजूद होने के बाद अब इसके पानी से भरतपुर और धौलपुर की प्यास बुझाने की तैयारी की जा रही है। जनता की प्यास बुझाने में किसी को शायद ही कोई गुरेज हो लेकिन यह काम चंबल के पानी को लिफ्ट कर किया जाना है। 137 करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना से धौलपुर के 69 और भरतपुर के 930 गांवों को पानी दिया जाएगा। धौलपुर के लिए 25.6 मिलियन लीटर और भरतपुर को 220 मिलियन लीटर पानी चंबल से उठाया जाएगा। यही चिंता का विषय है क्योंकि गर्मी के दिनों में चंबल पानी की कमी से जूझती है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के डायरेक्टर पीआर सिन्हा का कहना है कि इन जलचरों के जिंदा रहने के लिए चंबल में हर हाल में 10 मीटर पानी रहना जरूरी है। आज हालत यह हैं कि कोटा से लेकर धौलपुर के बीच कई स्थानों पर ग्रामीण चंबल को पैदल ही पार कर जाते हैं। ऐसे में राजस्थान सरकार की चंबल से पानी उठाने की योजना चंबल के सांस लेने पर सवाल खड़े कर रही है।

बुधवार, 25 मई 2011

गर्मी से हार गया बीहड़ हिलाने वाला



सन 60 के दशक में चंबल के बीहड़ों में मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा उत्तरप्रदेश की पुलिस को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले डकैत माखन सिंह सिकरवार (जिन्होंने 1972 में आत्मसमर्पण कर दिया था) की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। पूर्व डकैत माखन सिंह की लाश सिविल लाइन थाना क्षेत्र के शिकारपुर रेलवे फाटक के पास से बरामद की गई है। पुलिस की प्राथमिकी जांच में पूर्व डकैत की मौत अत्यधिक गर्मी तथा प्यास से होना बताया जा रहा है, लेकिन अभी यह रहस्य ही बना हुआ है कि आखिर पूर्व डकैत शिकारपुर रेलवे फाटक के पास किस प्रयोजन से आये थे जबकि इस क्षेत्र में उनका कोई नाते-रिश्तेदार या कोई जान पहचान वाला भी नहीं रहता है।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने बताया कि पूर्व डकैत माखन सिंह सिकरवार, 70 वर्ष, निवासी अजीतपुरा, 21 मई को बाजार की कहकर निकले थे। जब दो तीन दिन तक वो घर वापस नहीं लौटे तो उनके परिजनों ने उन्हें खोजना शुरू किया था। मंगलवार की शाम सिविल लाइन थाना पुलिस को शिकारपुर रेलवे फाटक के पास से एक अज्ञात लाश मिली थी। पुलिस ने पूर्व डकैत माखन सिंह सिकरवार के परिजनों को फोन कर लाश की शिनाख्ती के लिये बुलाया तो उनकी मौत का खुलासा हुआ। लाश ज्यादा पुरानी नहीं है, संभवत: मौत मंगलवार की दोपहरी में ही हुई है। फिलहाल मौत के कारण भी स्पष्ट नहीं हो सके हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर प्यास का कारण मौत होना प्रतीत हो रहा है। इस मामले में इससे अधिक पीएम रिपोर्ट के आने के बाद ही कहा जा सकता है।



सन् 72 में गांधी आश्रम में डाले थे हथियार
पुलिस रिकार्ड के मुताविक पूर्व डकैत माखन सिंह सिकरवार ने 16 अप्रैल 1972 में जौरा के गांधी आश्रम में जयप्रकाश नारायण तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी के सामने अपने 45 सदस्यों की गैंग के साथ आत्मसमर्पण किया था। विदित हो कि चंबल के बीहड़ों में राज करने वाले दुर्दांत डकैतों में से 511 ने आत्मसमर्पण किया था।




