रविवार, 16 नवंबर 2008
बच निकला दस्यु जगन
11 लाख का इनामी और तीन राज्यों में वांछित दस्यु सरगना जगन गुर्जर शनिवार की रात ग्वालियर पुलिस से हुई मुठभेड़ में बच निकला। पुलिस को टाटा सूमो और कुछ हथियार ही मिल सके। अनुमान है कि मुठभेड़ में दो डकैतों को गोलियां लगी हैं। जगन गुर्जर के साथ महिला डकैत कोमेश गुर्जर भी थी। यह मुठभेड़ चिन्नौनी थाना क्षेत्र में हुई।
शनिवार, 15 नवंबर 2008
चुनाव में चहका बीहड़
पहली बार बीहड़ में एक नई पहल हो रही है। सदियों से दबे और आज भी हद तक पिछड़े लोगों में उत्तेजना है। इस उत्तेजना की वजह है चुनाव। मध्यप्रदेश में एक जिला है मुरैना। बीहड़ और बेहद जटिल परिस्थिति वाले इस जिले के पास ही है श्योपुर जिला। मुरैना को काटकर बनाए गए इस जिले में सहरिया आदिवासी की बड़ी संख्या है। यह जाति सदियों से पिछड़ी रही है। इसकी कई पीढ़ियों में तो ट्रेन देखी तक नहीं है। शहर में चलने और उठने बैठने का क्या कायदा होता है यह नहीं जानते। इसके कई लोग तो पुलिस के सिपाही को देखते ही अभी हाल तक भागते रहे हैं लेकिन लगता है अब हालात बदल रहे हैं। इस जिले की तहसील विजयपुर से भाजपा के टिकट पर पहली वार इस इलाके से कोई आदिवासी चुनाव लड़ रहा है और यह आदिवासी है सीताराम जो गर्व से अपने नाम के आगे आदिवासी लगाते हैं। यहां मुद्दा किसी पार्टी का नहीं है लेकिन मौजूदा हालात में जिस तरह सीताराम के साथ वहां का आदिवासी एकजुट हुआ है उसने जता दिया है कि सत्ता में आने की छटपटाहट उनके अंदर भी है। चिंता है तो सिर्फ इतनी कि यह छटपटाहट किसी वैचारिक स्तर या अपने हक को पाने की अकुलाहट के बजाए जाति के उसी विषैले समीकरण से पैदा हुई है जिसने मौजूदा राजनीति के परिदृश्य को नीलकंठी बना दिया है। कुछ भी हो लेकिन इससे आदिवासियों में राजनीति का स्वाद तो मिलेगा ही और देर से ही सही वह अच्छे बुरे की पहचान करेंगे। सीताराम आदिवासी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि सहरिया आदिवासियों में से चुनाव लड़ने वाले शायद वह पहले प्रत्याशी हैं जो किसी राष्ट्रीय पार्टी के टिकट पर चुनावन लड़ रहे हैं।
बुधवार, 22 अक्टूबर 2008
जगन का करौली में डेरा
तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना दस्यु जगन गुर्जर ने इन दिनों राजस्थान के करौली जिले में डेरा डाल रखा है। बीहड़ सूत्रों के मुताबिक जगन ने अपना ठिकाना महावीर जी थाना क्षेत्र के तहत आने वाले कैमरी और खीमा का पुरा में बना लिया है। यहीं पर एक ग्रामीण की जीप से वह आवाजाही कर रहा है। पुलिस से छिपकर वह अपनी ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। इसके लिए वह हथियार और कारतूस खरीदने की फिराक में है। उसने अपने गिरोह को तीन हिस्सों में बांट रखा है। वह स्वयं दस्यु सुंदरी कौमेश के साथ है। दूसरे हिस्से की कमान उसके भाई पप्पू और पान सिंह के हाथ में है।
धौलपुर में दो दस्यु ढेर
धौलपुर पुलिस ने सरमथुरा इलाके में बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ में दो इनामी दस्यु मुन्ना कंजर और बनियाराम मीणा को मार गिराया। भाग निकले दस्यु नारायन और निहाला की तलाश जारी है। मारे गए दस्यु खान इलाके में हत्या, चौथ वसूली और पुलिस पर हमला करने के आरोप में वांछित थे। उनके ऊपर दो-दो हजार का इनाम घोषित था। पुलिस ने इनके कब्जे से एक 306 बोर और एक 315 बोर की रायफल और करीब डेढ़ सौ कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस की माने तो मारे गए दस्यु खैमरी गांव में अपने लिए हथियार और कारतूस खरीदने आए थे।
शनिवार, 18 अक्टूबर 2008
गुपचुप जारी है एक लड़ाई
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008
खानों पर डकैतों का कब्जा
धौलपुर इलाका पत्थरों की खान के लिए मशहूर है। इस एक काम से ही राज्यों को करोड़ों की आमदनी होती है। अफसोस इस बात का है इस इलाके पर कानून नहीं डकैतों का राज्य चलता है। दस्यु उन्मूलन में पुलिस भले ही ताकत लगा रही हो लेकिन राजस्थान के धौलपुर जिले के बसेड़ी और सरमथूरा और मुरैना जिले के सबलगढ़ और करोली के कुछ इलाकों में डकैतों का ही हुकुम चलता है। इलाके में सक्रिय एक दर्जन से अधिक दस्यु बंदूक की दम पर इन खान संचालकों से लाखों रुपये की वसूली करते हैं। जनपद के चंबल इलाके में इस समय दस्यु सरगना जगन गुर्जर पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस गैंग का सदस्य पान सिंह और कोमेश चौथ वसूली के लिए जाते हैं। करौली जनपद में प्रेम सिंह मीणा और रामबाबू काछी के हाथ वसूली की बागडोर है। यह दस्यु विशेष तरीके से काम करते हैं और किसी एक दिन आकर खान संचालक या श्रमिकों को अपना फरमान सुना चौथ की रकम और स्थान देकर एक कोड वर्ड देते हैं। तय दिन और समय तक रकम न पहुंचने तक खान में काम बंद रहता है।
रविवार, 12 अक्टूबर 2008
दस्यु सीमा परिहार सपा में
पूर्व दस्युओं का राजनीति से और राजनेताओं का दस्युओं से लगाव तमाम बयानों के बावजूद मजबूत जोड़ की तरह जुड़ा हुआ है। ताजा घटनाक्रम यह है कि फूलन को डकैत बनाने की कहानी के मुख्य सूत्रधार लालाराम और श्रीराम गैंग की सीमा परिहार अब सपा में शामिल हो गई हैं। सीमा को लेकर एक फिल्म भी बन चुकी है। इससे पहले सीमा इंडियन जस्टिस पार्टी से सांसद का उत्तरप्रदेश की इटावा सीट से चुनाव भी लड़ चुकी है। इसके बाद वह रालोद में शामिल हुई और हाल ही में सपा में शामिल हो गई हैं। सीमा पर दो दर्जन से अधिक मुकदमें हैं और इन दिनों पर औरैया जिले के दिबियापुर कसबे में रहती हैं।
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