सलाम साहिब था तकिया-कलाम
पूर्व डकैत माखन सिंह की सन 60 के दशक में चंबल के बीहड़ों में तूती बोलती थी। उनकी गिरोह बड़ी गिरोहों में शामिल थी। जिसमें 45 डकैत थे और सभी अपने आपमें कई खूबियों को समेटे हुये थे। आत्मसमर्पित पूर्व डकैत माखन सिंह गिरोह के सरदार थे तथा सलाम साहिब उनका तकिया-कलाम हुआ करता था। एक तरह से यह गिरोह के सदस्यों के लिये मुख्य संदेश हुआ करता था। जिसका मतलब था कि सब खैरियत है। सन 72 में सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद सन 82 तक जेल में रहने वाले माखन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह के सामने भी भविष्य में बंदूक न उठाने की कसम खाई थी। कसम से पूर्व स्व. अर्जुन सिंह को पूर्व डकैत माखन सिंह ने जेल से सिर्फ सलाम साहिब का संदेश भेजा था, जिसका अर्थ था अब सब खैरियत है तथा गृहस्थ जीवन जीना चाहते हैं और तब से लेकर आज तक आत्मसमर्पित डकैत माखन सिंह सिकरवार दादा ने अपने हाथों में बंदूक नहीं उठाई तथा ताउम्र समाजसेवा में बिता दी।

जुल्मों अत्याचार के खिलाफ उठाई थी बंदूक
पुलिस रिकार्ड के मुताविक आत्मसमर्पित पूर्व डकैत माखन सिंह सिकरवार सन् 50 के दशक में देवगढ़ थाना क्षेत्र के नंदगांगोली गांव में सपरिवार निवास करते थे। गांव के दबंग उनके परिवारजनों पर अन्याय अत्याचार करते थे। स्वभाव में काफी सरल व सौम्य माखन सिंह सिकरवार ने बचपन से लेकर जवानी की दहलीज तक दबंगों के अन्याय-अत्यार को सहन करते रहे। लेकिन कब तक। एक दिन उन्होंने अपने छोटे भाई देवी सिंह सिकरवार के साथ बंदूक उठाई और दो हत्याओं को अंजाम देने के बाद बीहड़ की राह पकड़ ली। तब से लेकर अपने पूरे डकैती जीवन के दौरान जुल्मोसितम को जड़ से खत्म करने की मशक्कत में जुटे रहे। एक समय ऐसा भी आया जब डकैत माखन सिंह सिकरवार की बंदूक बीहड़ों में चलती तो उसकी गूंज समूचे देश में सुनाई देती थी।


छिद्दा-माखन की जोड़ी ने हिलाया था बीहड़
आत्मसमर्पित पूर्व डकैत माखन सिंह की गिरोह में उनका रिश्ते का भाई छिद्दा करीबन दस साल तक गिरोह में रहा था। डकैत माखन सिंह के पास सन् 60 के दशक मे आॅटोसेमी रायफल थी जो आज के समय में लाखों रुपये कीमत के बाद भी काफी मशक्कत से मिलती है। बीहड़ों में बड़े गिरोहों में शामिल रहे डकैत माखन सिंह की गिरोह का नाम छिद्दा माखन की गिरोह के नाम से पहचानी जाती थी। छिद्दा की मौत के बाद डकैत माखन काफी टूट गये थे तथा कुछ समय के लिये गिरोह की गतिविधियां भी शांत हो गई थीं, इसी का फायदा उठाकर पुलिस ने सन 60 में डकैत माखन सिंह के भाई देवी सिंह को एनकांउटर में मार गिराया था। इसके बाद डकैत माखन सिंह ने बीहड़ों में कई हत्यायें, लूट, डकैती तथा नरसंहारों को अंजाम दिया था। सबसे बड़ा नरसंहार पन्द्रह पुलिस कर्मियों का था। जिसे डकैत माधौसिंह के साथ मिलकर दिया था। यह सर्चिंग पार्टी डकैत माखन सिंह के गिरोह के एनकांउटर के लिये गई थी।



पूर्व डकैत माखन सिंह का मरणोपरांत का छायाचित्र।
सन 82 के आसपास अजीतपुरा में अपने घर में नाती-पोतों के साथ खेलते पूर्व डकैत माखन सिंह।
सन 82 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन सीएम स्व. अर्जुन सिंह के सामने भागवत की कसम खाकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते पूर्व डकैत माखन सिंह।

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

चार हजार का इनामी डकैत गिरफ्तार


धौलपुर पुलिस ने चार हजार के कुख्यात डकैत औतारी गुर्जर को एक मुठभेड के दौरान एक रायफल और दस जिन्दा कारतूस सहित सोने के गुर्जा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है। औतारी का एक साथी पप्पू खनपुरा भाग जाने में सफल रहा। एसपी राहुल प्रकाश ने बताया कि मुखबिर द्वारा मिली सूचना के आधार पर बाड़ी थाना पुलिस एवं टाईगर रिजर्व फोर्स ने औतारी को सोने के गुर्जा के जंगलों में घेर लिया। पुलिस को देखकर औतारी ने फायरिंग की और पुलिस ने जबावी फायरिंग करते हुए औतारी को पकड़ लिया। एसपी ने बताया कि औतारी ने वर्ष 2008 में पुलिस के एक हैडकास्टेबल खेम सिंह की हत्या की थी और एक उपनिरीक्षक परसराम को गोली मारकर घायल कर दिया था। औतारी पर हत्या, लूट, अपहरण, फिरौती के करीब 24 मामलें विभिन्न थानों में दर्ज है।

रविवार, 17 अप्रैल 2011

घड़ियाल और डाल्फिन बचाने को जागा बोर्ड


पशु संरक्षण बोर्ड को आखिर चंबल में घड़ियाल और डाल्फिनों को बचाने की सुधि आ ही गई। नई जानकारी के मुताबिक बोर्ड ने चंबल नदी से सिंचाई और पीने के पानी के लिए शुरू की गईं नई परियोजनाओं पर रोक लगा दी है। ऐसा चंबल में पानी के गिरते स्तर के कारण किय गय है ताकि घड़ियाल और डाल्फिन के लिए संकट पैदा न हो। मध्य प्रदेश और राजस्थान की कई ऐसी परियोजनाओं का असर नदी के पानी पर पड़ रहा था। चंबल नदी से पानी उठाने के कारण उसका स्तर गिर रहा है। तीन साल पहले भी यहां लगभग 100 मगरमच्छ की मृत्यु हो गई थी.

पशु विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि चंबल का जल स्तर गिरने से मगरमच्छों की जान को खतरा पैदा हो गया है। इसलिए, उन्होंने इस तरह की सिफारिश की है।
राजस्थान सरकार ने हाल ही में धौलपुर के किनारे चंबल में पानी उठान के लिए एक संयंत्र लगाया है, लेकिन अब उसका भाग्य भी अधर में लटक गया है।

गुरुवार, 31 मार्च 2011

चंबल में लड़ मरेंगे डाल्फिन और घड़ियाल


चंबल नदी में पानी का स्तर चिंतनीय स्तर तक गिर गया है। क•ाी अपनी विशाल जल राशि से डराने वाली चंबल को इन दिनों लोग पैदल ही पार किए ले रहे हैं। सबसे बड़ा संकट डाल्फिन और घड़ियालों पर आने वाला है। डाल्फिन और घड़ियालों की चंबल में देश की एकमात्र सेंचुरी होने के कारण चिंता अधिक बढ़ गई है। मुरैना से विश्वजीत गोले की रिपोर्ट सा•ाार कल्पतरु एक्सप्रेस .. .. .. .. ..
विश्वजीत गोले
मुरैना। चंबल नदी में पानी का स्तर लगातार तेजी से कम हो रहा है। हालत यही रहे तो इस नदी में डाल्फिन और घड़ियालों के सामने •ोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। वन्य प्राणी विशेषज्ञों को डर है कि इससे जलीय जीवों के बीच •ोजन के लिए जंग शुरू हो सकती है। इस संकट ने केंद्रीय वन मंत्रालय को •ाी संकट में डाल दिया है लेकिन समस्या से निपटने का उपाय अ•ाी किसी को नहीं सूझ रहा है।
वर्ष 2011 में की गई जलचरों की गणना में ऐसी स्थिति सामने आई है। चंबल के बीहड़ों को हिलाने वाले कुख्यात डकैतों को अपनी अथाह जलराशि से डराने वाली चंबल नदी, अब सूख रही है। जिसे सीधे शब्दों में कहें तो बांझ होती जा रही है। पानी कम होने से चंबल नदी में पलने वाले जलीय जीव मार्च माह में ही गहरे-गहरे गड्ढों में चले गए है। हर साल कम हो रहे पानी ने वन वि•ााग ही नहीं केन्द्रीय वन मंत्रालय तक को चिंता में डाल दिया है।
चंबल सेंचुरी में काम कर रही तमाम देशी व विदेशी स्वयं सेवी संस्थाएं तथा वन्य प्राणी विशेषज्ञ •ाी खासे चिंता में आ गए है। चंबल नदी का जलस्तर कैसे बढ़े अ•ाी फिलहाल इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हुआ है। चंबल नदी में पानी की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सैकड़ों स्थानों पर नदी को पैदल ही पार किया जा सकता है। पानी कम होने की गति को देखते हुए, यह साफतौर पर झलकने लगा है कि महज दो वर्ष में ही चंबल नदी की जलधारा टूट जाएगी, और इसमें पलने वाले जलीय जीव डाल्फिन, मगर, कछुआ तथा विलुप्तप्राय घड़ियाल हमेशा के लिए यहां से खत्म हो जाएंगे।
चंबल नदी राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश की सीमा में बह रही है। चंबल नदी से राजस्थान, मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में पानी की सप्लाई की जा रही है। जिसमें राजस्थान सरकार द्वारा तो •ाारी मात्रा में पानी का दोहन करने के लिए चंबल राजघाट पुल पर बकायदा अपने दो प्लांट लगा रखे हैं। जिनके जरिए हर रोज लाखों गैलन पानी निकाला जा रहा है। एक प्लांट से पानी थर्मल पावर प्लांट के लिए सप्लाई हो रहा है तो दूसरे से धौलपुर व •ारतपुर के लिए पानी •ोजा जा रहा है। चंबल नदी से अनेक नहर राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश क्षेत्र में आती है, जिनके जरिए से पानी को सिंचाई के लिए लिया जा रहा है। वन वि•ााग द्वारा जलचरों की गणना के लिए किए गए सर्वे के दौरान सवा पांच सौ किलोमीटर लंबी चंबल सेंचुरी में दो सैकड़ा से अधिक पुल मिले। इनमें से जलचरों के रहने लायक पुलों को छांटे तो वे 73 है। सर्वे में एक सैकड़ा से अधिक ऐसे स्थान मिले जहां चंबल नदी का पानी घुटनों से नीचे था तथा नदी को पैदल ही पार किया जा सकता है। पिछले पांच साल पूर्व की बात करें तो चंबल नदी में एक दर्जन स्थानों पर ही •ाीषण गर्मी के दिनों में चंबल नदी को पार किया जा सकता था, लेकिन कम होते जलस्तर ने इस संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि की है।

वर्जन बाक्स...
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प्रोजेक्ट फाइनल नहीं हुआ
"चंबल सेंचुरी में पानी हर साल तीव्र गति से कम हो रहा है। ये बहुत बड़ी चिंता का विषय है। पानी की कमी, •ाारी मात्रा में हो रहे दोहन से आई है। चंबल में पानी बढ़ाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि अ•ाी फिलहाल इस पर प्रोजेक्ट फाइनल नहीं हुआ है।"
आर.एस. सिकरवार
वन मंडलाधिकारी मुरैना

"सर्वे के दौरान चंबल नदी में पुलों की संख्या 73 मिली है। मगर, घड़ियाल तथा डाल्फिनों ने पुलों में पहुंचना शुरू कर दिया है। पुलों में इन्हें •ोजन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कमी होने पर टेरटरी बनाएंगें और तब तक इनके बीच •ोजन के लिए युद्ध की सं•ाावनाएं बढ़ जाती हैं।"
डॉ. ऋषिकेश शर्मा, वन्य प्राणी विशेषज्ञ
देवरी घड़ियाल ईको सेंटर मुरैना

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

निर्भय के जीवन पर फिल्म


यमुना नदी के बीहड़ों में बीहड़ फिल्म का मंचन इन दिनों चल रहा है। फिल्म का नाम मेरे ही ब्लाग पर बीहड़ ही है। इस फिल्म की शूटिंग का उद्घाटन शुक्रवार को औरैया के बीहड़ों में हाईकोर्ट के जज रवींद्र सिंह और कानपुर रेंज के आईजी ने किया। फिल्म डकैत निर्भर गुर्जर के जीवन पर आधारित है और इसमें निर्भय की भूमिका संजीव परिहार और सीमा परिहार की भूमिका में मुन्नी होंगी। इस फिल्म का निर्माण बुंडेड फिल्म बना चुके कृष्णा मिश्रा कर रहे हैं। संजय फिल्म गंगाजल में काम कर चुके हैं। शुक्रवार को निर्भय और सीमा की शादी का फिल्मांकन कर इसकी शुरुआत की गई।